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आलू के लिए सबसे अच्छी खाद — NPK की सही मात्रा, समय और तरीका

आलू के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की अनुशंसित मात्रा, गोबर खाद, और कब-कौन-सी खाद डालें — मिट्टी जाँच के आधार पर संतुलित पोषण की पूरी जानकारी।

राजीव शर्मा · 13 जून 2026 · 2 मिनट
आलू के लिए सबसे अच्छी खाद — NPK उर्वरक

आलू कम समय में अधिक पैदावार देने वाली, पोषण की भूखी फसल है — इसलिए संतुलित खाद इसकी सफलता की कुंजी है। किसान अक्सर पूछते हैं कि "सबसे अच्छी खाद कौन-सी है", पर असली जवाब किसी एक खाद में नहीं, बल्कि नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) के सही संतुलन और सही समय में है। नाइट्रोजन पत्तियों और तनों का विकास करता है, फॉस्फोरस जड़ और कंद बनने में मदद करता है, और पोटाश कंद का आकार, गुणवत्ता और भंडारण-क्षमता बढ़ाता है।

कितनी मात्रा

भारतीय मैदानी क्षेत्रों के लिए आम तौर पर नाइट्रोजन लगभग 150, फॉस्फोरस (P₂O₅) करीब 80 और पोटाश (K₂O) लगभग 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अनुशंसित है — किस्म, क्षेत्र और मिट्टी के अनुसार इसमें थोड़ा फेरबदल होता है (कई सिफ़ारिशें नाइट्रोजन 120–180 और पोटाश 100–120 किग्रा/हेक्टेयर तक बताती हैं)। ये पोषक यूरिया, सिंगल सुपर फॉस्फेट या DAP, और म्यूरेट ऑफ़ पोटाश के रूप में दिए जाते हैं। इनके साथ 20–25 टन प्रति हेक्टेयर अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट मिट्टी की सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद है।

संतुलित पोषण
N : P : K ≈ 150 : 80 : 100
मैदानी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित मात्रा (किग्रा/हेक्टेयर) — किस्म और क्षेत्र से थोड़ा बदलती है। साथ में 20–25 टन गोबर खाद। असली मात्रा हमेशा मिट्टी जाँच के आधार पर तय करें।

कब और कैसे डालें

समय का सही होना मात्रा जितना ही ज़रूरी है। पूरी मात्रा में फॉस्फोरस और पोटाश, और आधी नाइट्रोजन, रोपाई के समय आधार खाद (बेसल) के रूप में कूड़ों में डाली जाती है। बची हुई आधी नाइट्रोजन मिट्टी चढ़ाते (अर्थिंग अप) समय दी जाती है, जो आम तौर पर रोपाई के 30–40 दिन बाद, जब पौधा 15–20 सेंटीमीटर ऊँचा हो जाए, की जाती है। कुछ किसान बची नाइट्रोजन को दो हिस्सों में — पहली और दूसरी अर्थिंग अप पर — भी बाँटते हैं।

ध्यान रहे, ज़रूरत से ज़्यादा नाइट्रोजन से पत्तियाँ तो ख़ूब बढ़ती हैं पर कंद छोटे रह जाते हैं, इसलिए संतुलन ज़रूरी है। फॉस्फोरस की उपयोग-दक्षता कम होती है, इसलिए इसे फसल की ज़रूरत से कुछ अधिक देना पड़ता है, जबकि पोटाश की सबसे अधिक माँग कंद के फूलने (बल्किंग) के दौरान रहती है।

मिट्टी जाँच — सबसे भरोसेमंद रास्ता

ऊपर दी गई मात्रा एक सामान्य अनुशंसा है। हर खेत की उर्वरता, pH और जैविक पदार्थ अलग होते हैं, इसलिए सबसे सही तरीका है बोवाई से पहले मिट्टी जाँच कराना और उसी के आधार पर खाद तय करना। बिना जाँच के अंदाज़े से खाद डालना या तो पैसे की बर्बादी कराता है या पैदावार में कमी। संतुलित खाद के साथ-साथ सही बीज और सिंचाई भी ज़रूरी है — देखें आलू बीज की मात्रा और लागत और आलू की सिंचाई कब और कितनी बार।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आलू के लिए कौन-सी खाद सबसे अच्छी है?
कोई एक 'सबसे अच्छी' खाद नहीं, बल्कि संतुलित NPK सबसे ज़रूरी है — आम तौर पर नाइट्रोजन ~150, फॉस्फोरस ~80 और पोटाश ~100 किग्रा प्रति हेक्टेयर, यूरिया, SSP/DAP और म्यूरेट ऑफ़ पोटाश के रूप में। साथ में 20–25 टन गोबर/कम्पोस्ट खाद मिट्टी की सेहत सुधारती है।
खाद कब और कैसे डालें?
पूरी मात्रा में फॉस्फोरस और पोटाश तथा आधी नाइट्रोजन रोपाई के समय आधार खाद (बेसल) के रूप में डालें। बची हुई नाइट्रोजन मिट्टी चढ़ाते (अर्थिंग अप) समय, यानी रोपाई के लगभग 30–40 दिन बाद, डालें।
आलू में गोबर खाद कितनी डालें?
अच्छी तरह सड़ी हुई 20–25 टन प्रति हेक्टेयर गोबर खाद या कम्पोस्ट आम तौर पर खेत की तैयारी के समय मिलाई जाती है। यह न केवल पोषण देती है बल्कि मिट्टी की जलधारण क्षमता और बनावट भी सुधारती है।
क्या मिट्टी जाँच ज़रूरी है?
हाँ। हर खेत की उर्वरता अलग होती है, इसलिए ऊपर दी गई मात्रा एक सामान्य अनुशंसा है। बोवाई से पहले मिट्टी जाँच कराकर ही सही मात्रा तय करना सबसे भरोसेमंद तरीका है — इससे पैसे की बचत और बेहतर पैदावार दोनों मिलती है।
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लेखक के बारे में
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राजीव शर्मा
संवाददाता

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