आलू बीज की सही मात्रा और लागत — प्रति एकड़, हेक्टेयर और बीघा का हिसाब
आलू में बीज सबसे बड़ी लागत है — कंद के आकार के हिसाब से सही बीज दर, प्रति एकड़/हेक्टेयर/बीघा का हिसाब, बीज की कीमत और प्रमाणित बीज क्यों ज़रूरी है।

आलू की खेती में सबसे बड़ा एकल ख़र्च बीज का होता है — कई अध्ययनों में यह कुल लागत का करीब एक-चौथाई से एक-तिहाई तक बैठता है। इसलिए बीज की सही मात्रा और गुणवत्ता तय करना सीधे मुनाफ़े को छूता है। पर शुरुआत में ही एक उलझन साफ़ कर लेनी चाहिए: "बीघा" कोई एक तय इकाई नहीं है — उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यह करीब एक-चौथाई एकड़ है, जबकि बिहार और बंगाल में इससे काफ़ी बड़ा। इसलिए असली हिसाब हमेशा प्रति एकड़ या हेक्टेयर में लेना चाहिए, और बीघा का आँकड़ा सिर्फ़ अनुमान के तौर पर।
कितना बीज चाहिए
बीज दर मुख्यतः कंद के आकार पर निर्भर करती है। छोटे कंद के लिए लगभग 8–10 क्विंटल प्रति एकड़, मध्यम आकार (25–125 ग्राम) के कंद के लिए 10–12 क्विंटल, और बड़े कंद के लिए 12–18 क्विंटल प्रति एकड़ की ज़रूरत होती है। रोपाई आम तौर पर मेड़ों पर 60×20 सेंटीमीटर की दूरी पर की जाती है। जहाँ तक हो, साबुत (बिना कटे) मध्यम कंद इस्तेमाल करना बेहतर है, क्योंकि कटे कंद से रोग फैलने का ख़तरा बढ़ता है।
एकड़, हेक्टेयर और बीघा
प्रति हेक्टेयर बीज दर मोटे तौर पर 25–35 क्विंटल बैठती है (एक हेक्टेयर ≈ 2.47 एकड़)। बीघा में बदलते समय सावधानी ज़रूरी है: उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के पक्के बीघा (~0.25 एकड़) में मध्यम कंद का करीब 2.5–3 क्विंटल बीज लगेगा, जबकि बिहार और बंगाल के बड़े बीघा में यह मात्रा अधिक होगी। इसलिए दुकान या साथी किसान से दर पूछते समय हमेशा यह भी पूछें कि वह किस इकाई की बात कर रहे हैं।
बीज की लागत
गुणवत्ता और स्रोत के अनुसार बीज की कीमत आम तौर पर ₹800–1,200 प्रति 50 किलो बोरी के आसपास रहती है; प्रमाणित बीज इससे महँगा पड़ता है। चूँकि बीज सबसे बड़ी लागत है, यहीं सबसे बड़ी ग़लती भी होती है — सस्ते या बार-बार बचाए गए बीज से शुरुआती बचत अक्सर वायरस-जनित रोगों के कारण 30–50% तक पैदावार घटाकर कहीं बड़ा नुक़सान करा देती है। इसलिए भरोसेमंद स्रोत का प्रमाणित बीज लंबे समय में सस्ता पड़ता है।
बीज उपचार और आगे की तैयारी
रोपाई से पहले कटे कंदों को 0.5% मैंकोज़ेब घोल (5 ग्राम प्रति लीटर पानी) में करीब 10 मिनट डुबोकर उपचारित करना शुरुआती सड़न से बचाता है। एक-दो साल बाद बीज बदलना भी ज़रूरी है, क्योंकि हर पीढ़ी में आलू बीज रोगग्रस्त होता जाता है। बीज की मात्रा तय करने के बाद अगला कदम है संतुलित खाद और सही सिंचाई — इन पर विस्तार से आलू के लिए सबसे अच्छी खाद और आलू की सिंचाई कब और कितनी बार देखें।


