आलू बोने का सही समय और तरीका — ज़ोन के हिसाब से रोपाई की पूरी जानकारी
आलू बोने का सही समय एक तारीख़ नहीं, तापमान तय करता है — मैदान, पहाड़ और पठार के लिए अलग-अलग रोपाई का समय, सही दूरी-गहराई और देर से बोने का जोखिम।

"आलू कब बोएँ" का सबसे सही जवाब किसी एक तारीख़ में नहीं, बल्कि तापमान में है। आलू ठंडे मौसम की फसल है, और इसका सबसे नाज़ुक चरण — कंद बनना और फूलना — तब अच्छा होता है जब तापमान करीब 20°C के आसपास हो। इसीलिए पूरे देश में रोपाई का समय अलग-अलग है, और हर किसान को अपने इलाक़े और मौसम के हिसाब से समय चुनना चाहिए, न कि किसी एक राष्ट्रीय तारीख़ के भरोसे।
मैदानी इलाक़े
इंडो-गंगा के मैदानों में मुख्य (रबी) फसल की आदर्श रोपाई अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से नवंबर के पहले हफ़्ते तक मानी जाती है। इस समय बोने से कंद फूलने का दौर दिसंबर-जनवरी की ठंडक के साथ बैठता है, जो सबसे अच्छी पैदावार देता है। इसका तर्क सीधा है: बहुत जल्दी बोने पर उगती फसल को अक्टूबर की गर्मी झेलनी पड़ती है, और बहुत देर से बोने पर कंद-विकास फरवरी की बढ़ती गर्मी से टकरा जाता है। आदर्श स्थिति वह है जब औसत अधिकतम तापमान लगभग 30–32°C और औसत न्यूनतम 18–20°C के आसपास हो। इन्हीं मैदानों में एक स्प्रिंग फसल जनवरी में भी ली जाती है।
पहाड़ और पठार
ऊँचाई और मौसम बदलते ही समय भी बदल जाता है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की पहाड़ियों में आलू गर्मी (समर) की फसल के रूप में मई के आसपास, और स्प्रिंग फसल के रूप में जनवरी-फरवरी में बोया जाता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे पठारी राज्यों में खरीफ फसल जून के अंत तक और रबी फसल मध्य अक्टूबर-नवंबर में लगती है। दक्कन के पठार में दो फसलें (मध्य जून–मध्य जुलाई और अक्टूबर-नवंबर) तक ली जाती हैं, जबकि नीलगिरि की पहाड़ियों में बारिश के अनुसार तीन फसलें (अप्रैल, अगस्त, जनवरी) तक संभव हैं।
रोपाई का तरीका
समय जितना ज़रूरी है, तरीका भी उतना ही। आलू मेड़-नाली (रिज-फ़रो) पद्धति से बोया जाता है, जो जल-निकासी के लिहाज़ से सबसे अच्छी है। आम तौर पर मेड़-से-मेड़ की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे-से-पौधे की दूरी 20 सेंटीमीटर रखी जाती है, और कंद को मेड़ के बीच में करीब 5–7 सेंटीमीटर गहराई पर लगाया जाता है। अंकुरित मध्यम कंद (लगभग 45–50 ग्राम) रोपाई के लिए आदर्श हैं। रोपाई के बाद के शुरुआती 4–6 हफ़्ते खरपतवार नियंत्रण के लिहाज़ से सबसे अहम हैं, और बाद में मिट्टी चढ़ाना (अर्थिंग अप) कंद को हरा होने और धूप से बचाता है। बीज की मात्रा और लागत पर विस्तार से आलू बीज की मात्रा और लागत देखें।
देर से बोई फसल का ध्यान
जहाँ किसी कारण रोपाई देर से हो, वहाँ कटाई का समय और भी अहम हो जाता है। मैदानों में देर से बोई फसल को अप्रैल के अंत तक काट लेना चाहिए, ताकि बढ़ते तापमान और चारकोल रॉट (कोयला सड़न) से कंद बच सकें। सही समय, सही दूरी और सही सिंचाई-खाद मिलकर ही अच्छी फसल बनाते हैं — देखें आलू के लिए सबसे अच्छी खाद, आलू की सिंचाई कब और कितनी बार और आलू में लगने वाले रोग और उनका इलाज।


