हाईफार्म पाठशाला दीक्षांत समारोह: आलू की बेहतर खेती करने वाले किसान चैंपियन सम्मानित
हाईफार्म पाठशाला के दूसरे दीक्षांत समारोह में उन किसानों का सम्मान हुआ जिन्होंने अपने खेतों में डेमो फार्म बनाए और खेती के बेहतर तरीके 6,000 से ज़्यादा किसानों तक पहुँचाए।

हाईफार्म पाठशाला · बैच 2025-26
जिन किसानों ने अपने खेतों में डेमो फार्म बनाए और खेती के बेहतर तरीके 6,000 से ज़्यादा किसान भाइयों तक पहुँचाए, उन्हें दूसरे दीक्षांत समारोह में किसान चैंपियन का सम्मान मिला।
अहमदाबाद, गुजरात, 15 अक्टूबर 2026: हाईफन फूड्स की कृषि इकाई हाईफार्म ने अपना दूसरा हाईफार्म पाठशाला दीक्षांत समारोह मनाया। यह समारोह उन किसानों के नाम रहा जिनकी सीखने और सिखाने की लगन ने उनके अपने खेत से आगे तक बदलाव लाया। पास होने वाले किसान अपने परिवारों के साथ आए। उन्हें किसान चैंपियन के तौर पर सम्मानित किया गया, क्योंकि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से डेमो फार्म बनाए, खेती के बेहतर तरीके अपनाए और दूसरे किसानों को भी प्रोसेसिंग आलू की टिकाऊ खेती से जोड़ा।
पाठशाला कैसे चलती है
हाईफार्म पाठशाला खेत पर चलने वाला किसान शिक्षा कार्यक्रम है। यह दो बातों पर टिका है: डेमो फार्म, जहाँ खेती के बेहतर तरीके आँखों के सामने दिखाए जाते हैं, और ट्रेन-द-ट्रेनर मॉडल, जिसमें किसान खुद सीखकर आसपास के गाँवों के किसानों को नई जानकारी और नई खेती तकनीक सिखाते हैं। साबरकांठा और बनासकांठा में 17 माइक्रो-क्लस्टर और 33 डेमो फार्म पर चलने वाला यह कार्यक्रम पुराने खेती के अनुभव को आज की खेती विज्ञान के साथ जोड़ता है। किसानों को पूरे सीज़न सलाह मिलती है, ताकि खेती का खर्च घटे, प्रोसेसिंग आलू की क्वालिटी सुधरे और खेती टिकाऊ बने।
पास होने वालों में अनुभवी किसान, युवा किसान और महिला किसान, सभी थे। इन्होंने डेमो के लिए अपने खेत दिए और हाईफार्म का सुझाया पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़ अपनाया। खेत पर हाथ से सीखकर और अपने ही खेतों में नतीजे दिखाकर ये किसान अब ट्रेनर और मार्गदर्शक बन गए हैं, और खेती के बेहतर तरीके 6,000 से ज़्यादा किसानों तक पहुँचा चुके हैं।

हवा में टोपियाँ: हाईफार्म पाठशाला बैच 2025-26 के किसान।
"किसान ट्रेनर बनें, यही सपना था"
इस पहल के पीछे की सोच पर हाईफार्म के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सौंदरराजन एस ने कहा, “हाईफार्म पाठशाला पुराने खेती के अनुभव और आज की खेती विज्ञान को साथ लाती है, ताकि किसान खर्च घटा सकें, संसाधन बचा सकें और क्वालिटी व मुनाफ़ा बढ़ा सकें। अनुभवी किसानों, युवा किसानों और महिला किसानों को ट्रेनर और मार्गदर्शक बनते देखना इस सपने को सच होते देखना है। जानकारी बाँटने की उनकी लगन आलू की एक मज़बूत व्यवस्था बना रही है।”
मिट्टी की सेहत से बचत तक
मिट्टी की सेहत और मिट्टी को फिर से ताक़तवर बनाने वाली खेती हाईफार्म पाठशाला के केंद्र में है। मिट्टी की जाँच, संतुलित खाद, बुवाई के बेहतर तरीके, नपी-तुली सिंचाई और खेत की लगातार निगरानी से किसान संसाधनों का सही इस्तेमाल करते हैं, मिट्टी की उपज बनाए रखते हैं और प्रोसेसिंग आलू की एक जैसी क्वालिटी पाते हैं।
हिस्सा लेने वाले किसानों ने खेती के कुल खर्च में करीब 10–12% की कमी, खाद के खर्च में करीब 15% की बचत और सिंचाई के पानी में करीब 30–35% की बचत दर्ज की है। इससे साफ़ है कि सोच-समझकर खेती करने और पूरे सीज़न खेती सलाह मिलने का सीधा फ़ायदा होता है।
अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (सीआईपी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (सीएसएआरसी) के निदेशक और दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने किसानों की पहल की तारीफ़ करते हुए कहा, “पाठशाला के किसान खेती को नए प्रयोग, ज़्यादा पैदावार और बेहतर कमाई के मौक़ों से जोड़कर उद्यमी सोच दिखा रहे हैं। बेहतर तरीके अपनाने का उनका जोश हौसला बढ़ाता है। साथ सीखकर, अपने अनुभव बाँटकर और एक-दूसरे का साथ देकर वे इस तरक़्क़ी को अपने खेतों से आगे ले जा सकते हैं और अपने समुदाय के लिए बड़े मौक़े बना सकते हैं।”
सम्मान और परिवार
बेहतरीन किसानों को खेती के अच्छे तरीकों, प्रिसिज़न खेती, डिजिटल तकनीक अपनाने और प्रोसेसिंग आलू की क्वालिटी में शानदार काम के लिए सम्मानित किया गया। परिवारों की मौजूदगी ने इस मौक़े को सबका जश्न बना दिया, उनकी सीख, लगन और कामयाबी का जश्न।

मंच पर सम्मान: एक किसान चैंपियन को दूसरे हाईफार्म पाठशाला दीक्षांत समारोह में पुरस्कार।
दूसरे हाईफार्म पाठशाला दीक्षांत समारोह ने दिखाया कि डेमो फार्म पर मिली सीख किस तरह पूरे समुदाय की तरक़्क़ी बन सकती है, और गुजरात में प्रोसेसिंग आलू की ऐसी व्यवस्था बना सकती है जो टिकाऊ हो, ज़्यादा पैदावार दे और क्वालिटी पर ध्यान रखे।
हाईफार्म के बारे में
हाईफन फूड्स की कृषि इकाई हाईफार्म अपनी किसान-जोड़ो पहल और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के ज़रिए किसानों से मज़बूत कारोबारी रिश्ते रखती है। इससे प्रोसेसिंग वाले आलू (फ्रेंच फ्राइज़ और चिप्स के लिए) और खाने वाले आलू की पैदावार और ख़रीद आसान होती है।
हाईफार्म का लक्ष्य 30,000 किसानों के साथ काम करना और 2028 तक भारत में 10 लाख मीट्रिक टन आलू ख़रीदना है। हाईफार्म ताज़े फलों और सब्ज़ियों की ख़रीद में भी अपना दायरा बढ़ा रहा है।
गुजरात में आलू प्रोसेसिंग के बारे में और पढ़ें: गुजरात की आलू प्रोसेसिंग योजना
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