ग्रिम ने भारत के लिए छोटी आलू मशीनें क्यों बनाईं, और छोटे किसानों को अब क्या चाहिए
भारत के खेत छोटे हैं, इसलिए ग्रिम और शक्तिमान ने 45 से 80 HP ट्रैक्टर के लिए आलू मशीनें बनाईं। शक्तिमान ग्रिम के पूर्व बिज़नेस हेड देवेंद्र के झा बताते हैं कि छोटे किसान तक मशीन कैसे पहुँचे।

ग्रिम को भारत में छोटी मशीनें क्यों चाहिए थीं?
ग्रिम जर्मनी की कंपनी है जो आलू, सब्ज़ी और चुकंदर की मशीनें बनाती है और 100 से ज़्यादा देशों में काम करती है। जब कंपनी ने भारत को देखा, जो आलू का तेज़ी से बढ़ता बाज़ार है, तो पता चला कि यहाँ के खेत यूरोप वाले खेतों से बहुत छोटे हैं।
हमने देखा कि यहाँ खेत यूरोप और उत्तरी अमेरिका से बहुत छोटे हैं, इसलिए यहाँ जर्मनी वाली मशीनों से छोटी मशीनें चाहिए। इसलिए हमने सोचा कि अच्छी क्वालिटी की, पर छोटी मशीनें भारत के लिए कैसे दें। — फ्रांज़-बर्न्ड क्रुटहाउप, ग्रिम (Potato Pro से बातचीत, हिंदी में भाव)
इसके लिए ग्रिम ने भारत में एक साथी ढूँढा: राजकोट की शक्तिमान, जो दो भाइयों की फ़ैमिली कंपनी है और जिसके चेयरमैन अश्विन गोहिल हैं। 2019 में ग्रिम के तब के CEO फ्रांज़-बर्न्ड क्रुटहाउप ने यह साझेदारी साइन की। दोनों कंपनियों की शक्तिमान ग्रिम में आधी-आधी हिस्सेदारी है।
शक्तिमान ग्रिम कौन-सी मशीनें बनाती है?
कंपनी ने आलू की फ़सल के हर काम के लिए एक मशीन बनाई:
- डीप टिलर – गहरी जुताई
- प्लांटर – बुवाई
- प्लांट टॉपर – खुदाई से पहले पत्ते काटना
- विंडरोअर – आलू निकालकर लाइन में रखना
- हार्वेस्टर – खुदाई और इकट्ठा करना
- क्रॉप रिसीवर – माल उठाना
क्रुटहाउप के मुताबिक़ पूरी रेंज 45 HP से करीब 75–80 HP के ट्रैक्टर के लिए बनी है, यानी वही ट्रैक्टर जो भारत के किसान चलाते हैं, न कि यूरोप के बड़े फ़ार्म वाले भारी ट्रैक्टर।
आलू प्लांटर, हार्वेस्टर या कोई और आलू मशीन खरीदनी है? अपने ट्रैक्टर का HP, 2WD या 4×4, और एकड़ बताइए।
WhatsApp पर पूछेंअब तक कंपनी का काम कैसा रहा?
क्रुटहाउप कहते हैं कि नतीजे "बहुत अच्छे" रहे हैं। कंपनी को इनोवेशन अवॉर्ड मिले हैं, जिनमें विंडरोअर के लिए सिल्वर मेडल भी है। मशीनें अब कई देशों में जा रही हैं, ख़ासकर दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ़्रीका में।
छोटे किसानों को अब क्या चाहिए? देवेंद्र के झा की राय
देवेंद्र के झा कहते हैं कि शक्तिमान ग्रिम ने अब तक अच्छा काम किया है, लेकिन आगे इससे कहीं ज़्यादा मौक़ा है।
शक्तिमान ग्रिम ने अब तक अच्छा काम किया है, पर मुझे इससे कहीं ज़्यादा संभावना दिखती है। कई मशीनों को ज़्यादा HP वाला ट्रैक्टर चाहिए, और कुछ को सबसे अच्छे काम के लिए 4×4 ट्रैक्टर। यही चीज़ ज़्यादातर छोटे किसानों के पास नहीं है। — देवेंद्र के झा, पूर्व बिज़नेस हेड, शक्तिमान ग्रिम
रेंज 45 HP से शुरू होती है, पर भारत के बहुत-से आलू किसान कुछ एकड़ में कम HP वाले 2WD ट्रैक्टर से खेती करते हैं। नरम या गीली मिट्टी में ऐसे ट्रैक्टर के पीछे भारी प्लांटर या हार्वेस्टर फिसल सकता है, धीमा चल सकता है या काम अधूरा छोड़ सकता है। यानी जिन किसानों को मशीन से सबसे ज़्यादा फ़ायदा होगा, वही उसे ठीक से चला नहीं पाते।
उनके चार सुझाव:
- किसान ग्रुप और FPO: सदस्य मिलकर बड़ी, 4×4 वाली मशीनें ख़रीदें और सबके खेत में चलाएँ, ताकि अकेले किसान पर पूरा ख़र्च न पड़े।
- एकड़ के हिसाब से किराया: कोई ग्रुप या गाँव का उद्यमी मशीन और सही ट्रैक्टर चलाकर सर्विस दे। छोटा किसान काम के पैसे दे, मशीन के नहीं।
- 2WD ट्रैक्टर वाली मशीनें: हल्के, पतले प्लांटर और डिगर, जिन्हें आम 2WD ट्रैक्टर आराम से खींच सके, छोटे किसानों का बहुत बड़ा बाज़ार खोलेंगे।
- ट्रैक्टर देखकर मशीन लें: ख़रीदने से पहले कंपनी हर मशीन के लिए कितना HP और 2WD या 4×4 बताती है, उसे अपने ट्रैक्टर से मिलाएँ।
छोटा खेत है या 2WD ट्रैक्टर? हम बताएँगे कौन-सा प्लांटर, डिगर या हार्वेस्टर ठीक रहेगा, या किस ग्रुप के साथ मिलकर लें।
WhatsApp पर पूछेंअपने खेत के साइज़ के हिसाब से प्लांटर चुनने के लिए पढ़ें: आपके खेत के लिए कौन-सा आलू प्लांटर सही है। ग्रिम प्लांटर की क़ीमत और ख़रीदने का तरीक़ा: ग्रिम आलू प्लांटर भारत में।
वीडियो और इंटरव्यू: Potato Pro
▶ बुवाई का मौसम · String Bio के साथ वीडियोआलू में तीन स्प्रे: कब, कितना और कैसेएक एकड़ में 88 ग्राम, 200 लीटर पानी। डेढ़ मिनट का वीडियो, साथ में अपनी अतिरिक्त पैदावार का हिसाब।वीडियो देखें →

