जेवर में आलू की क्लास: स्ट्रिंग बायो, फॉर्च्यून राइस और अलीगढ़ के किसान
स्ट्रिंग बायो के डॉ. गुरुराज कुलकर्णी ने अलीगढ़ में फॉर्च्यून राइस के जेवर मॉडल फार्म पर आलू किसानों को प्रशिक्षण दिया और 12 फार्म पर हुए BioLyft ट्रायल के नतीजे बताए: किसानों के अनुसार 10–20% ज़्यादा पैदावार।

इंडस्ट्री स्पॉटलाइट · किसान प्रशिक्षण दिवस
स्ट्रिंग बायो के फसल वैज्ञानिक डॉ. गुरुराज कुलकर्णी पिछले सीज़न के 12 आलू फार्म के BioLyft नतीजे लेकर अलीगढ़ पहुँचे, ठीक उस समय जब इस रबी की फसल खेत में जा रही है।
- जगह
- जेवर मॉडल फार्म, फॉर्च्यून राइस लिमिटेड
- पता
- गाँव दरगवा, गभाना, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
- कब
- अक्टूबर 2026
- फसल
- आलू, रबी 2026-27
- सत्र लिया
- डॉ. गुरुराज कुलकर्णी, स्ट्रिंग बायो

अक्टूबर में स्ट्रिंग बायो ने अलीगढ़ ज़िले में फॉर्च्यून राइस लिमिटेड के जेवर मॉडल फार्म पर आलू प्रशिक्षण दिवस रखा। स्ट्रिंग बायो के हेड ऑफ क्रॉप एक्सीलेंस डॉ. गुरुराज कुलकर्णी ने फॉर्च्यून राइस की एग्रोनॉमी टीम और प्रगतिशील आलू किसानों को खेती के तरीक़े, कंद की क्वालिटी और फसल की देखभाल समझाई, और पिछली रबी के BioLyft ट्रायल के नतीजे बताए। इन ट्रायल में छह राज्यों के 12 फार्म पर एक स्प्रे वाले एकड़ की तुलना बिना स्प्रे वाले एकड़ से की गई, और किसानों ने स्प्रे वाले एकड़ से 10 से 20 प्रतिशत ज़्यादा आलू बताया।
जेवर की क्लास में क्या सिखाया गया
अलीगढ़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आलू पट्टी के बीच में है, और उत्तर प्रदेश भारत का करीब एक-तिहाई आलू उगाता है (पूरी कहानी यहाँ)। यहाँ अक्टूबर पूरे सीज़न का फ़ैसला करता है: बीज खेत में जाता है, और खाद, सिंचाई और फसल की देखभाल का हर फ़ैसला उसी के बाद होता है। इसीलिए स्ट्रिंग बायो और फॉर्च्यून राइस ने किसानों को इसी समय एक जगह बुलाया।
फॉर्च्यून राइस गाँव दरगवा, गभाना में अपना जेवर मॉडल फार्म इसलिए चलाता है कि उसकी एग्रोनॉमी टीम और उसके साथ काम करने वाले किसान वहाँ आज़माएँ और सीखें। सत्र में ये बातें हुईं:
- बीज से खुदाई तक आलू की खेती के अच्छे तरीक़े
- एक जैसे, अच्छी तरह तैयार कंद कैसे मिलें जिनका दाम बेहतर मिले
- फसल की ऐसी देखभाल जो अगले सीज़न के लिए मिट्टी को ठीक रखे
- छह राज्यों के 12 फार्म पर पिछली रबी के BioLyft ट्रायल के नतीजे
- किसानों के अपने खेतों से जुड़े सवाल
कमरे में तीन दर्जन से ज़्यादा लोग थे: हरी शर्ट में फॉर्च्यून राइस की फ़ील्ड टीम, आसपास के गाँवों के किसान और स्ट्रिंग बायो की टीम।
डॉ. गुरुराज कुलकर्णी: नतीजे खेत में नापने वाले शोधकर्ता

डॉ. गुरुराज गुड्डप्पा कुलकर्णी
जनरल मैनेजर और हेड ऑफ क्रॉप एक्सीलेंस, स्ट्रिंग बायो प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु · पीएचडी · चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के पूर्व छात्र
कृषि शोध में 23+ सालक्रॉप एक्सीलेंसउत्पाद जाँचजलवायु सहनशीलतानियामक मामलेब्रीडिंग
उनके अपने विवरण के अनुसार डॉ. कुलकर्णी ने 23 साल से ज़्यादा कृषि शोध में बिताए हैं, एक अंतरराष्ट्रीय सरकारी शोध केंद्र और बड़ी फसल-विज्ञान कंपनियों में। स्ट्रिंग बायो में वे क्रॉप एक्सीलेंस संभालते हैं: कोई उत्पाद कैसे और कहाँ जाँचा जाए, और किस सबूत पर वह किसानों तक पहुँचे।
“खेती में नवाचार तभी असली फ़ायदा देता है जब विज्ञान किसानों के खेतों में नापे जा सकने वाले नतीजों में बदले।”
डॉ. गुरुराज कुलकर्णी, जेवर प्रशिक्षण दिवस के बाद

कमरे के लिए उनका संदेश सीधा था: कोई भी उत्पाद आलू के खेत में तभी जगह पाता है जब वह किसानों के अपने खेतों में, उनके आम तरीक़े के सामने आज़माया जाए, और खुदाई पर ऐसा फ़र्क़ दिखाए जो किसान अपनी आँखों से देख सकें।
पिछले सीज़न का सबूत: 12 फार्म, हर फार्म पर दो एकड़
स्ट्रिंग बायो के अनुसार BioLyft आलू के लिए उसका पत्तियों पर छिड़कने वाला, पेप्टाइड पर आधारित बायोस्टिमुलेंट है, जो पौधे को तब सहारा देता है जब उसे सबसे ज़्यादा ताक़त चाहिए: जब पत्तियाँ बन रही हों और जब कंद बनकर भर रहे हों। रबी 2025-26 में इसे रिसर्च प्लॉट पर नहीं, चलते हुए आलू फार्म पर आज़माया गया। हर किसान ने दो प्लॉट साथ-साथ रखे: एक एकड़ पर BioLyft के तीन स्प्रे, और एक एकड़ उसके आम तरीक़े से। बीज, खाद, सिंचाई और दवा दोनों पर एक जैसे थे।
ट्रायल का तरीक़ा: वही खेत, वही बीज, वही इनपुट। फ़र्क़ सिर्फ़ BioLyft का।
चौदह किसानों ने नाम लिखाया और बारह ने ट्रायल पूरा किया। उनके फार्म छह आलू राज्यों में थे:
क़िस्मों में भारत में उगने वाले तीनों तरह के आलू थे: चिप्स और फ्राइज़ के प्रोसेसिंग आलू (सैंटाना, लेडी रोसेटा, कुफरी फ्राईसोना, चिप्सोना-1, चिप्सोना-3, टॉरस), खाने वाले आलू (कुफरी बहार, कुफरी ज्योति, कुफरी पुखराज, कुफरी सूर्या, कोलंबा, डायमंट) और बीज की फसल। अलीगढ़ में भी एक प्लॉट था: ज़िले में चिप्सोना-3 की प्रोसेसिंग फसल।
खुदाई पर किसानों ने अपने आम एकड़ के मुक़ाबले BioLyft वाले एकड़ में यह देखा:
ये किसानों के अपने खेतों की तुलना है, जो उन्होंने ख़ुद दर्ज की: हर फार्म पर एक स्प्रे वाला एकड़ और एक बिना स्प्रे वाला एकड़। ये दोहराए गए रिसर्च ट्रायल नहीं हैं, और नतीजे मिट्टी, क़िस्म, मौसम और देखभाल के साथ बदलेंगे। इसीलिए स्ट्रिंग बायो अब बड़े पैमाने पर डेमो की ओर बढ़ रहा है।
इस रबी आलू लगा रहे हैं, जैविक या आम खेती से? अपनी फसल के लिए सही इनपुट और BioLyft के बारे में पूछिए।
फ़ील्ड डे: किसानों ने ढेर ख़ुद देखे
ट्रायल वाले दो फार्म ने खुदाई के समय अपने दरवाज़े खोले ताकि दूसरे किसान दोनों प्लॉट ख़ुद देख सकें।
10 मार्च 2026 · कुरुक्षेत्र, हरियाणा
नूर एग्री फार्म, लाडवाकरीब 25 किसानों ने एक बीज फार्म का BioLyft ट्रायल देखा, जिसमें दस क़िस्में साथ-साथ खोदी गईं। उन्होंने एक जैसे कंद, साफ़ छिलका और कंदों के न फटने पर ध्यान दिलाया।16 मार्च 2026 · करहल, मैनपुरी, यूपी
सैंटाना की प्रोसेसिंग फसलऐसी ज़मीन पर उगी जिसे सिर्फ़ तीन साल पहले खेती में लाया गया था। किसान ने बताया कि स्प्रे वाली फसल देर तक हरी रही, और स्ट्रिंग बायो से अगली बार अपने धान के लिए उत्पाद माँगा।अभी बुआई करने वाले किसानों के लिए: BioLyft के तीन स्प्रे कब
इस महीने बीज बोने वाले अलीगढ़ के किसानों के लिए स्ट्रिंग बायो का आलू शेड्यूल हर स्प्रे को फसल की अवस्था से जोड़ता है। बुआई के बाद के दिन एक अंदाज़ा हैं; असल में फसल की अवस्था देखिए।
- 1बढ़वार की अवस्थाफसल निकल आई हो और पत्तियाँ बना रही होबुआई के ~20–25 दिन बाद
- 2कंद बनने की शुरुआतजब स्टोलन फूलकर कंद बनने लगेंपहले स्प्रे के 25–30 दिन बाद
- 3कंद भरने का समयजब कंद भर रहे हों और बढ़ रहे होंदूसरे स्प्रे के 25–30 दिन बाद
स्ट्रिंग बायो सलाह देता है कि सुबह जल्दी या दोपहर बाद छिड़कें ताकि पत्तियाँ इसे अच्छी तरह लें, और कहता है कि BioLyft को खाद, सूक्ष्म पोषक तत्वों या दवा के स्प्रे के साथ एक ही टंकी में मिलाया जा सकता है। अगर आपका स्प्रे प्लान पहले से भरा है, तो कुछ नया मिलाने से पहले पूछ लें: जो मिश्रण एक खेत पर ठीक चलता है, वह दूसरे पर भी अपने आप ठीक हो, ज़रूरी नहीं।
वीडियो देखें: BioLyft स्प्रे कैसे करें
घोल बनाने से लेकर तीनों स्प्रे तक, पूरा तरीक़ा डेढ़ मिनट के हिंदी वीडियो में।
आगे क्या: अच्छे ट्रायल से ऐसे डेमो तक जिन्हें किसान देख सकें
डॉ. कुलकर्णी ने स्ट्रिंग बायो का अगला क़दम साफ़ बताया: पिछले सीज़न के अच्छे नतीजों को बड़े पैमाने पर चलने वाले समाधान में बदलना, फॉर्च्यून राइस जैसे साझेदारों के साथ डेमो, व्यावसायिक ट्रायल और किसानों के साथ नज़दीकी काम से। जेवर जैसे साझेदार फार्म इसलिए अहम हैं कि वहाँ किसान दुकान में रखा पैकेट नहीं, पूरे सीज़न की फसल देख सकते हैं।
पिछले सीज़न के किसानों की दिलचस्पी आलू से आगे भी गई: ट्रायल किसानों ने धान, मक्का, मूँगफली, सब्ज़ियों और ख़रबूज़े के बारे में पूछा। फ़िलहाल अलीगढ़ का ध्यान इस रबी की आलू फसल पर है। सीज़न की योजना के लिए पढ़िए 1 एकड़ में कितना आलू निकलता है और आलू के लिए सबसे अच्छी खाद। आलू उत्पादन की और ख़बरें हमारे उत्पादन सेक्शन में हैं।
“आइए, संभावना से आगे बढ़कर प्रदर्शन तक, और नवाचार से असर तक चलें।”
डॉ. गुरुराज कुलकर्णी, स्ट्रिंग बायो
एक नज़र में: स्ट्रिंग बायो आलू प्रशिक्षण दिवस, अलीगढ़
- कार्यक्रम
- एग्रोनॉमिस्ट और प्रगतिशील किसानों के लिए आलू प्रशिक्षण सत्र
- मेज़बान फार्म
- जेवर मॉडल फार्म, फॉर्च्यून राइस लिमिटेड
- जगह
- गाँव दरगवा, गभाना, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
- कब
- अक्टूबर 2026, रबी बुआई की शुरुआत में
- सत्र लिया
- डॉ. गुरुराज कुलकर्णी, जनरल मैनेजर और हेड ऑफ क्रॉप एक्सीलेंस, स्ट्रिंग बायो
- उत्पाद
- BioLyft, आलू के लिए स्ट्रिंग बायो का पत्तियों पर छिड़कने वाला बायोस्टिमुलेंट
- बताया गया सबूत
- रबी 2025-26 के खेत ट्रायल: 12 फार्म, छह राज्य, स्प्रे वाला एकड़ बनाम बिना स्प्रे वाला एकड़
स्प्रे से पहले पूछिए
जैविक आलू खेती के सही इनपुट और स्ट्रिंग बायो के BioLyft के बारे में पूछिए। अपना ज़िला, क़िस्म और एकड़ बताइए। हम बताएँगे कि आपकी फसल के लिए क्या ठीक है, कब छिड़कना है और कहाँ मिलेगा।
तरीक़ा: कार्यक्रम का ब्योरा (जगह, गाँव, महीना और सत्र के विषय) डॉ. गुरुराज कुलकर्णी के जेवर प्रशिक्षण दिवस पर अपने प्रकाशित विवरण और स्ट्रिंग बायो की तस्वीरों से लिया गया है। ट्रायल के नतीजे, ट्रायल का तरीक़ा, फ़ील्ड डे और स्प्रे शेड्यूल स्ट्रिंग बायो के BioLyft आलू ट्रायल प्रोटोकॉल और रबी 2025-26 की ट्रायल रिपोर्ट से हैं। पैदावार में बढ़त किसानों के बताए अनुसार है। डॉ. कुलकर्णी का परिचय उनकी अपनी प्रकाशित प्रोफ़ाइल से है।
संपादकीय जानकारी: यह इंडस्ट्री स्पॉटलाइट स्ट्रिंग बायो प्राइवेट लिमिटेड (String Bio Private Limited) के साथ साझेदारी में प्रकाशित की गई है। यहाँ बताए गए रबी 2025-26 के BioLyft ट्रायल स्ट्रिंग बायो के लिए इंडियन पोटैटो की प्रकाशक कंपनी इंडपोटैटो प्राइवेट लिमिटेड (Indpotato Private Limited) ने चलाए थे, और इंडपोटैटो स्ट्रिंग बायो के साथ सेल्स पार्टनर के रूप में काम करती है। लेख का संपादकीय ढाँचा और जाँच इंडियन पोटैटो की संपादकीय टीम की ज़िम्मेदारी है।
फ़ोटो: स्ट्रिंग बायो। अंग्रेज़ी में पढ़ें: indianpotato.com पर यही रिपोर्ट।
▶ बुवाई का मौसम · String Bio के साथ वीडियोआलू में तीन स्प्रे: कब, कितना और कैसेएक एकड़ में 88 ग्राम, 200 लीटर पानी। डेढ़ मिनट का वीडियो, साथ में अपनी अतिरिक्त पैदावार का हिसाब।वीडियो देखें →

