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उत्पादन · उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश उगाता है भारत का एक-तिहाई आलू। फिर उसे रोकता क्या है?

2024-25 में भारत के आलू का 35% अकेले उत्तर प्रदेश से आया, 203.8 लाख टन। पैदावार भी सबसे ऊँची, 29.2 टन प्रति हेक्टेयर। रुकावट खेत में नहीं, फसल के बाद है।

इंडियन पोटैटो डेस्क · 02 अक्टूबर 2026 · 6 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
उत्तर प्रदेश आलू उत्पादन — यूपी का नक्शा और आलू की बोरी, 2024-25 में भारत के आलू का 35%
35%भारत का आलू, 2024-25

2024-25 में उत्तर प्रदेश ने 203.8 लाख टन आलू उगाया, जबकि पूरे भारत में 581.1 लाख टन हुआ। यानी देश का एक-तिहाई से ज़्यादा आलू अकेले यूपी से, 6.98 लाख हेक्टेयर में, 29.2 टन प्रति हेक्टेयर की पैदावार के साथ, जो बड़े आलू राज्यों में सबसे ऊँची है। यूपी की रुकावट खेत में नहीं है। वह खेत और ख़रीदार के बीच है।

भारत के हर 100 आलू में से 35 यूपी के

हर बिंदु भारत की 2024-25 की आलू फसल का 1% है।

फसल बढ़ भी रही है। 2023-24 में यूपी ने 191.7 लाख टन आलू उगाया था, भारत के 570.5 लाख टन का 34%। एक साल बाद लगभग उतनी ही ज़मीन पर, 6.96 की जगह 6.98 लाख हेक्टेयर में, उत्पादन 6.3% बढ़ गया।

2024-25, तीसरे अग्रिम अनुमान। पैदावार टन प्रति हेक्टेयर में। पूरे भारत की औसत पैदावार: 24.6 टन प्रति हेक्टेयर।

203.8 लाख टनअकेले उत्तर प्रदेश
191.2 लाख टनबिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश और पंजाब मिलाकर
29.2 टन/हे.यूपी की पैदावार, बड़े राज्यों में सबसे ऊँची, गुजरात (29.0) से आगे

इसका बड़ा हिस्सा पश्चिमी यूपी की एक सघन पट्टी से आता है: आगरा, फ़िरोज़ाबाद, हाथरस, कन्नौज और फ़र्रुख़ाबाद। यह कितना एक जगह सिमटा है, देखिए हमारी उत्तर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों की आलू तालिका में।

पाँच दरवाज़े: यूपी के खेत और बेहतर दाम के बीच

यूपी का किसान पहले से ही प्रति हेक्टेयर देश में लगभग सबसे ज़्यादा आलू उगाता है। कमाई बीज से बिक्री तक के रास्ते में पाँच जगह छूटती है, या कभी बनती ही नहीं।

  1. बुआई से पहले

    बीज: पूरे देश में अच्छे बीज की कमी

    आलू कंद से बोया जाता है, और भारत को हर साल करीब 54 लाख टन बीज चाहिए। प्रमाणित बीज की सरकारी व्यवस्था इसका सिर्फ़ दसवाँ हिस्सा पूरा करती है। यूपी में भी, बाक़ी देश की तरह, ज़्यादातर किसान निजी उत्पादकों से या अपना रखा हुआ बीज बोते हैं, जिसकी गुणवत्ता की जाँच कम होती है।

    ~10%देश की बीज ज़रूरत प्रमाणित बीज से पूरी होती है

    ICAR-CPRI का क्षेत्रीय केंद्र मेरठ के मोदीपुरम में है, और साफ़ बीज ज़्यादा बनाने के लिए टिशू कल्चर और एरोपोनिक तरीक़े अपनाए जा रहे हैं। पढ़िए भारत बीज आलू बाहर क्यों नहीं बेच पाता।

  2. खुदाई के बाद

    कोल्ड स्टोरेज: देश की फसल का बड़ा हिस्सा यूपी में रखा जाता है

    यूपी का आलू फ़रवरी-मार्च में खुदता है, और उसका बड़ा हिस्सा कोल्ड स्टोर में रखकर साल भर बेचा जाता है। कोल्ड स्टोरेज क्षमता किसी भी राज्य से ज़्यादा यहीं है: 31 मई 2024 तक भारत की 396.0 लाख टन क्षमता में से 150.9 लाख टन। इसलिए भंडारण का किराया और माल निकालने का समय किसान की कमाई का बड़ा हिस्सा तय करते हैं।

    38.1%भारत की कोल्ड स्टोरेज क्षमता यूपी में

    पैसा कहाँ जाता है, देखिए कोल्ड स्टोरेज से किसान का हिस्सा कितना बढ़ता है और रिकॉर्ड फसल के बाद यूपी के कोल्ड स्टोरेज पर दबाव।

  3. मंडी में

    दाम: बड़ी फसल, कम दाम

    जब यूपी में फसल बहुत अच्छी होती है, तो दाम लागत से भी नीचे जा सकते हैं। 2025-26 के लिए केंद्र ने बाज़ार हस्तक्षेप योजना के तहत यूपी की आलू ख़रीद योजना मंज़ूर की: 20 लाख टन तक, ₹6,500.9 प्रति टन पर, ताकि किसान को मजबूरी में सस्ता न बेचना पड़े। केंद्र का हिस्सा ₹203.15 करोड़ है।

    ₹650प्रति क्विंटल: 2025-26 में यूपी के आलू का हस्तक्षेप दाम

    यूपी की बड़ी मंडियों के रोज़ के भाव देखिए आलू भाव पर।

  4. फ़ैक्टरी में

    प्रोसेसिंग: यूपी खाने वाला आलू उगाता है

    भारत का सिर्फ़ करीब 7.5% आलू चिप्स, फ्राइज़, फ्लेक्स और दूसरे उत्पादों में प्रोसेस होता है। यूपी की अपनी निर्यात योजना कहती है कि आगरा, मथुरा, मैनपुरी और फ़िरोज़ाबाद के आलू में शुगर ज़्यादा होती है, जो रसोई के लिए ठीक है पर फ्रायर या लंबे भंडारण के लिए नहीं। 2018-19 में यूपी के दो ज़िलों के एक सर्वे में करीब आधे रकबे में कुफरी बहार था, और टॉप चार क़िस्मों में कोई प्रोसेसिंग क़िस्म नहीं थी।

    ~7.5%भारत का आलू प्रोसेस होता है

    फ़ैक्टरियाँ ख़ास प्रोसेसिंग क़िस्में ख़रीदती हैं, जो ज़्यादातर कॉन्ट्रैक्ट पर उगाई जाती हैं। देखिए भारत की कुफरी क़िस्मों की पूरी गाइड।

  5. बंदरगाह पर

    निर्यात: एक ही बड़ा ख़रीदार

    आगरा और अलीगढ़ इलाक़े का आलू निर्यात लगभग पूरा नेपाल जाता रहा है। 2021-22 में यह करीब 1.38 लाख टन था, जिसकी क़ीमत ₹125.95 करोड़ थी। एक पड़ोसी देश को ताज़ा टेबल आलू बेचने का मतलब है कि प्रति किलो दाम उन बाज़ारों से कम मिलता है जो प्रोसेसिंग ग्रेड का पैसा देते हैं।

    1.38 लाख टनआगरा-अलीगढ़ इलाक़े से नेपाल, 2021-22

    राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति में आगरा आलू का अधिसूचित क्लस्टर है। और पढ़िए नेपाल अब भी भारत का सबसे बड़ा आलू ख़रीदार।

यूपी आगे कहाँ जा रहा है

  • आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र। केंद्रीय कैबिनेट ने जून 2025 में आगरा के सिंगना में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र को मंज़ूरी दी, जो पैदावार, फसल के बाद की संभाल और मूल्य संवर्धन पर काम करेगा।
  • दाम गिरने पर सहारा। 2025-26 में 20 लाख टन तक की बाज़ार हस्तक्षेप ख़रीद से भरपूर फसल वाले साल में किसान को एक न्यूनतम दाम मिलता है।
  • निर्यात क्लस्टर। आगरा अधिसूचित आलू क्लस्टर है, और राज्य की निर्यात योजना कन्नौज, फ़र्रुख़ाबाद, इटावा, मैनपुरी और अलीगढ़ को आलू ज़िलों में गिनती है।
  • मूल्य जोड़ने की गुंजाइश। देश की 35% फसल और सबसे अच्छी पैदावार के साथ, यूपी में प्रोसेसिंग या निर्यात का हर अतिरिक्त अंक पूरे देश के आँकड़े बदल देता है।

सीधी बात यह है कि यूपी ने सबसे मुश्किल काम, अच्छी फसल उगाना, पहले ही कर लिया है। अगला फ़ायदा बेहतर बीज, समझदारी से भंडारण, स्थिर दाम, और फसल का ज़्यादा हिस्सा प्रोसेसिंग और नए निर्यात बाज़ारों में भेजने से आएगा। आलू उत्पादन की और ख़बरें हमारे उत्पादन सेक्शन में हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उत्तर प्रदेश में कितना आलू पैदा होता है?
2024-25 (तीसरे अग्रिम अनुमान) में उत्तर प्रदेश ने 6.98 लाख हेक्टेयर में 203.8 लाख टन आलू उगाया। 2023-24 में यह 191.7 लाख टन था।
भारत के आलू में उत्तर प्रदेश का हिस्सा कितना है?
2024-25 में 35%: इन्हीं अनुमानों में भारत के कुल 581.1 लाख टन में से 203.8 लाख टन यूपी का था। 2023-24 में यह हिस्सा 34% था।
भारत में आलू की सबसे ज़्यादा पैदावार किस राज्य में है?
बड़े आलू राज्यों में 2024-25 में सबसे ऊँची पैदावार उत्तर प्रदेश की रही, 29.2 टन प्रति हेक्टेयर। गुजरात 29.0 टन के साथ ठीक पीछे रहा। पूरे भारत का औसत 24.6 टन प्रति हेक्टेयर था।
उत्तर प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज की क्षमता कितनी है?
31 मई 2024 तक करीब 150.9 लाख टन, जो भारत की कुल 396.0 लाख टन क्षमता का 38.1% है।
यूपी का आलू प्रोसेसिंग में कम क्यों जाता है?
यूपी के ज़्यादातर रकबे में कुफरी बहार जैसी खाने वाली (टेबल) क़िस्में बोई जाती हैं। राज्य की अपनी निर्यात योजना के अनुसार आगरा बेल्ट के आलू में शुगर ज़्यादा होती है, जो तलने और लंबे भंडारण के लिए ठीक नहीं। पूरे देश में भी सिर्फ़ करीब 7.5% आलू प्रोसेस होता है।
यूपी के आलू के लिए बाज़ार हस्तक्षेप योजना क्या है?
2025-26 के लिए केंद्र ने उत्तर प्रदेश का प्रस्ताव मंज़ूर किया: बाज़ार हस्तक्षेप योजना के तहत 20 लाख टन तक आलू ₹6,500.9 प्रति टन (करीब ₹650 प्रति क्विंटल) पर ख़रीदा जा सकता है, ताकि किसान को मजबूरी में सस्ता न बेचना पड़े। केंद्र का हिस्सा ₹203.15 करोड़ है।
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भारत की आलू मूल्य शृंखला पर प्राथमिक-स्रोत आधारित रिपोर्टिंग — उत्पादन, भाव, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार। यहाँ हर आँकड़ा किसी सरकारी, संस्थागत या सहकर्मी-समीक्षित स्रोत से जुड़ा होता है।

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