उत्तराखंड से इराक को पहला फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ निर्यात — APEDA की पहल
APEDA ने उत्तराखंड के काशीपुर से इराक को 24 टन फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ की पहली खेप भेजी — राज्य का पहला ऐसा निर्यात, जबकि भारत का आलू-उत्पाद निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में $289.40 मिलियन तक पहुँचा।

काशीपुर, उधम सिंह नगर से इराक तक — 24 टन फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ की एक खेप ने उत्तराखंड के लिए एक नया निर्यात रास्ता खोला है। 20 जुलाई 2026 को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने बताया कि उसने यह खेप सुगम बनाई — राज्य से इस तरह का पहला निर्यात, जो पहाड़ी और भूमि-बद्ध राज्यों से मूल्य-वर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में एक क़दम है।
क्या हुआ
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करने वाले APEDA ने काशीपुर (उधम सिंह नगर ज़िला, उत्तराखंड) से इराक को 24 टन फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ के निर्यात में मदद की। यह खेप Virun Global Trade Pvt. Ltd. ने भेजी, और APEDA इसे राज्य से पहला ऐसा निर्यात बताता है।
निर्यातक ने APEDA को बताया कि उत्पाद की गुणवत्ता से आगे दोबारा ऑर्डर और लंबी अवधि के व्यापारिक रिश्ते बनने की उम्मीद है। इसके अलावा, APEDA ने निर्यातक की SIAL, Gulfood, IndusFood और World Food India जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी में सहायता की है, ताकि बाज़ार तक पहुँच और ख़रीदारों से जुड़ाव बेहतर हो सके।
पहाड़ी राज्य के लिए यह क्यों मायने रखता है
उत्तराखंड की भौगोलिक बनावट — पहाड़ी, भूमि-बद्ध, और भारत के ज़्यादातर कृषि-निर्यात संभालने वाले बंदरगाहों से दूर — राज्य को अब तक प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में हाशिये पर रखती आई है। 24 टन की यह खेप मात्रा में भले छोटी हो, पर यह संकेत देती है कि काशीपुर का एक प्रोसेसर अब APEDA निर्यात बाज़ारों की गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स और दस्तावेज़ी शर्तें पूरी कर सकता है।
APEDA अध्यक्ष श्री अभिषेक देव ने इस चुनौती को सीधे संबोधित किया:
लॉजिस्टिक्स लागत उत्तराखंड जैसे भूमि-बद्ध राज्यों से निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करती रहती है। — अभिषेक देव, अध्यक्ष, APEDA
उन्होंने बताया कि APEDA उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर एक स्टेट एग्री एक्सपोर्ट पॉलिसी तैयार करने और लागू करने पर काम कर रहा है, जिसमें ट्रांसपोर्ट सहायता के प्रावधान शामिल हैं ताकि निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता और बाज़ार तक पहुँच बेहतर हो सके। यह नीति सिर्फ़ इस एक खेप तक सीमित नहीं — यह उत्तराखंड के हर प्रोसेसर पर लागू होगी जो निर्यात बाज़ार तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है।
भारत के प्रसंस्कृत आलू निर्यात के आँकड़े, FY2025-26
APEDA के बयान में इस खेप को भारत के व्यापक प्रसंस्कृत सब्ज़ी निर्यात के संदर्भ में रखा गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का प्रसंस्कृत सब्ज़ी निर्यात $932.25 मिलियन रहा, जो 7,26,874.70 टन के बराबर है। इसमें से मूल्य-वर्धित आलू उत्पादों का हिस्सा 2,77,108.51 टन, मूल्य $289.40 मिलियन रहा।
| श्रेणी | मात्रा (FY2025-26) | मूल्य (FY2025-26) |
|---|---|---|
| प्रसंस्कृत सब्ज़ियाँ (कुल) | 7,26,874.70 टन | $932.25 मिलियन |
| मूल्य-वर्धित आलू उत्पाद | 2,77,108.51 टन | $289.40 मिलियन |
प्रसंस्कृत फल व सब्ज़ियाँ मिलाकर वित्त वर्ष 2025-26 में APEDA के कुल निर्धारित निर्यात का लगभग 10 प्रतिशत रहीं — यही वह श्रेणी है जिसमें उत्तराखंड की यह खेप आती है, भले ही 24 टन राष्ट्रीय आँकड़े के सामने बहुत छोटा हिस्सा हो।
आगे की राह
APEDA इस खेप को एक बड़े लक्ष्य की दिशा में एक क़दम मानता है — उत्तराखंड में बढ़ता प्रसंस्कृत खाद्य उद्योग, जो गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की मांग पैदा करे, खेत के नज़दीक ही मूल्य-वर्धन को बढ़ावा दे, और अधिक किसानों को निर्यात-उन्मुख आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़े। लक्ष्य है बेहतर बाज़ार पहुँच के ज़रिए किसानों की आमदनी बढ़ाना, साथ ही राज्य के प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात आधार का विस्तार करना।
APEDA का कहना है कि वह राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और प्रोसेसरों के साथ मिलकर निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत करने और भारत से मूल्य-वर्धित कृषि निर्यात के लिए बाज़ार पहुँच आसान बनाने पर लगातार काम कर रहा है — जिसकी शुरुआती कड़ी उत्तराखंड के लिए यह काशीपुर-से-इराक खेप है।
भारत के व्यापक आलू निर्यात परिदृश्य के लिए नेपाल को होने वाला भारत का आलू निर्यात और ताज़े आलू निर्यात में गिरावट भी देखें। ज़्यादा व्यापार व मंडी कवरेज के लिए मंडी एवं व्यापार श्रेणी देखें।


