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असम में किसान उत्पादक कंपनियाँ दोगुनी होंगी, आलू की खेती भी बढ़ेगी: किसानों के लिए इसका मतलब

असम सरकार किसान उत्पादक कंपनियाँ (FPC) दोगुनी करना चाहती है और आलू की खेती बढ़ाने पर बात कर रही है। असम में आलू की पैदावार 7.6 टन प्रति हेक्टेयर है, देश में 24.6 टन।

इंडियन पोटैटो डेस्क · 04 नवंबर 2026 · 3 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
खेत में सिर पर आलू की टोकरियाँ उठाए किसान, ऊपर लेख का शीर्षक: असम में किसान कंपनियाँ दोगुनी करने की तैयारी

असम सरकार ने क्या कहा?

असम के कृषि मंत्री पीयूष हज़ारिका ने 2 नवंबर 2026 को गुवाहाटी के खानापाड़ा में कृषि भवन में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक ली। इसमें उन्होंने अफ़सरों से कहा कि राज्य में किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) की संख्या दोगुनी करने के लिए काम करें। साथ ही स्कीमें समय पर लागू करने, ज़िम्मेदारी तय करने और गाँव स्तर पर किसानों से सीधे जुड़ने पर ज़ोर दिया।

मंत्री ने किसानों से सिर्फ़ धान पर टिके न रहकर ज़्यादा कमाई वाली फ़सलों की तरफ़ जाने को कहा, जैसे मखाना, अगरवुड, ऑयल पाम, नारियल, ड्रैगन फ्रूट और दूसरे फल-सब्ज़ियाँ। बैठक में राज्य के चार मिशन की समीक्षा हुई:

आलू पर अलग बैठक हुई। मंत्री एक ऐसी कंपनी से मिले जिसका प्लांट नलबाड़ी ज़िले में है। यह कंपनी पहले से असम के करीब 1,200 आलू किसानों से आलू ले रही है और उसे बड़ी मात्रा में लगातार आलू चाहिए। बात इस पर हुई कि राज्य में आलू की खेती कैसे बढ़े।

असम में आलू की खेती कितनी है?

असम में आलू रबी की फ़सल है, जो धान कटने के बाद लगती है। ताज़ा सरकारी आँकड़े (2024-25, तीसरा अग्रिम अनुमान):

2023-242024-25
रकबा1.06 लाख हेक्टेयर1.05 लाख हेक्टेयर
पैदावार (कुल)9.11 लाख टन7.98 लाख टन
प्रति हेक्टेयर8.6 टन7.6 टन

रकबा लगभग उतना ही रहा, लेकिन प्रति हेक्टेयर पैदावार कम होने से कुल आलू घट गया।

असली मौक़ा पैदावार में है। असम का किसान एक हेक्टेयर से करीब 7.6 टन आलू निकालता है, जबकि देश का औसत 24.6 टन है। यानी असम देश के औसत के एक-तिहाई से भी कम निकाल रहा है। अगर यह फ़ासला थोड़ा भी कम हो, तो उसी ज़मीन से लाखों टन ज़्यादा आलू निकल सकता है। इसके लिए सही किस्म का सर्टिफ़ाइड बीज, धान के बाद समय पर बुवाई, संतुलित खाद और पक्का ख़रीदार चाहिए, और यही काम एक अच्छी किसान कंपनी अपने सदस्यों के लिए कर सकती है।

आलू किसान के लिए किसान कंपनी क्यों ज़रूरी है?

किसान उत्पादक कंपनी किसानों की अपनी कंपनी होती है, जो कंपनी क़ानून के तहत रजिस्टर होती है और सदस्यों के लिए खाद-बीज ख़रीदती है और उनकी फ़सल बेचती है। आलू में बीज सबसे बड़ा ख़र्च है और खुदाई के समय भाव बहुत गिरते हैं, इसलिए मिलकर काम करने से चार फ़ायदे होते हैं:

केंद्र की 10,000 FPO स्कीम में नई किसान कंपनी को तीन साल में मैनेजमेंट ख़र्च के लिए ₹18 लाख तक, हर किसान सदस्य पर ₹2,000 तक की बराबर इक्विटी ग्रांट (एक कंपनी को ₹15 लाख तक) और बैंक लोन पर ₹2 करोड़ तक की गारंटी मिल सकती है।

असम के आलू किसान अभी क्या करें?

  1. किसान कंपनी से जुड़ें या बनाएँ। अपने ज़िले के कृषि दफ़्तर या ATMA स्टाफ़ से पूछें कि आपके ब्लॉक में कौन-सी FPC काम कर रही है, या पड़ोसियों के साथ नई कैसे रजिस्टर करें।
  2. बीज पहले से तय करें। धान कटने के बाद बुवाई के समय से पहले ही उस किस्म का सर्टिफ़ाइड बीज बुक करें जो ख़रीदार चाहता है।
  3. बुवाई से पहले ख़रीदार से बात करें। नलबाड़ी में प्रोसेसर पहले से आलू ले रहा है, तो समूह पहले ही किस्म, साइज़ और मात्रा तय कर सकता है।
  4. हिसाब रखें। हर सदस्य का रकबा, बीज और पैदावार लिखकर रखें, इससे कंपनी को लोन, स्कीम और बेहतर सौदे मिलने में आसानी होती है।

स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

असम के कृषि मंत्री ने किसान कंपनियों के बारे में क्या कहा?
2 नवंबर 2026 को गुवाहाटी के खानापाड़ा में कृषि भवन की बैठक में कृषि मंत्री पीयूष हज़ारिका ने अफ़सरों से राज्य में किसान उत्पादक कंपनियाँ दोगुनी करने के लिए काम करने को कहा।
असम में कितना आलू पैदा होता है?
2024-25 के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक़ असम में करीब 1.05 लाख हेक्टेयर में करीब 7.98 लाख टन आलू पैदा हुआ। 2023-24 में 1.06 लाख हेक्टेयर में 9.11 लाख टन हुआ था।
असम में आलू की पैदावार कितनी है?
2024-25 में असम में आलू की पैदावार करीब 7.6 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि देश का औसत 24.6 टन प्रति हेक्टेयर है।
असम में आलू की खेती बढ़ाने के लिए कौन-सी कंपनी बात कर रही है?
मंत्री ने एक ऐसी कंपनी से मुलाक़ात की जिसका प्लांट नलबाड़ी ज़िले में है, जो असम के करीब 1,200 आलू किसानों से जुड़ी है और जिसे बड़ी मात्रा में आलू चाहिए। बैठक में राज्य में आलू की खेती बढ़ाने पर बात हुई।
किसान कंपनी से आलू किसान को क्या फ़ायदा होता है?
किसान कंपनी से सर्टिफ़ाइड बीज थोक में सस्ता मिलता है, प्रोसेसर को एक साथ माल बेचा जा सकता है, ग्रेडिंग और कोल्ड स्टोरेज साझा होता है और कंपनी के नाम पर लोन मिलता है। 10,000 FPO स्कीम में नई कंपनी को तीन साल में मैनेजमेंट के लिए ₹18 लाख तक, ₹15 लाख तक इक्विटी ग्रांट और ₹2 करोड़ तक के लोन पर गारंटी मिल सकती है।
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