एस्टेरिक्स आलू — पैदावार, बीज दर और भंडारण की पूरी जानकारी
एस्टेरिक्स लाल छिलके वाला आलू है। पैदावार औसत से ऊपर, ड्राई मैटर 23.3% — चिप्स और फ्राई कंपनियों की पसंद। बीज दर, खाद, दवा और भंडारण की पूरी जानकारी।

अगर आप कंपनी को देने लायक़ आलू उगाना चाहते हैं, तो एस्टेरिक्स देखने लायक़ किस्म है। छिलका लाल, आलू लंबा और बड़ा, और पकाने पर गूदा हल्का पीला। भारत में इसका बीज महिंद्रा HZPC देती है और अपनी सूची में इसे प्रोसेसिंग में रखती है — यानी चिप्स और फ्राई बनाने वालों के लिए।
यह किस्म HZPC कंपनी ने कार्डिनल और VE70-9 को मिलाकर बनाई है।
पैदावार कितनी और कब तैयार होगा
पैदावार औसत से ऊपर है — रेटिंग 109। एक पौधे पर 12 से 14 आलू लगते हैं और साइज़ बड़ा रहता है, रेटिंग 80। गिनती में आलू कम बनते हैं, पर हर आलू भारी होता है, इसलिए तौल अच्छी बैठती है।
किस्म देर से पकती है। ज़मीन से निकलती जल्दी है, रेटिंग 77, और बीज पहले से अंकुरा लें तो फ़सल और आगे बढ़ जाती है। मिट्टी कोई भी चलेगी। भारी ज़मीन हो तो जुताई अच्छी कर लीजिए।
| क्या | रेटिंग |
|---|---|
| पैदावार | 109 — औसत से ऊपर |
| आलू का साइज़ | 80 — बड़ा |
| एक पौधे पर आलू | 12–14 |
| पकने में समय | 54 — देर से |
| आलू की शक्ल | लंबा-अंडाकार |
| छिलके का रंग | लाल |
| पकाने पर गूदा | हल्का पीला |
| पकने पर | हल्का भुरभुरा |
| ज़मीन से निकलना | 77 — जल्दी |
| पत्ती-तने की बढ़त | 80 — बहुत घनी |
| ड्राई मैटर / स्टार्च | 23.3% / 17.3% |
| स्पेसिफ़िक ग्रैविटी | 1.094 |
| बिना अंकुर कितने दिन | 49 — कम दिन |
| मेट्रीब्यूज़िन दवा का असर | 63 — जल्दी असर करती है |
| अंदरूनी चोट | 13 — जल्दी लगती है |
हर लाइन में एक नंबर है और साथ में एक शब्द। नंबर HZPC का अपना है और शब्द बताता है कि खेत में उसका क्या मतलब निकलेगा। स्रोत: HZPC की एस्टेरिक्स किस्म शीट।
बीज कितना लगेगा
| बीज का साइज़ (मिमी) | पौधे प्रति हेक्टेयर | दूरी · 75 सेमी कतार | दूरी · 90 सेमी कतार |
|---|---|---|---|
| 28/35 | 45,000 | 30 सेमी | 25 सेमी |
| 35/50 | 35,000 | 38 सेमी | 32 सेमी |
| 50/60 | 33,000 | 40 सेमी | 33 सेमी |
| 50/60 कटा हुआ | 36,000 | 37 सेमी | 31 सेमी |
खाद — यूरिया की बचत है इसमें
इस किस्म की एक अच्छी बात यह है कि यूरिया कम लगता है। पत्ती अपने आप घनी हो जाती है, रेटिंग 80 है। इसलिए यूरिया से धक्का देने की ज़रूरत नहीं पड़ती — उतना ही डालिए जितना चाहिए, और खाद का ख़र्च बचा लीजिए। ज़्यादा डालेंगे तो पत्ती बढ़ेगी और आलू पीछे रह जाएगा।
खाद का दो-तिहाई हिस्सा बुवाई के समय दीजिए और एक-तिहाई बाद में। कितना डालना है, यह अपनी मिट्टी की जाँच से तय कीजिए। गोबर की खाद नाप-तौल कर डालिए, क्योंकि वह देर से घुलती है।
पोटाश यहाँ दो बार दीजिए, और दोनों बार फ़ायदा अलग है।
बुवाई से पहले — अगर मिट्टी में पोटाश कम है तो KCl वाली खाद डालिए। इससे आलू चोट कम खाता है, यानी खुदाई के बाद माल अच्छा निकलता है।
आलू बनना शुरू होने पर — एक बार और पोटाश दीजिए। इससे ड्राई मैटर सही जगह पर रुका रहता है। अगर आपने कंपनी से ड्राई मैटर की शर्त पर सौदा किया है, तो यही डोज़ आपको शर्त के अंदर रखेगी।
घास मारने की दवा में एक बात का ध्यान रखिए। मेट्रीब्यूज़िन इस किस्म पर जल्दी असर करती है, इसलिए फ़सल निकलने से पहले डालिए। बाद में डालनी पड़े तो कम मात्रा में।
बीज किस्म, स्टोर और प्रोसेसिंग पर हम रोज़ काम करते हैं। मंडी भाव भी यहीं मिलते हैं।
आज का आलू भावदवा का कार्यक्रम — पहले से चलाइए
इस किस्म में पत्ती वाला झुलसा जल्दी लग जाता है, रेटिंग 41। आलू में लगने वाला झुलसा 68 पर है। इसलिए दवा का पूरा कार्यक्रम पहले से बनाइए और छिड़काव बीमारी दिखने से पहले शुरू कर दीजिए। समय पर छिड़काव चलता रहे तो फ़सल पूरी निकल आती है।
बीज अच्छी जगह से लीजिए, क्योंकि PVY की रेटिंग 55 है। अल्टरनेरिया 77 और स्प्रेइंग 73 पर हैं — इनसे परेशानी सबसे कम होगी।
| बीमारी | रेटिंग |
|---|---|
| Yntn (आलू में) | 88 — कम परेशानी |
| अल्टरनेरिया | 77 — नहीं लगती |
| स्प्रेइंग | 73 — नहीं लगती |
| आलू का झुलसा | 68 — थोड़ी लगती है |
| पाउडरी स्कैब | 59 — थोड़ी लगती है |
| कॉमन स्कैब | 56 — थोड़ी लगती है |
| PVY | 55 — लग जाती है |
| पत्ती का झुलसा | 41 — जल्दी लग जाती है |
निमेटोड की बात अलग है। एस्टेरिक्स Ro1 से पूरी तरह बची रहती है, रेटिंग 9, और वार्ट के F1 से भी। Ro2/3 पर 3, Pa2 पर 2, Pa3 पर 1 और वार्ट F2 पर 2। तो जिस खेत में Ro1 की दिक़्क़त रही है, वहाँ यह किस्म आपके काम की है। (Ro2/3, Pa2, Pa3 और F2 के नंबर HZPC ने अपनी जाँच के बताए हैं।)
खुदाई — थोड़ा ध्यान, पूरा माल
फ़सल को अपने आप पक जाने दीजिए, फिर पत्ती-तना सुखाइए। छिलका पूरी तरह सख़्त हो जाए, तब खुदाई कीजिए। किस्म देर से पकती है, तो तारीख़ पहले से मत बाँधिए — फ़सल को उसका पूरा समय दीजिए, माल भी उतना ही अच्छा निकलेगा।
आलू बड़ा होता है, इसलिए खुदाई और ढुलाई में हाथ हल्का रखिए। मशीन धीरे चलाइए और आलू को ऊँचाई से मत गिरने दीजिए। यही ध्यान ग्रेडिंग और बोरी भरते समय भी रखिए। बुवाई से पहले जो KCl डाली थी, वह यहीं काम आती है — आलू चोट कम खाता है।
कोल्ड स्टोर में पूरा सीज़न
एस्टेरिक्स पूरे सीज़न स्टोर में रह जाता है। बस चार बातें ध्यान में रखिए, और आलू अच्छा निकलेगा।
- पहले सुखाइए, छिलका सख़्त होने दीजिए। स्टोर में डालने से पहले यह ज़रूरी है।
- ठंडक धीरे-धीरे बढ़ाइए और 6°C पर स्थिर रखिए। एकदम से तापमान मत गिराइए।
- हवा थोड़ी-थोड़ी देर पर चलाइए — इतनी कि गैस न भरे, इतनी नहीं कि आलू सूख जाए।
- अंकुर रोकने वाली दवा मत डालिए। इस किस्म में उसकी ज़रूरत नहीं — ठंडक से ही काम चल जाता है। दवा डालने पर छिलका जल जाता है। बिना अंकुर के यह किस्म कम दिन रहती है, रेटिंग 49, इसलिए ठंडक का हिसाब सही रखिए।
बेचने की बात
महिंद्रा HZPC इसे प्रोसेसिंग श्रेणी में रखती है। तो अगर आप चिप्स या फ्राई वाली कंपनी के लिए उगा रहे हैं, बात 23.3% ड्राई मैटर और 1.094 स्पेसिफ़िक ग्रैविटी पर होगी — और यही इस किस्म की सबसे मज़बूत बात है।
एक बात और। ऊपर लिखी खेती की सलाह HZPC की आम सलाह है। किस्म का स्वभाव हर जगह वही रहेगा, पर बुवाई का समय, पानी और खाद अपने इलाक़े के हिसाब से तय कीजिए। बीज लेते समय यह बात बीज देने वाले से पूछ लीजिए, वे आपके ज़िले के हिसाब से बता देंगे।
आलू की खेती की पूरी जानकारी के लिए आलू की खेती कैसे करें पढ़िए, और देश भर के ताज़ा भाव के लिए आलू भाव देखिए।
आपकी मिट्टी, सीज़न और ख़रीदार के हिसाब से कौन सी किस्म बैठेगी — बीज कितना लगेगा, ड्राई मैटर कितना रहेगा और स्टोर में क्या करना पड़ेगा। जो पूछना हो, सीधे लिखिए।


