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आलू की खेती कैसे करें — बुआई से कटाई तक पूरी गाइड

जलवायु और मिट्टी, बुआई का सही समय, बीज दर, खाद, सिंचाई, रोग प्रबंधन, खुदाई और भंडारण — आलू की खेती के हर चरण की व्यावहारिक जानकारी एक जगह।

दीपक नेगी · 07 अप्रैल 2026 · 4 मिनट
आलू की खेती कैसे करें — बुआई से कटाई तक पूरी गाइड

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है, और उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, पंजाब तथा मध्य प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। आलू मुख्यतः रबी की फसल है — मैदानी क्षेत्रों में अक्टूबर-नवंबर में बुआई और फरवरी-मार्च में कटाई। यहाँ आलू की खेती के हर चरण की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

जलवायु और मिट्टी

आलू के लिए 15–25°C तापमान आदर्श है; कंद बनने के लिए 15–20°C की रातें सबसे उपयुक्त होती हैं, और 30°C से ऊपर कंद बनना रुक जाता है। पाला पत्तियों को नुकसान पहुँचाता है। सबसे अच्छी मिट्टी बलुई दोमट है जिसमें जल-निकास अच्छा हो, और pH 5.5 से 7.0 के बीच रहे। भारी चिकनी मिट्टी और जलभराव वाले खेतों में आलू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि कंद विकृत होते हैं और सड़न का ख़तरा रहता है। खेत की 2–3 बार गहरी जुताई कर मिट्टी भुरभुरी बनानी चाहिए।

कंद बनने का नाज़ुक चरण
40–80 दिन
बुआई के 40 से 80 दिन के बीच कंद बढ़ते हैं — इस दौरान पानी की कमी से कंद छोटे, दरारयुक्त या खोखले रह जाते हैं, इसलिए यही सिंचाई का सबसे ज़रूरी समय है।

बुआई का समय और बीज दर

उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र में अक्टूबर के पहले सप्ताह से नवंबर अंत तक बुआई होती है — अगेती क़िस्में (कुफरी पुखराज) अक्टूबर में, मध्यम क़िस्में (कुफरी ज्योति) नवंबर तक। पहाड़ी क्षेत्रों में फरवरी-मार्च और अगस्त-सितंबर दो सीज़न होते हैं। प्रति हेक्टेयर 20–25 क्विंटल प्रमाणित बीज लगता है; बीज का आदर्श आकार 30–40 ग्राम है, और बड़े कंदों को 2–3 आँख वाले टुकड़ों में काटकर कटे भाग पर फफूँदनाशक पाउडर लगाया जाता है। बीज और लागत के विस्तृत हिसाब के लिए 1 बीघा में बीज और लागत देखें।

बुआई मेड़ विधि से सबसे अच्छी होती है — कतार की दूरी 50–60 सेमी, पौध की दूरी 15–20 सेमी, और गहराई 5–7 सेमी। बुआई से पहले बीज को मैंकोज़ेब या कार्बेन्डाज़िम के घोल में उपचारित करना फफूँद रोगों से बचाता है।

खाद और सिंचाई

संतुलित NPK आलू की उपज की रीढ़ है। मोटे तौर पर 20–25 टन सड़ी गोबर खाद प्रति हेक्टेयर बुआई से पहले मिलाई जाती है, और इसके साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश संतुलित मात्रा में दिए जाते हैं। पोटाश कंद को मोटा करने में सबसे अहम है — खाद की विस्तृत मात्रा और शेड्यूल के लिए आलू के लिए सबसे अच्छा खाद और आलू को मोटा करने के लिए क्या डालें देखें।

पहली सिंचाई बुआई के 3–5 दिन बाद हल्की दी जाती है, फिर हर 7–10 दिन पर। कंद बनने (30–40 दिन) और कंद बढ़ने (40–80 दिन) के समय पानी की कमी सबसे अधिक नुकसान करती है, जबकि कटाई से 10–15 दिन पहले सिंचाई बंद कर देने से छिलका सख़्त होता है और भंडारण में आलू टिकता है। ड्रिप सिंचाई से काफ़ी पानी बचता है — विस्तार के लिए आलू की सिंचाई कब और कितनी देखें।

क़िस्म का चयन

अधिक उपज के लिए कुफरी पुखराज (अगेती), विश्वसनीय और सर्वव्यापी विकल्प के रूप में कुफरी ज्योति, चिप्स-प्रसंस्करण के लिए कुफरी चिप्सोना-3 या लेडी रोज़ेटा (अनुबंध खेती में बेहतर दाम), गर्म क्षेत्रों के लिए कुफरी सूर्या, और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए लेट-ब्लाइट-प्रतिरोधी कुफरी हिमालिनी या कुफरी गिरधारी उपयुक्त हैं। ICAR-CPRI द्वारा हाल में जारी नई क़िस्में भी विकल्प बढ़ाती हैं।

रोग प्रबंधन

सबसे विनाशकारी रोग पिछेती झुलसा (लेट ब्लाइट) है, जो नम मौसम में पूरी फसल को कुछ दिनों में नष्ट कर सकता है; इसके लिए प्रतिरोधी क़िस्में और समय पर फफूँदनाशक छिड़काव ज़रूरी हैं। अगेती झुलसा, काला चूर्ण, मृदु सड़न और विषाणु रोग (जो एफिड कीट से फैलते हैं) अन्य प्रमुख ख़तरे हैं — रोगों की पहचान, इलाज और हफ़्ते-दर-हफ़्ते छिड़काव कार्यक्रम के लिए आलू में लगने वाले रोग और दवा तथा आलू स्प्रे शेड्यूल देखें।

खुदाई और भंडारण

कटाई से 10–15 दिन पहले पौधों के ऊपरी हिस्से काट देने से छिलका सख़्त होता है। खुदाई सूखे मौसम में, कुदाल या मशीन से की जाती है, और कटे या रोगी कंद तुरंत अलग कर दिए जाते हैं। खुदाई के बाद 10–14 दिन क्योरिंग (छाया में, हवादार जगह) से छिलके की मामूली चोटें भरती हैं। कोल्ड स्टोर में टेबल आलू 2–4°C पर और प्रसंस्करण आलू 8–12°C पर रखा जाता है, जहाँ इसे कई महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। आलू बोने के समय और तरीके के विस्तृत राज्यवार विवरण के लिए आलू बोने का सही समय और तरीका देखें, और ताज़ा भाव के लिए आलू भाव।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आलू बोने का सही समय क्या है?
उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र (UP, बिहार, पंजाब) में अक्टूबर के पहले सप्ताह से नवंबर अंत तक — अगेती क़िस्में अक्टूबर में, मध्यम क़िस्में नवंबर तक। पहाड़ी क्षेत्रों में फरवरी-मार्च और अगस्त-सितंबर दो सीज़न होते हैं। देरी से बुआई पर तापमान बढ़ने से कंद बनना प्रभावित होता है और उपज गिरती है।
1 बीघा में कितने आलू बोए जाते हैं?
उत्तर प्रदेश में 1 बीघा (लगभग 2,500 वर्ग मीटर) में करीब 8–10 क्विंटल बीज आलू लगता है। यह मात्रा कंद के आकार (30–40 ग्राम आदर्श) और क़िस्म पर निर्भर करती है।
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