रविवार, 14 जून 2026हिन्दी · English
INDIAN POTATO
उत्पादन

आलू को मोटा करने के लिए क्या डालें — ICAR अनुशंसित खाद, फोलियर स्प्रे और सही तरीका

आलू मोटा करने का जवाब किसी एक 'जादुई दवा' में नहीं — तीन चीज़ों के तालमेल में है: सही खाद (विशेषकर पोटाश), समय पर मिट्टी चढ़ाना, और रोग-मुक्त स्वस्थ बेल। ICAR-CPRI अनुशंसित मात्रा और फोलियर स्प्रे शेड्यूल।

दीपक नेगी · 03 मई 2026 · 4 मिनट
आलू को मोटा करने के लिए खाद, फोलियर स्प्रे और सही तरीका

"आलू को मोटा करने के लिए क्या डालें" — यह सवाल हर आलू किसान पूछता है, और इसका जवाब किसी एक जादुई दवा में नहीं छुपा। असली जवाब तीन चीज़ों के सही तालमेल में है: सही खाद (विशेषकर पोटाश), समय पर मिट्टी चढ़ाना, और रोग-मुक्त स्वस्थ बेल। बाज़ार में बिकने वाली ब्रांडेड "आलू फुलाने की दवा" असल में जेनेरिक NPK ग्रेड ही होती हैं, जिन्हें किसान सीधे ख़रीदकर काफ़ी सस्ते में वही काम कर सकता है।

मूल सिद्धांत — पोटाश की भूमिका

पोटाश आलू में स्टार्च-निर्माण का प्रमुख तत्व है, और स्टार्च ही कंद को भारी और मोटा बनाता है। नाइट्रोजन शुरुआती 50–60 दिन तक पत्तियाँ और बेल बढ़ाने के लिए ज़रूरी है, पर अधिक नाइट्रोजन कंदों के बजाय पत्तियों को बढ़ाता है। फास्फोरस जड़-विकास और कंद-संख्या तय करता है। ICAR-CPRI का मुख्य संदेश यही रहा है कि अधिक यूरिया का मतलब अधिक उपज नहीं — संतुलित NPK ही कंद को मोटा करता है। जो किसान सिर्फ़ यूरिया डालते हैं और पोटाश छोड़ देते हैं, उनके कंद छोटे रह जाते हैं, चाहे बेल कितनी भी हरी-भरी क्यों न दिखे।

सरल नियम यह है: पहले 60 दिन नाइट्रोजन की भूमिका (बेल बढ़ाना), 60 दिन के बाद पोटाश की भूमिका (कंद मोटा करना), और पूरे सीज़न फास्फोरस की भूमिका (जड़ और कंद-संख्या)।

असली "मोटा करने की दवा"
00:52:34 + 00:00:50
कंद-निर्माण (55–60 दिन) पर NPK 00:52:34 और कंद-बल्किंग (75–80 दिन) पर NPK 00:00:50 का फोलियर स्प्रे — ये जेनेरिक ग्रेड कोड हैं, ब्रांडेड पैकेज पर अतिरिक्त पैसे देने की ज़रूरत नहीं।

ICAR-CPRI अनुशंसित खाद मात्रा

ICAR-CPRI की अनुशंसित उर्वरक मात्रा प्रति हेक्टेयर 270 किग्रा नाइट्रोजन, 80 किग्रा फास्फोरस और 150 किग्रा पोटाश है, साथ ही करीब 30 टन गोबर खाद। बाज़ार में उपलब्ध रूपों में यह मोटे तौर पर प्रति एकड़ इस तरह बैठता है: DAP लगभग 70–75 किग्रा (पूरा बुआई के समय), यूरिया कुल 130–140 किग्रा (आधा बुआई के समय, आधा मिट्टी चढ़ाते समय), और MOP (म्यूरिएट ऑफ़ पोटाश) लगभग 100 किग्रा (पूरा बुआई के समय)। ये मात्राएँ औसत मिट्टी के लिए हैं — अपने खेत में मिट्टी परीक्षण कराकर नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से कस्टम सिफ़ारिश लेना सबसे अच्छा है।

चरणवार शेड्यूल

बुआई के समय गोबर खाद, पूरा DAP, पूरी MOP और आधी यूरिया दी जाती है। बुआई के 20–25 दिन बाद मिट्टी चढ़ाते समय बची आधी यूरिया बिखेरी जाती है। फिर बुआई के 55–60 दिन बाद कंद-निर्माण को बढ़ावा देने के लिए NPK 00:52:34 का फोलियर स्प्रे (3 ग्राम/लीटर), और 75–80 दिन बाद कंद को सीधे मोटा करने के लिए NPK 00:00:50 (सल्फेट ऑफ़ पोटाश) का स्प्रे किया जाता है।

फोलियर स्प्रे — सबसे प्रभावी तरीका

फोलियर स्प्रे से पोषक तत्व 24–48 घंटे में पौधे में पहुँच जाते हैं, जबकि मिट्टी में डालने पर 7–10 दिन लगते हैं। चूँकि कंद-बढ़ने का समय सीमित होता है, इसलिए यही तरीका सबसे असरदार है। "00:52:34" और "00:00:50" सिर्फ़ जेनेरिक NPK ग्रेड कोड हैं — दुकान पर जिस ब्रांड का प्राइस-टू-क्वालिटी सबसे अच्छा हो, वही ख़रीदें। साथ में बोरॉन (1–2 ग्राम/लीटर) का छिड़काव बुआई के 40 और 60 दिन बाद कंद को सुडौल बनाता है और फटने से बचाता है। छिड़काव हमेशा सुबह या शाम करें, दोपहर की धूप में नहीं, और स्प्रे के बाद कुछ घंटे बारिश न हो इसका ध्यान रखें।

मिट्टी चढ़ाना क्यों ज़रूरी

मिट्टी चढ़ाना बुआई के 20–25 दिन बाद अनिवार्य है। इसके बिना डाली गई आधी से अधिक खाद बेकार चली जाती है। मिट्टी चढ़ाने से कंद को बढ़ने की जगह मिलती है (यही आकार का सबसे बड़ा कारण है), कंद सूरज की रोशनी से बचते हैं (वरना हरे होकर बाज़ार में नहीं बिकते), और नए stolon बनने से एक पौधे में कंदों की संख्या बढ़ती है। मेड़ की ऊँचाई 20–25 सेमी रखें और एक ही बार में पर्याप्त ऊँचाई बनाएँ, ताकि बार-बार चढ़ाने से जड़ें न टूटें।

स्वस्थ बेल = मोटा कंद

सबसे अनदेखा बिंदु यह है कि अगर पिछेती झुलसा बेल को मार दे, तो कंद बढ़ना तुरंत रुक जाता है और सारी खाद-मेहनत बेकार हो जाती है। इसलिए बेल जब खेत को पूरी तरह ढक ले (canopy closure), तभी से बचावात्मक मैंकोज़ेब छिड़काव शुरू कर देना चाहिए — रोग आने के बाद इलाज से रोकथाम हमेशा कमज़ोर पड़ती है। पूरी खेती-प्रक्रिया के लिए आलू की खेती कैसे करें और खाद के विस्तृत विवरण के लिए आलू के लिए सबसे अच्छा खाद देखें।

साथी किसानों और व्यापारियों से जुड़ेंव्हाट्सऐप ग्रुप पर आलू भाव, मौसम और बाज़ार पर खुलकर चर्चा करें।
ग्रुप जॉइन करें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आलू में कौन-सा NPK डालें?
दो water-soluble ग्रेड सबसे प्रभावी हैं, दोनों जेनेरिक ग्रेड कोड हैं। बुआई के 55–60 दिन बाद NPK 00:52:34 का फोलियर स्प्रे (3 ग्राम/लीटर) कंद-निर्माण बढ़ाता है, और 75–80 दिन बाद NPK 00:00:50 (सल्फेट ऑफ़ पोटाश) का स्प्रे कंद को सीधे मोटा करता है।
मिट्टी चढ़ाना कब करें?
बुआई के 20–25 दिन बाद, जब पौधे 15–20 सेमी ऊँचे हो जाएँ। मेड़ की ऊँचाई 20–25 सेमी रखें। मिट्टी चढ़ाने से पहले बची हुई आधी यूरिया बिखेरें ताकि वह दब जाए और अमोनिया गैस बनकर न उड़े।
आलू खादपोटाशफोलियर स्प्रेमिट्टी चढ़ानाICAR-CPRI

और पढ़ें

सभी उत्पादन लेख →
आलू बीज की मात्रा और लागत — खेत में बीज कंदउत्पादनआलू बीज की सही मात्रा और लागत — प्रति एकड़, हेक्टेयर और बीघा का हिसाब13 जून 2026आलू बोने का सही समय और तरीका — खेत में रोपाईउत्पादनआलू बोने का सही समय और तरीका — ज़ोन के हिसाब से रोपाई की पूरी जानकारी13 जून 2026The Indian Potato Value Chain: Where the Rupee GoesEN · Englishहमारी अंग्रेज़ी साइटThe Indian Potato Value Chain: Where the Rupee Goesindianpotato.com →EN · Englishसाझेदार ज्ञानकोशNyandarua: How One County Grew 35% of Kenya's Potatoespotatopedia.com →