कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी योजना — कौन-सी योजना, कितनी सब्सिडी और आवेदन कैसे करें
MIDH, NHB, सम्पदा और AIF — कोल्ड स्टोरेज पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की पूरी जानकारी: कौन-सी योजना किसके लिए, सब्सिडी कैसे गिनी जाती है, और बैक-एंडेड आवेदन की प्रक्रिया।

कोल्ड स्टोरेज बनाने की सोच रहे उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी यही है कि "कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी" कोई एक योजना है। दरअसल यह कई योजनाओं का समूह है, हर एक की अपनी पात्रता, क्षमता-सीमा और प्रक्रिया है। सही योजना चुनना और बैक-एंडेड व्यवस्था को समझना ही आधी लड़ाई है। (भंडारगृह की लागत, क्षमता और किराया अर्थशास्त्र पर अलग से आलू कोल्ड स्टोरेज बिज़नेस गाइड देखें — यहाँ हम सिर्फ़ सब्सिडी और आवेदन पर केंद्रित हैं।)
कौन-सी योजना किसके लिए
सबसे आम रास्ता बागवानी के एकीकृत विकास मिशन (MIDH) का है, जिसके तहत 5,000 टन तक के कोल्ड स्टोरेज पर राज्य बागवानी मिशनों के ज़रिए सहायता मिलती है, और यह राज्य की वार्षिक कार्ययोजना (AAP) पर निर्भर करती है। इससे बड़ी — 5,000 से 10,000 टन क्षमता और नियंत्रित-वातावरण (CA) भंडारण — परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की पूँजी निवेश सब्सिडी योजना है, जिसमें प्रति परियोजना अधिकतम सब्सिडी ₹7.5 करोड़ तक हो सकती है। इनके अलावा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (एकीकृत कोल्ड चेन) और कृषि अवसंरचना कोष (AIF) भी विकल्प हैं, और नाबार्ड वित्तपोषण व चैनल की भूमिका निभाता है।
सब्सिडी कितनी और कैसे गिनी जाती है
सब्सिडी की दर सामान्य क्षेत्रों में परियोजना लागत का 35% और पूर्वोत्तर, पहाड़ी व अनुसूचित क्षेत्रों में 50% है। पर अहम बारीक़ी यह है कि यह असली ख़र्च पर नहीं, बल्कि सरकार के तय "लागत मानक" पर गिनी जाती है — NHB के अनुसार 5,000 टन तक के लिए लगभग ₹8,000 प्रति टन, और बड़ी क्षमता पर यह दर घटती जाती है। क्षमता की गणना के लिए 3.4 घन मीटर (120 घन फुट) चैंबर आयतन को 1 टन माना जाता है। सब्सिडी "क्रेडिट-लिंक्ड बैक-एंडेड" है — यानी पात्र राशि बैंक के टर्म लोन से बँधी होती है और परियोजना पूरी होने के बाद ही मिलती है।
आवेदन की प्रक्रिया
NHB ने मार्च 2023 से प्रक्रिया सरल कर दी है। पहले की दो-चरणीय व्यवस्था (इन-प्रिंसिपल अप्रूवल और ग्रांट ऑफ़ क्लियरेंस) की जगह अब आवेदक चाहें तो बैंक से टर्म लोन दिलाने में मदद के लिए "लेटर ऑफ़ कम्फ़र्ट" (LoC) ले सकते हैं — यह अनिवार्य नहीं है। टर्म लोन मंज़ूर होने के बाद सीधे ऑनलाइन ग्रांट ऑफ़ क्लियरेंस (GoC) के लिए आवेदन किया जाता है, और टर्म लोन आवेदन की तारीख़ से तीन महीने के भीतर मंज़ूर हुआ होना चाहिए। पूरी प्रक्रिया डिजिटल है। परियोजना पूरी होने पर बैंक, NHB और राज्य विभाग के प्रतिनिधियों वाला संयुक्त निरीक्षण दल (JIT) जाँच करता है, और अंतिम सब्सिडी राशि उसी रिपोर्ट के आधार पर तय होकर "सब्सिडी रिज़र्व फंड खाते" में डाली जाती है, जो अंतिम ऋण किस्त से समायोजित होती है।
ज़रूरी दस्तावेज़
आवेदन के लिए NHB के निर्धारित प्रारूप में DPR, बैंक का टर्म-लोन स्वीकृति पत्र, क़ानूनी सर्च रिपोर्ट, मूल्यांकन नोट, हीट-लोड गणना और बेसिक डेटा शीट चाहिए। ज़मीन आवेदक के स्वामित्व में हो या कम-से-कम 15 साल के पंजीकृत पट्टे पर हो। परियोजना को NHB/NCCD के तकनीकी मानकों पर खरा उतरना ज़रूरी है, वरना सहायता नहीं मिलती। सबसे अहम — DPR, बैंक मूल्यांकन रिपोर्ट और आवेदन की हर जानकारी एक जैसी होनी चाहिए; किसी भी बेमेल पर आवेदन ख़ारिज हो सकता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
बैक-एंडेड व्यवस्था का मतलब है कि उद्यमी को पहले अपने और बैंक के पैसे से इकाई खड़ी करनी होती है — सब्सिडी बाद में आती है, इसलिए शुरुआती पूँजी-प्रवाह की पक्की योजना ज़रूरी है। परियोजना तय समय-सीमा (टर्म लोन की पहली किस्त से लगभग 18 महीने/दो साल) में पूरी करनी होती है। चूँकि यह राज्य की वार्षिक कार्ययोजना और बदलते दिशानिर्देशों पर निर्भर करती है, आवेदन से पहले संबंधित राज्य बागवानी मिशन या NHB की मौजूदा स्थिति और उपलब्ध बजट ज़रूर जाँच लें।


