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भारत में आलू उत्पादन 2024-25 — सरकारी अंतिम अनुमान 58.57 मिलियन टन

भारत सरकार के अंतिम अनुमान के अनुसार 2024-25 में देश का आलू उत्पादन 58.57 मिलियन टन रहा — पिछले वर्ष से 2.66% अधिक। पाँच साल का रुझान, शीर्ष राज्य और वैश्विक स्थिति का पूरा विश्लेषण।

इंडियन पोटैटो डेस्क · 26 मार्च 2026 · 4 मिनट
भारत में आलू उत्पादन 2024-25 — सरकारी अंतिम अनुमान 58.57 मिलियन टन

भारत सरकार के अंतिम अनुमान के अनुसार 2024-25 फसल वर्ष में देश का आलू उत्पादन 585.71 लाख टन (58.57 मिलियन टन) रहा — 2023-24 के 570.53 लाख टन से लगभग 15.18 लाख टन, यानी 2.66% अधिक। यह आँकड़ा भारत को चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक बनाए रखता है, और पिछले एक दशक में देश के आलू क्षेत्र की लगातार ऊपर की ओर बढ़ती प्रवृत्ति की पुष्टि करता है।

"अंतिम अनुमान" का महत्व

सरकार उत्पादन आँकड़े कई चरणों में जारी करती है — पहला, दूसरा और तीसरा अग्रिम अनुमान, और अंत में अंतिम अनुमान। अंतिम अनुमान सबसे सटीक और प्रामाणिक माने जाते हैं, और नीति-निर्माण, व्यापार-निर्णय तथा उद्योग-विश्लेषण का आधार बनते हैं। यही वजह है कि इस विश्लेषण में अग्रिम नहीं, बल्कि अंतिम अनुमानों के ही आँकड़े लिए गए हैं — जिनमें 2024-25 का उत्पादन 58.57 मिलियन टन दर्ज है।

भारत आलू उत्पादन · 2024-25 (अंतिम)
58.57 मिलियन टन
पिछले वर्ष से 2.66% अधिक। पाँच वर्षों में उत्पादन 48.56 से बढ़कर 58.57 मिलियन टन — लगभग 20.6% की संचयी वृद्धि।

पाँच साल का सफ़र

बीते पाँच वर्षों में भारत का आलू उत्पादन लगभग 10 मिलियन टन बढ़ा है — 2019-20 के 485.59 लाख टन से 2024-25 के 585.71 लाख टन तक, यानी करीब 20.6% की संचयी वृद्धि। 2020-21 में कोविड काल के बावजूद उत्पादन में सबसे बड़ी एकल-वर्ष छलाँग आई और यह 53.11 मिलियन टन पर पहुँचा, क्योंकि लॉकडाउन के बीच किसानों ने भंडारण-योग्य और स्थिर माँग वाली फसल की ओर रुख किया। 2022-23 में देश ने अब तक का सर्वाधिक उत्पादन — 60.14 मिलियन टन — दर्ज किया। 2023-24 इस पूरी अवधि का एकमात्र गिरावट वाला वर्ष रहा, जब उत्पादन घटकर 57.05 मिलियन टन रह गया; इसका मुख्य कारण बिहार और पश्चिम बंगाल में कंद-निर्माण के नाज़ुक चरण के दौरान प्रतिकूल मौसम बताया गया। 2024-25 में 58.57 मिलियन टन के साथ स्वस्थ रिकवरी हुई, हालाँकि यह 2022-23 के शिखर से नीचे है।

भारत की बागवानी में आलू की जगह

आलू भारत के कुल बागवानी उत्पादन का लगभग 15.8% और कुल सब्ज़ी उत्पादन का करीब 26.9% है — यानी मात्रा के हिसाब से देश की सबसे बड़ी सब्ज़ी फसल। उल्लेखनीय यह है कि प्याज़ और टमाटर — भारत की दो अन्य प्रमुख सब्ज़ियाँ — का संयुक्त उत्पादन भी आलू से कम बैठता है। और यह सब कुल बागवानी क्षेत्रफल के मात्र 8% हिस्से से आता है, जो आलू की अपेक्षाकृत ऊँची प्रति-हेक्टेयर उत्पादकता दर्शाता है।

शीर्ष उत्पादक राज्य

भारत का आलू उत्पादन मुख्यतः सिंधु-गंगा मैदान में केंद्रित है, और शीर्ष पाँच राज्य मिलकर कुल उत्पादन का लगभग 80–85% देते हैं। उत्तर प्रदेश अकेले करीब एक-तिहाई हिस्से के साथ सबसे आगे है — आगरा, कन्नौज और फ़र्रुखाबाद इसके प्रमुख ज़िले हैं। पश्चिम बंगाल दूसरे स्थान पर है, जहाँ प्रति-हेक्टेयर उपज सबसे ऊँची मानी जाती है। बिहार तेज़ी से बढ़ता उत्पादक है, जिसमें नालंदा और पटना अग्रणी हैं। गुजरात प्रसंस्करण-ग्रेड आलू का केंद्र है, बनासकांठा और साबरकांठा की अगुवाई में, जबकि मध्य प्रदेश इंदौर और ग्वालियर संभाग के साथ उभरता हुआ उत्पादक है। पंजाब देश का प्रमुख बीज-आलू आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। राज्यवार ताज़ा थोक भाव के लिए आलू भाव देखें।

वैश्विक तस्वीर

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक है — चीन (करीब 95 मिलियन टन) पहले स्थान पर है, और भारत व चीन मिलकर वैश्विक उत्पादन का 40% से अधिक देते हैं। सबसे अहम बात यह है कि चीन साढ़े चार मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में आलू उगाता है, जबकि भारत लगभग 2.3–2.4 मिलियन हेक्टेयर से ही यह उत्पादन हासिल कर लेता है — यानी कहीं ऊँची भूमि-उपयोग दक्षता।

वृद्धि के पीछे क्या है

इस लगातार वृद्धि के कई कारण हैं। ICAR-CPRI द्वारा विकसित ऊँची-उपज और रोग-प्रतिरोधी क़िस्मों — कुफरी पुखराज, कुफरी ज्योति और प्रसंस्करण-उपयुक्त क़िस्मों — ने प्रति-हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाई है। HyFun, McCain और ITC जैसी कंपनियों के प्रसंस्करण-विस्तार ने प्रसंस्करण-ग्रेड क़िस्मों की माँग बढ़ाई है। देश की 40 मिलियन टन से अधिक की विशाल शीत-भंडारण क्षमता ने फ़सलोत्तर नुक़सान घटाया है और किसानों को बेहतर मूल्य का मौक़ा दिया है — हालाँकि बंपर फसल के वर्षों में भरते कोल्ड स्टोर और गिरते भाव एक नई चुनौती भी बने हैं। साथ ही सूक्ष्म-सिंचाई के विस्तार और बागवानी मिशनों ने उत्पादन को अधिक स्थिर बनाया है।

आगे की राह

2025-26 के प्रथम अग्रिम अनुमान में उत्पादन लगभग 58.45 मिलियन टन रहने की संभावना जताई गई है — यानी 2024-25 के स्तर पर लगभग स्थिर। बुवाई क्षेत्रफल पिछले वर्ष जैसा रहने की उम्मीद है, पर अंतिम उत्पादन मौसम पर निर्भर करेगा। उद्योग पूर्वी क्षेत्रों में पछेती झुलसा के संभावित असर और अधिशेष आपूर्ति के कारण भाव में नरमी पर नज़र रखे हुए है। आगे आलू निर्यात और मूल्य-संवर्धन के विस्तार की दिशा में नीतिगत प्रयास इस वृद्धि को और गति दे सकते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2024-25 में भारत ने कितना आलू उत्पादन किया?
सरकार के अंतिम अनुमान के अनुसार 2024-25 में भारत का आलू उत्पादन 585.71 लाख टन (58.57 मिलियन टन) रहा — 2023-24 के 570.53 लाख टन से लगभग 2.66% अधिक।
भारत में सबसे अधिक आलू कहाँ उगाया जाता है?
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग एक-तिहाई देता है। इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश प्रमुख उत्पादक हैं।
आलू उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक है — चीन के बाद। उल्लेखनीय यह कि भारत चीन की तुलना में लगभग आधे क्षेत्रफल से यह उत्पादन हासिल करता है, जो ऊँची भूमि-उपयोग दक्षता दर्शाता है।
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