मैक्केन ख़रीदेगी फाल्कन एग्रीफ्रिज़ का गुजरात वाला फ्रोज़न आलू कारोबार
मैक्केन फूड्स ने 12 अक्टूबर 2026 को फाल्कन एग्रीफ्रिज़ फूड्स का गुजरात का फ्रोज़न आलू प्रोसेसिंग कारोबार ख़रीदने का समझौता किया। कडी (मेहसाणा) प्लांट, 450+ कर्मचारी, 1,000+ किसान।

12 अक्टूबर 2026 को मैक्केन फूड्स ने फाल्कन एग्रीफ्रिज़ फूड्स का गुजरात वाला फ्रोज़न आलू प्रोसेसिंग कारोबार ख़रीदने के समझौते की घोषणा की। फाल्कन का पूरी तरह ऑटोमेटिक प्लांट कडी (मेहसाणा) में है, जिसमें 450 से ज़्यादा कर्मचारी हैं और जिससे गुजरात के 1,000 से ज़्यादा किसान जुड़े हैं। काग़ज़ी शर्तें पूरी होते ही सौदा पक्का हो जाएगा। रक़म नहीं बताई गई है।
मैक्केन के लिए यह गुजरात में फ्राइज़ का दूसरा ठिकाना होगा, उसी मेहसाणा इलाक़े में जहाँ वह पहले से देश और विदेश के लिए फ्राइज़ बनाती है।
सौदा एक नज़र में
यह सौदा क्यों अहम है
मैक्केन के लिए भारत सबसे ज़रूरी बाज़ारों में से है, जहाँ उसका कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है। कंपनी का कहना है कि फाल्कन का प्लांट मिलने से वह ज़्यादा माल बना सकेगी, ज़रूरत पड़ने पर काम एक प्लांट से दूसरे में डाल सकेगी, और देश के साथ-साथ विदेश की बढ़ती माँग भी पूरी कर पाएगी।
उत्तर गुजरात का मेहसाणा ज़िला भारत के कई फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ प्लांटों का घर है। ये प्लांट आसपास के कॉन्ट्रैक्ट किसानों से आलू ख़रीदते हैं। गुजरात में आलू प्रोसेसिंग के लिए सरकारी मदद के बारे में पढ़िए गुजरात की आलू प्रोसेसिंग योजनाएँ।
निर्यात इस सौदे की दूसरी वजह है। 2025-26 में भारत ने 2,77,109 टन फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ बाहर भेजे और सबसे बड़ा ख़रीदार फ़िलीपींस रहा। पूरा ब्योरा: भारत से फ्रोज़न फ्राइज़ का निर्यात 2025-26।
दोनों कंपनियाँ क्या लेकर आ रही हैं
भारत में मैक्केन
- 1998 में तीन लोगों की टीम से शुरुआत
- 940 से ज़्यादा सीधे कर्मचारी
- देश भर के 2,500 से ज़्यादा किसान
- मेहसाणा, गुजरात में प्लांट
- गुजरात में लगभग ₹918 करोड़ (13.5 करोड़ कनाडाई डॉलर) लगाकर प्लांट बढ़ाया — 110 पक्की नौकरियाँ और 150 कॉन्ट्रैक्ट कामगार
फाल्कन एग्रीफ्रिज़
- फाल्कन ग्रुप की कंपनी, दफ़्तर भारत और दुबई में
- कडी, मेहसाणा में आधुनिक, पूरी तरह ऑटोमेटिक प्लांट
- दो साल से कम में तैयार
- 450 से ज़्यादा कर्मचारी
- गुजरात के 1,000 से ज़्यादा किसान
गुजरात के आलू किसानों के लिए क्या मतलब
फाल्कन एग्रीफ्रिज़ गुजरात के 1,000 से ज़्यादा किसानों से आलू ख़रीदती है। मैक्केन का कहना है कि सौदा पूरा होने के बाद वह इन रिश्तों को अपने किसान नेटवर्क में आगे बढ़ाएगी, जिसमें पहले से 2,500 से ज़्यादा किसान हैं।
कॉन्ट्रैक्ट किसान के लिए प्लांट के नाम से ज़्यादा अहम है कि गेट पर ख़रीदार कौन है। जो किसान आज फाल्कन को आलू देते हैं, वे बीज, किस्म, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और भुगतान के बारे में जानना चाहेंगे। घोषणा में अभी ये बातें नहीं हैं, इसलिए सौदा पूरा होने तक अपने फ़ील्ड ऑफ़िसर से बात करते रहें।
किसने क्या कहा
मैक्केन के एशिया-पैसिफ़िक और दक्षिण अफ़्रीका के रीजनल प्रेसिडेंट पियरे डैनेट ने कहा कि भारत मैक्केन के लिए सबसे ज़रूरी बढ़ते बाज़ारों में से है और यह सौदा दिखाता है कि कंपनी को भारत पर कितना भरोसा है।
मैक्केन फूड्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य कृष्णा ने कहा कि कंपनी फाल्कन के कर्मचारियों और किसानों को अपने साथ जोड़ेगी और इलाक़े में रोज़गार बढ़ाती रहेगी।
फाल्कन एग्रीफ्रिज़ के वाइस चेयरमैन पार्थजीत पटनायक ने कहा कि उन्हें दो साल से कम में बने पूरी तरह ऑटोमेटिक प्लांट और उसे खड़ा करने वाले कर्मचारियों और किसानों पर गर्व है।
फाल्कन एग्रीफ्रिज़ के डायरेक्टर और CEO मनीष टिबरेवाल ने कहा कि मैक्केन ही वह कंपनी है जो इस नींव पर कारोबार को आगे ले जा सकती है।
दोनों कंपनियाँ कौन हैं
मैक्केन फूड्स दुनिया की सबसे बड़ी फ्रोज़न आलू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों में से है। इसके उत्पाद 160 से ज़्यादा देशों में बिकते हैं। कंपनी में लगभग 22,000 लोग काम करते हैं, दुनिया भर में इसके 49 प्लांट हैं और यह 4,400 किसानों से आलू लेती है। इसकी सालाना बिक्री 16 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग ₹1.09 लाख करोड़) से ज़्यादा है।
फाल्कन एग्रीफ्रिज़ फाल्कन ग्रुप की कंपनी है। ग्रुप का कारोबार सीफ़ूड, रियल एस्टेट, फ़ाइनेंस, खनन, अस्पताल और फ्रोज़न आलू में है। इसकी मुख्य कंपनी फाल्कन मरीन एक्सपोर्ट्स लिमिटेड भारत के बड़े फ्रोज़न झींगा निर्यातकों में है। ग्रुप 30 से ज़्यादा देशों को निर्यात करता है और इसमें 3,500 से ज़्यादा लोग काम करते हैं।
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स्रोत: मैक्केन फूड्स की प्रेस विज्ञप्ति, 12 अक्टूबर 2026; फाल्कन एग्रीफ्रिज़। रुपये में रक़म 9 अक्टूबर 2026 की यूरोपियन सेंट्रल बैंक दर (1 कनाडाई डॉलर = ₹68.00) पर। फ्राइज़ की तस्वीर: Freepik।


