शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026हिन्दी · English
INDIAN POTATO
प्रसंस्करण · गुजरात

उत्पादन से वैल्यू तक: भारत में आलू प्रोसेसिंग की क्रांति और ग्लोबल साउथ के लिए 5 सबक

हाईफार्म के सीईओ सौंदरराजन एस बता रहे हैं कि भारत ताज़ा आलू से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग की ओर कैसे जा रहा है, हाईफन का बीज से शेल्फ़ तक का मॉडल क्या है और ग्लोबल साउथ के लिए पाँच सबक क्या हैं।

इंडियन पोटैटो डेस्क · 30 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
आलू की खुदाई करती महिलाएँ, ऊपर हाईफन का लोगो और लेख का शीर्षक: भारत में आलू प्रोसेसिंग की क्रांति
वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस · केन्या27 अक्टूबर 2026

लेखक: सौंदरराजन एस, सीईओ – हाईफार्म, हाईफन फूड्स

हाईफार्म, हाईफन फूड्स के सीईओ सौंदरराजन एस
सौंदरराजन एससीईओ, हाईफार्म · हाईफन फूड्स

खेती से जुड़े कारोबार में तीन दशक से ज़्यादा का अनुभव: बीज व्यवस्था, एग्री बायोटेक्नोलॉजी और फ़सल सुरक्षा। हाईफार्म में प्रोसेसिंग आलू की पैदावार, किसानों को मज़बूत बनाने और डिजिटल खेती का काम देखते हैं।

यह लेख लेखक की प्रस्तुति “द इंडिया पोटैटो स्टोरी” पर आधारित है, जो उन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को केन्या में वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में “ग्लोबल साउथ में प्रोसेस्ड आलू प्रोडक्ट्स का विस्तार” थीम पर दी।

01 · आज का दौर

भारत का आलू उद्योग एक अहम मोड़ पर

भारत का आलू उद्योग बड़े बदलाव के दौर में आ गया है। दुनिया में आलू पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश होने के नाते भारत अब सिर्फ़ ताज़ा आलू बेचने से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग से वैल्यू जोड़ने की ओर जा रहा है। इसके पीछे हैं बढ़ते शहर, लोगों की बदलती पसंद, फ़टाफ़ट खाना परोसने वाले रेस्टोरेंट (QSR) का फैलाव और विदेशों में बढ़ती माँग।

दूसरादुनिया के आलू उत्पादक देशों में भारत का नंबर
6 करोड़+ टनभारत की सालाना आलू पैदावार

हर साल 6 करोड़ मीट्रिक टन से ज़्यादा पैदावार के साथ भारत की खेती की नींव मज़बूत है। अब अगला मौक़ा है: प्रोसेसिंग लायक किस्में तैयार करना, पैदावार और क्वालिटी बढ़ाना, और ऐसी जुड़ी हुई सप्लाई चेन बनाना जो किसानों को देश और दुनिया के बाज़ारों से जोड़े।

फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ का बढ़ता कारोबार ख़ास तौर पर अहम है। इससे निवेश, गाँवों में रोज़गार, खेती में नए प्रयोग और एक्सपोर्ट से कमाई के मौक़े बन रहे हैं।

02 · तरक़्क़ी का इंजन

फ्रेंच फ्राइज़: दुनिया में भारत की तरक़्क़ी का नया इंजन

भारत का फ्रोज़न फ्रेंच फ्राइज़ उद्योग देश में बढ़ती खपत और बढ़ते एक्सपोर्ट से रफ़्तार पकड़ रहा है। QSR, होरेका (होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग) और मॉडर्न रिटेल से बढ़ती माँग, और साथ में प्रोसेसिंग प्लांट और कोल्ड चेन में निवेश, इस उद्योग को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं।

भारत की पहुँच वाले बाज़ार

रूट 1एशियारूट 2मिडिल ईस्टरूट 3अफ़्रीका

भारत की ताक़त है उसकी बड़ी पैदावार, प्रोसेसिंग लायक किस्में, कम लागत में मैन्युफैक्चरिंग और एशिया, मिडिल ईस्ट व अफ़्रीका के बड़े बाज़ारों से नज़दीकी।

लेकिन लंबे समय तक मुक़ाबले में टिके रहने के लिए प्रोसेसिंग की एक जैसी क्वालिटी, कच्चे माल की भरोसेमंद सप्लाई और खेती से मज़बूत जुड़ाव ज़रूरी होगा।

03 · सबूत

हाईफन: दुनिया के मुक़ाबले में भारत की प्रोसेसिंग ताक़त

हाईफन फूड्स दिखाता है कि भारत आलू प्रोसेसिंग का एक मज़बूत ग्लोबल हब बन रहा है। हर साल 1,10,000 मीट्रिक टन फ्रेंच फ्राइज़, 23,400 मीट्रिक टन पोटैटो स्पेशियलिटीज़ और 16,000 मीट्रिक टन पोटैटो फ्लेक्स बनाने की क्षमता के साथ हाईफन के पास कई तरह के प्रोडक्ट हैं, जो QSR, होरेका, रिटेल और बड़े संस्थागत ग्राहकों तक जाते हैं।

हाईफन · सालाना उत्पादन क्षमतामीट्रिक टन/साल
फ्रेंच फ्राइज़1,10,000 MT
पोटैटो स्पेशियलिटीज़23,400 MT
पोटैटो फ्लेक्स16,000 MT
50 से ज़्यादा देशों में एक्सपोर्ट

आज हाईफन 50 से ज़्यादा देशों में एक्सपोर्ट करता है। यह दिखाता है कि भारत दुनिया के बाज़ारों तक अच्छी क्वालिटी के प्रोसेस्ड आलू प्रोडक्ट पहुँचाने में कितना आगे बढ़ चुका है।

इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है बीज से शेल्फ़ तक का जुड़ा हुआ बिज़नेस मॉडल, जो बीज बढ़ाने, किसानों से साझेदारी, वैज्ञानिक खेती, ख़रीद, प्रोसेसिंग और दुनिया के बाज़ारों तक पहुँच को एक साथ जोड़ता है। इससे कच्चे माल की क्वालिटी एक जैसी रहती है, सप्लाई भरोसेमंद बनती है और प्रोसेसिंग में मुक़ाबले की ताक़त बढ़ती है।

बीज बढ़ानाकिसानों से साझेदारीवैज्ञानिक खेतीख़रीदप्रोसेसिंगदुनिया के बाज़ार

अपनी कृषि इकाई हाईफार्म के ज़रिए हाईफन ने प्रोसेसिंग के दम पर टिकाऊ तरक़्क़ी के लिए खेती की मज़बूत नींव बनाई है।

04 · खेती की नींव

हाईफार्म: खेती की नींव को मज़बूत करना

हाईफार्म का फ़ोकस आलू का एक जुड़ा हुआ इकोसिस्टम बनाने पर है: अच्छी क्वालिटी का बीज, प्रोसेसिंग लायक किस्में, वैज्ञानिक खेती, डिजिटल खेती और किसानों से व्यवस्थित जुड़ाव।

~1,00,000 MTहाईफार्म के बीज आलू प्लेटफ़ॉर्म की क्षमता

करीब 1,00,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले इसके बीज आलू प्लेटफ़ॉर्म के पीछे अर्ली-जनरेशन बीज व्यवस्था, बीज बढ़ाने के ख़ास कार्यक्रम और विदेशी ब्रीडर्स के साथ साझेदारी है।

गुजरात के खेत में हार्वेस्ट के समय क्रेन से उठाए जाते हाईफार्म के आलू के बड़े बैग

हार्वेस्ट के समय खेत से निकलते हाईफार्म के बड़े बैग। फ़ोटो: हाईफार्म।

इन कोशिशों का मक़सद है सही किस्म का चुनाव, बीज की क्वालिटी, फ़सल की पैदावार और प्रोसेसिंग में ज़्यादा माल निकलना (रिकवरी) बेहतर करना।

05 · किसान

हाईफार्म पाठशाला से छोटे किसानों को ताक़त

हाईफार्म पाठशाला किसानों को सिखाने और उनकी क़ाबिलियत बढ़ाने की पहल है, जो वैज्ञानिक खेती, ज़्यादा पैदावार और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देती है।

6,000+हाईफार्म पाठशाला से जुड़े किसान

खेत पर डेमो, तकनीकी ट्रेनिंग और किसानों के आपस में सीखने के ज़रिए यह कार्यक्रम 6,000 से ज़्यादा किसानों तक पहुँच चुका है। इसकी फ़ार्मर चैंपियंस पहल उन आगे बढ़ने वाले किसानों को सम्मान देती है, जिनमें युवा और महिला किसान भी हैं, जो खेती के अच्छे तरीकों और नए प्रयोगों में मिसाल बने हैं।

हाईफार्म पाठशाला बैच 2025-26 के किसान दीक्षांत समारोह में टोपियाँ उछालते हुए

हाईफार्म पाठशाला के पास हुए किसान, बैच 2025-26। फ़ोटो: हाईफार्म।

06 · नई तकनीक

डिजिटल और मौसम के हिसाब से स्मार्ट खेती

हाईफार्म फ़ार्मओजी (FarmOji), प्रिसिज़न खेती, IoT से मौसम और मिट्टी की निगरानी, डिजिटल तरीके से क्वालिटी की जाँच और ट्रेसेबिलिटी के ज़रिए डिजिटल खेती को आगे बढ़ा रहा है।

फ़ार्मओजी ऐपप्रिसिज़न खेतीIoT से मौसम और मिट्टी की निगरानीडिजिटल क्वालिटी जाँचट्रेसेबिलिटी
हाईफार्म के फ़ील्ड अफ़सर और एक आलू किसान फ़ोन पर फ़ार्मओजी ऐप देखते हुए

खेत में फ़ार्मओजी ऐप देखते हुए। फ़ोटो: हाईफार्म।

इनसे सिंचाई और खाद का सही इंतज़ाम, फ़सल को बीमारी से पहले से बचाना, संसाधनों की बचत और सप्लाई चेन पर बेहतर नज़र रखना आसान होता है।

इन तकनीकों के साथ-साथ रीजेनरेटिव खेती के तरीके मिट्टी की सेहत, पानी के सही इस्तेमाल और लंबे समय तक टिकाऊ खेती पर ध्यान देते हैं।

07 · सीख

ग्लोबल साउथ के लिए पाँच सबक

भारत का अनुभव प्रोसेसिंग के दम पर सबको साथ लेकर चलने वाले विकास की पाँच प्राथमिकताएँ दिखाता है:

1जानकारी, तकनीक और बाज़ार से जोड़कर छोटे किसानों को मज़बूत बनाएँ।
2मज़बूत बीज व्यवस्था बनाएँ और प्रोसेसिंग लायक किस्में किसानों तक पहुँचाएँ।
3डिजिटल, प्रिसिज़न और मौसम के हिसाब से स्मार्ट खेती को तेज़ी से बढ़ाएँ।
4प्रोसेसिंग, स्टोरेज और कोल्ड चेन के जुड़े हुए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करें।
5खेती की पैदावार को देश और दुनिया के बाज़ारों से जोड़ें।

ये सभी प्राथमिकताएँ साथ-साथ आगे बढ़नी चाहिए, तभी टिकाऊ और दुनिया में मुक़ाबला करने लायक आलू वैल्यू चेन बनेगी।

08 · आगे का रास्ता

कल के आलू इकोसिस्टम मिलकर बनाएँ

भारत में आलू का यह बदलाव अफ़्रीका, एशिया और पूरे ग्लोबल साउथ की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए काम के सबक देता है।

हाईफन की कामयाबी दिखाती है कि खेती से जुड़ाव, आधुनिक प्रोसेसिंग और विदेशी बाज़ार बनाने से दुनिया के मुक़ाबले में जगह बनती है। हाईफार्म की पहल दिखाती है कि किसानों को मज़बूत बनाकर, अच्छे बीज, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ खेती से इस तरक़्क़ी को सहारा दिया जा सकता है।

आलू उद्योग का भविष्य सिर्फ़ ज़्यादा आलू पैदा करना नहीं है, बल्कि उगाए गए हर आलू से ज़्यादा वैल्यू, ज़्यादा मौक़े और ज़्यादा ख़ुशहाली बनाना है।

आइए, मिलकर कल के आलू इकोसिस्टम बनाएँ।

हाईफार्म के सीईओ सौंदरराजन एस की तस्वीर

लेखक के बारे में

सौंदरराजन एस

सीईओ, हाईफार्म · हाईफन फूड्स

हाईफन फूड्स की इकाई हाईफार्म के सीईओ सौंदरराजन एस के पास खेती से जुड़े कारोबार में तीन दशक से ज़्यादा का नेतृत्व अनुभव है, जिसमें बीज व्यवस्था, एग्री बायोटेक्नोलॉजी, फ़सल सुरक्षा और खेती की जुड़ी हुई वैल्यू चेन शामिल हैं। वे हाईफार्म में प्रोसेसिंग आलू की पैदावार, किसानों को मज़बूत बनाने, डिजिटल खेती और टिकाऊ खेती से जुड़ी पहल की अगुवाई करते हैं।

हाईफार्म, हाईफन फूड्स · सीईओ, अप्रैल 2024 सेहाईफन की कृषि इकाई की कमान: बीज आलू, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, हाईफार्म पाठशाला और उत्तर गुजरात में डिजिटल खेती।
टेक्निको (आईटीसी) · मुख्य कार्यकारी अधिकारीटेक्नीट्यूबर वाली बीज आलू तकनीक कंपनी की कमान संभाली।
मॉनसेंटोएग्री बायोटेक्नोलॉजी और बीज में नेतृत्व की भूमिकाएँ।
लिंक्डइन पर सौंदरराजन एस से जुड़ें

यह लेख हाईफार्म के सीईओ सौंदरराजन एस का है और 27 अक्टूबर 2026 को केन्या में वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में उनकी प्रस्तुति पर आधारित है। हाईफार्म (HyFun Agrilink Private Limited) इंडियन पोटैटो का पार्टनर है। फ़ोटो: हाईफार्म। आलू प्रोसेसिंग की और ख़बरें: प्रोसेसिंग। अंग्रेज़ी में पढ़ें: From Production to Value Creation

साथी किसानों और व्यापारियों से जुड़ेंव्हाट्सऐप ग्रुप पर आलू भाव, मौसम और बाज़ार पर खुलकर चर्चा करें।
ग्रुप जॉइन करें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत हर साल कितना आलू पैदा करता है?
भारत हर साल 6 करोड़ मीट्रिक टन से ज़्यादा आलू पैदा करता है और दुनिया में आलू पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।
हाईफन फूड्स की सालाना उत्पादन क्षमता कितनी है?
हाईफन हर साल 1,10,000 मीट्रिक टन फ्रेंच फ्राइज़, 23,400 मीट्रिक टन पोटैटो स्पेशियलिटीज़ और 16,000 मीट्रिक टन पोटैटो फ्लेक्स बना सकता है, और 50 से ज़्यादा देशों में एक्सपोर्ट करता है।
हाईफन का बीज से शेल्फ़ तक का मॉडल क्या है?
यह एक जुड़ा हुआ बिज़नेस मॉडल है, जो बीज बढ़ाने, किसानों से साझेदारी, वैज्ञानिक खेती, ख़रीद, प्रोसेसिंग और दुनिया के बाज़ारों तक पहुँच को एक साथ जोड़ता है।
हाईफार्म पाठशाला कितने किसानों तक पहुँची है?
खेत पर डेमो, तकनीकी ट्रेनिंग और किसानों के आपस में सीखने के ज़रिए हाईफार्म पाठशाला 6,000 से ज़्यादा किसानों तक पहुँच चुकी है।
ग्लोबल साउथ के लिए पाँच सबक क्या हैं?
छोटे किसानों को जानकारी, तकनीक और बाज़ार से जोड़ना; मज़बूत बीज व्यवस्था और प्रोसेसिंग लायक किस्में; डिजिटल और मौसम के हिसाब से स्मार्ट खेती; प्रोसेसिंग, स्टोरेज और कोल्ड चेन में निवेश; और पैदावार को देश-दुनिया के बाज़ारों से जोड़ना।
हाईफार्महाईफन फूड्सवर्ल्ड पोटैटो कांग्रेसफ्रेंच फ्राइज़प्रोसेसिंग आलूग्लोबल साउथ
लेखक के बारे में
इं
इंडियन पोटैटो डेस्क
डेस्क

भारत की आलू मूल्य शृंखला पर प्राथमिक-स्रोत आधारित रिपोर्टिंग — उत्पादन, भाव, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार। यहाँ हर आँकड़ा किसी सरकारी, संस्थागत या सहकर्मी-समीक्षित स्रोत से जुड़ा होता है।

और पढ़ें

सभी प्रसंस्करण लेख →
भारत में आलू प्रोसेसिंग: खेत से निकले ताज़े आलू टोकरी से बड़े ढेर पर उड़ेले जा रहे हैंप्रसंस्करणभारत के आलू कहाँ जाते हैं: 10 में से 7 सब्ज़ी में, 10 में से 1 अब प्रोसेसिंग में20 अक्टूबर 2026किसी भी आलू से आलू का आटा, सूजी और मिठाई: थोड़े दाग़ी आलू जिन्हें छाँटकर अब भी प्रोसेस किया जा सकता हैप्रसंस्करणकोल्ड स्टोर का आलू फेंकिए मत: 9 उत्पाद जो किसी भी आलू से बनते हैं19 अक्टूबर 2026The Indian Potato Value Chain: Where the Rupee GoesEN · Englishहमारी अंग्रेज़ी साइटThe Indian Potato Value Chain: Where the Rupee Goesindianpotato.com →EN · Englishसाझेदार ज्ञानकोशIndonesia's $1.5B Potato Import Billpotatopedia.com →

♥ पाठकों का सहयोग

आलू के इकलौते मंच को सबके लिए मुफ़्त रखें।

इंडियन पोटैटो सिर्फ़ आलू की बात करता है: मंडी भाव, बीज, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और निर्यात, और इसे पढ़ना सबके लिए मुफ़्त है। हमारा काम आपके काम आता है तो इस पहल में सहयोग करें। आपका हर रुपया खेतों और मंडियों से और ज़्यादा ख़बरें लाने में लगेगा।

हम सहयोग क्यों माँगते हैं →

UPI · कार्ड · नेट बैंकिंग · Razorpay से सुरक्षित