भारत के आलू कहाँ जाते हैं: 10 में से 7 सब्ज़ी में, 10 में से 1 अब प्रोसेसिंग में
भारत का लगभग 10% आलू अब प्रोसेस होता है, 1990 के दशक के आख़िर में यह 1% से भी कम था: 2023 में 60 लाख टन। 70% सब्ज़ी में खाया जाता है, 7–8% बीज के लिए रखा जाता है।

भारत में हर साल लगभग 586 लाख टन आलू पैदा होता है। इसका ज़्यादातर हिस्सा रसोई में सब्ज़ी बनकर ख़त्म होता है। बढ़ता हुआ हिस्सा अब चिप्स, फ्राइज़ और फ़्लेक्स की फ़ैक्टरियों में जाता है, कुछ अगले सीज़न के बीज के लिए रखा जाता है, और बहुत थोड़ा देश से बाहर जाता है। यहाँ जानिए फ़सल किस काम आती है, और भारत में आलू प्रोसेसिंग कितनी तेज़ी से बढ़ रही है।
लगभग 70 ताज़ा सब्ज़ी के रूप में खाए जाते हैं, लगभग 10 चिप्स, फ्राइज़, फ़्लेक्स और दूसरी चीज़ों में प्रोसेस होते हैं, 7–8 बीज के लिए रखे जाते हैं, और लगभग 1 निर्यात होता है। कुछ खुदाई के बाद ख़राब हो जाते हैं।
- लगभग 70ताज़ा खाए जाते हैं: घर में, ढाबों, होटलों और ठेलों पर पकाकर
- लगभग 10प्रोसेस होते हैं: चिप्स, फ़्रेंच फ्राइज़, फ़्लेक्स, आटा, स्टार्च और नमकीन
- 7–8अगली फ़सल के बीज के लिए रखे जाते हैं
- लगभग 6खुदाई के बाद ख़राब: लगभग 5 खेत पर, लगभग 1 और मंडी में
- लगभग 1निर्यात होता है, ताज़ा या फ्राइज़ और फ़्लेक्स बनकर
प्रोसेसिंग का हिस्सा 1990 के दशक के आख़िर में 1% से भी कम था, आज लगभग 10% है। 2023 में भारत की फ़ैक्टरियों और रसोइयों ने 60 लाख टन आलू प्रोसेस किया, 2014 के 30 लाख टन का दोगुना।
भारत के आलू कहाँ जाते हैं?
आलू भारत की सबसे ज़्यादा उगाई जाने वाली सब्ज़ी है। 2024-25 की फ़सल 585.71 लाख टन रही। नीचे का चार्ट दिखाता है कि खेत से निकलने के बाद यह मोटे तौर पर कहाँ जाती है।
भारत की आलू फ़सल का हिस्सा, इस्तेमाल के हिसाब से (मोटा अंदाज़ा)
पट्टियाँ पैमाने के हिसाब से हैं। ये हिस्से गोल किए गए हैं और हर इस्तेमाल की अलग गिनती से आते हैं, इसलिए इनका जोड़ ठीक 100 नहीं बनता।
राज्यवार फ़सल के लिए देखें: 2024-25 में भारत का आलू उत्पादन।
भारत में आलू किस काम आता है?
सबसे पहले, सब्ज़ी
दस में से सात आलू ताज़ा ख़रीदकर पकाए जाते हैं: आलू की सब्ज़ी, दम आलू, पराठे, समोसे, वड़ा पाव, टिक्की। यह ज़्यादातर कारोबार मंडियों और कोल्ड स्टोरों से होकर चलता है और खुला बिकता है।
प्रोसेसिंग
दस में से लगभग एक आलू किसी फ़ैक्टरी या रसोई में जाता है जो उससे कुछ और बनाती है: चिप्स, फ़्रेंच फ्राइज़, हैश ब्राउन, फ़्लेक्स और पाउडर, आटा, स्टार्च, पापड़ और नमकीन।
बीज
7–8% अगली फ़सल लगाने के लिए रखा जाता है। हर खेत में सिफ़ारिश वाली दर से ताज़ा बीज लगाया जाए तो और ज़्यादा चाहिए, हर साल लगभग 67 लाख टन, जैसा हमारा आलू बीज की कमी वाला लेख बताता है।
निर्यात
भारत ने 2025-26 में 4.22 लाख टन ताज़ा आलू विदेश बेचा, ज़्यादातर नेपाल को। फ्राइज़ और फ़्लेक्स भी जोड़ें तो निर्यात सौ में लगभग एक आलू है। यह इतना कम क्यों है, पढ़ें: पाकिस्तान छठे हिस्से की फ़सल से ज़्यादा आलू कैसे भेजता है।
कुछ आलू इनमें से किसी काम तक पहुँचते ही नहीं। खेत पर, खुदाई, छँटाई, पैकिंग, ढुलाई और भंडारण के दौरान हर 100 में से लगभग 5 ख़राब हो जाते हैं। थोक और फुटकर के स्तर पर लगभग 1 और ख़राब होता है। अच्छा भंडारण इसका सबसे बड़ा बचाव है; देखें भारत में आलू का कोल्ड स्टोर कैसे बनाएँ (अंग्रेज़ी)।
भारत में आलू प्रोसेसिंग कितनी तेज़ी से बढ़ रही है?
1990 के दशक के आख़िर में भारत का लगभग कोई आलू प्रोसेसिंग में नहीं जाता था: फ़सल का 1% से भी कम। चिप्स की फ़ैक्टरियाँ गिनी-चुनी थीं, और वे खाने वाली ऐसी किस्मों से काम चलाती थीं जो तलने के लिए नहीं बनी थीं। आज फ़सल का लगभग 10% प्रोसेस होता है।
भारत में प्रोसेसिंग में लगा आलू (लाख टन)
कॉलम की ऊँचाई पैमाने के हिसाब से है। 2018-19 का कॉलम संगठित फ़ैक्टरियों और छोटी, कुटीर और घरेलू प्रोसेसिंग (जैसे सूखे आलू के उत्पाद) में बँटा है।
दस साल से कम में मात्रा दोगुनी हो गई। सिर्फ़ संगठित फ़ैक्टरियाँ 2003 में लगभग 1.25 लाख टन से बढ़कर 2018-19 में लगभग 18 लाख टन तक पहुँचीं। 2018-19 में भारत में प्रोसेस हुए आलू का लगभग 40% इन्हीं में गया; बाक़ी 60% छोटी इकाइयों और घरेलू प्रोसेसिंग से होकर गया।
- फ़सल का कितना प्रोसेस होता है1990 के दशक के आख़िर में 1% से भी कम सेलगभग 10%आज
- प्रोसेस हुआ आलू2014 में 30 लाख टन से60 लाख टन2023 में
- बड़ी प्रोसेसिंग यूनिटेंलगभग 7 से36 से ज़्यादा2023 में
फ़्रोज़न फ्राइज़: आलू प्रोसेसिंग का सबसे तेज़ बढ़ता हिस्सा
भारत का प्रोसेसिंग उद्योग चिप्स से खड़ा हुआ। अब सबसे तेज़ फ़्रोज़न फ़्रेंच फ्राइज़ बढ़ रहे हैं। 2014 में भारत ने लगभग 35,000 टन फ्राइज़ और दूसरे फ़्रोज़न आलू उत्पाद बनाए, ज़्यादातर देश के रेस्तराँ के लिए। 2023 तक यह लगभग 3 लाख टन हो गया, और इसका बड़ा हिस्सा अब विदेश जाता है।
- 35,000 टनफ़्रोज़न आलू उत्पाद 2014 में भारत में बने
- लगभग 3 लाख टनफ़्रोज़न आलू उत्पाद 2023 तक बने
- 2,77,109 टनफ़्रोज़न फ्राइज़ 2025-26 में निर्यात हुए
ये फ्राइज़ कहाँ गए, पढ़ें: वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का फ़्रोज़न फ्राइज़ निर्यात: टॉप 10 देश। फ्राइज़ के अलावा भारत हैश ब्राउन, वेजेज़ और दूसरे फ़्रोज़न स्नैक्स भी बनाता है; देखें फ्राइज़ से आगे फ़्रोज़न आलू उत्पाद (अंग्रेज़ी)। भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा आलू फ़्लेक्स निर्यातक (अंग्रेज़ी) भी है, और एक छोटा आलू स्टार्च उद्योग ज़्यादातर उन आलुओं से चलता है जिन्हें बाक़ी फ़ैक्टरियाँ नहीं लेतीं।
दस में से सिर्फ़ एक आलू ही प्रोसेस क्यों होता है?
भारत का ज़्यादातर आलू घर में पकाने के लिए उगाया जाता है, फ़ैक्टरी में तलने के लिए नहीं। प्रोसेसर कोई भी आलू नहीं ले सकता। उसे चाहिए:
- 1
काफ़ी ड्राई मैटर
20% से ज़्यादा ड्राई मैटर, ताकि चिप्स कुरकुरे निकलें और फ्राइज़ गीले न हों और तेल न पिएँ। ज़्यादातर खाने वाली किस्में इसमें पीछे रह जाती हैं। ज़्यादा पढ़ें: ज़्यादा ड्राई मैटर वाला आलू क्यों ज़रूरी है (अंग्रेज़ी)।
- 2
कम शुगर
रिड्यूसिंग शुगर 100 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम ताज़े आलू से कम। इससे ज़्यादा हो तो चिप्स और फ्राइज़ कड़ाही में भूरे या कड़वे हो जाते हैं। फ़ैक्टरियाँ हर खेप जाँचती हैं; देखें तलने से पहले आलू की शुगर कैसे जाँचें।
- 3
सही किस्म
ICAR-CPRI 1998 से प्रोसेसिंग किस्में बना रहा है: चिप्स और फ़्लेक्स के लिए कुफ़री चिप्सोना-1, चिप्सोना-3, हिमसोना और चिप्सोना-5, फ़्रेंच फ्राइज़ के लिए कुफ़री फ्रायसोना और कुफ़री फ्रायोएम, और कुफ़री चिपभारत-1 (अंग्रेज़ी) जैसी नई किस्में। पूरी सूची भारत की आलू प्रोसेसिंग किस्में (अंग्रेज़ी) में है।
- 4
बुवाई से पहले तय ख़रीदार
प्रोसेसर अपना ज़्यादातर माल किसानों से कॉन्ट्रैक्ट करके लेते हैं, अक्सर बीज और सलाह भी देते हैं। देखें भारत में आलू की कॉन्ट्रैक्ट खेती (अंग्रेज़ी)।
- 5
साल भर सप्लाई
फ़ैक्टरी हर महीने चलती है, पर आलू साल के कुछ ही महीनों में खुदता है। पूरी पकी प्रोसेसिंग फ़सल 8–9 महीने रखी जा सकती है, और ख़रीदार अलग-अलग खुदाई के समय वाले इलाक़ों से भी माल लेते हैं।
प्रोसेसर आलू कहाँ से ख़रीदते हैं, सीज़न दर सीज़न
प्रोसेसिंग वाला आलू वहाँ सबसे अच्छा होता है जहाँ फ़सल के आख़िरी महीने में रातें ठंडी रहती हैं। फ़ैक्टरियाँ अलग-अलग खुदाई वाले तीन इलाक़ों से ख़रीदती हैं, और बाक़ी समय रखा हुआ आलू चलाती हैं।
गहरा रंग: खेत से ख़रीद के मुख्य महीने। हल्का रंग: कुछ इलाक़ों में ख़रीद शुरू। बाक़ी साल रखे हुए आलू से काम चलता है।
हर इलाक़े का अपना ख़तरा है: पश्चिम बंगाल में झुलसा (लेट ब्लाइट), कर्नाटक और महाराष्ट्र के पठार पर बैक्टीरियल विल्ट और झुलसा, मालवा में पाला, और मध्य मैदानों में फ़सल के लिए छोटा समय। यही एक वजह है कि प्रोसेसर उत्तर प्रदेश और असम जैसे नए इलाक़ों में फैलते जा रहे हैं। कुछ ज़िलों में प्रोसेसिंग लगाने के लिए सरकारी मदद भी मिलती है; देखें वे 17 ज़िले जहाँ आलू ODOP है।
भारत में आलू प्रोसेसिंग कितनी बड़ी हो सकती है?
2050 तक लगभग 2.5 करोड़ टन
ICAR-CPRI के लंबे अनुमान के अनुसार 2050 तक प्रोसेसिंग उद्योग को लगभग 2.5 करोड़ टन आलू चाहिए होगा, जो आज के इस्तेमाल का लगभग चार गुना है।
वहाँ तक पहुँचने के लिए 75–90 दिन में पकने और गर्मी झेलने वाली और प्रोसेसिंग किस्में चाहिए, ऐसी किस्में जो कोल्ड स्टोर में शुगर कम रखें, अंकुर रोकने वाले केमिकल पर कम निर्भरता, और भंडारण की सड़न और मिट्टी की बीमारियों पर बेहतर क़ाबू।
किसानों, कोल्ड स्टोरों और प्रोसेसरों के लिए इसका मतलब
किसानों के लिए
कॉन्ट्रैक्ट पर उगाई प्रोसेसिंग किस्म से बुवाई से पहले ही ख़रीदार और भाव तय हो जाता है। शर्त है क्वालिटी: गेट पर ड्राई मैटर और शुगर जाँची जाती है।
कोल्ड स्टोरों के लिए
फ़ैक्टरियों को साल भर आलू चाहिए। जो स्टोर प्रोसेसिंग आलू को सही तापमान पर बिना शुगर बढ़ाए रख सकते हैं, उन्हें पक्का ग्राहक मिलता है।
प्रोसेसरों के लिए
दिक़्क़त माँग की नहीं, कच्चे माल की है। एक से ज़्यादा इलाक़ों से ख़रीदना और जल्दी कॉन्ट्रैक्ट करना ही फ़ैक्टरी को साल भर चलाता है।
नया काम शुरू करने वालों के लिए
आटा, फ़्लेक्स या नमकीन बनाने वाली छोटी यूनिट उन आलुओं से शुरू हो सकती है जिन्हें बड़ी फ़ैक्टरियाँ लौटा देती हैं; देखें कोई भी आलू लेने वाले नौ उत्पाद।
प्रोसेसिंग वाला आलू ख़रीदना या बेचना है?
अपने प्लांट के लिए चिप्स या फ्राइज़ लायक़ आलू चाहिए, या अपनी फ़सल के लिए प्रोसेसर ढूँढ़ रहे हैं? किस्म, मात्रा और महीना बताइए, हम उत्पादकों, कोल्ड स्टोरों और प्रोसेसरों के अपने नेटवर्क से जोड़ देंगे।
आगे पढ़ें
- 2025-26 में भारत का फ़्रोज़न फ्राइज़ निर्यातindianpotato.in
- भारत में आलू बीज की कमीindianpotato.in
- भारत में आलू चिप्स बनाने का कारोबारindianpotato.in
- Where India's Potatoes Go: 7 in 10 Eaten as a Vegetable, 1 in 10 Now Processedindianpotato.com · English
स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस
अपने आलू को जानिए, हर हफ़्ते
भारत के आलू इलाक़ों से प्रोसेसिंग, बीज, भाव और बाज़ार की ख़बरें।



