फ्राइज़ कंपनियाँ कैसे बनती हैं: केन्या और चीन से भारतीय प्रोसेसर के लिए 6 सबक
वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में सेरेनी फ्राइज़, स्नो वैली और फ्रेशक्रॉप ने बताया कि फ्राइज़ का कारोबार फ़ैक्ट्री के बाहर बनता है। भारतीय प्रोसेसर के लिए 6 सबक।

इनसाइट्स: देवेंद्र के · 6 नवंबर 2026
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सीधी बात
केन्या में वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में सेरेनी फ्राइज़ (केन्या), स्नो वैली (चीन) और फ्रेशक्रॉप (केन्या) ने दिखाया कि फ्राइज़ का कारोबार पहले फ़ैक्ट्री के बाहर बनता है: सही प्रोसेसिंग किस्में, कॉन्ट्रैक्ट किसानों का बड़ा नेटवर्क, साल भर आलू रखने वाला स्टोरेज, और रेस्टोरेंट चेन जैसे पक्के ख़रीदार। तीनों छोटे से शुरू हुए और ग्राहकों के साथ बढ़े। भारतीय प्रोसेसर के लिए इनमें छह सबक हैं।
कांग्रेस में ग्लोबल साउथ पर क्या बात हुई?
अक्टूबर 2026 के आख़िर में केन्या की लेक नैवाशा पर हुई 13वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस के पहले दिन एक सत्र ग्लोबल साउथ में आलू प्रोसेसिंग पर था। वक्ताओं ने बताया कि दुनिया के 80% लोग और करीब 70% आलू इन्हीं देशों में हैं, पर आलू व्यापार में इनका हिस्सा सिर्फ़ 30% है। आलू उगाने और प्रोसेस किया माल बेचने के बीच का यही फ़ासला है जहाँ ये कंपनियाँ काम कर रही हैं।
सेरेनी फ्राइज़, केन्या: 30 किलो के ऑर्डर से फ़ैक्ट्री तक
सेरेनी फ्राइज़ · CEO हम्फ़्री म्बुरु
- 2012: बैंक में काम करते हुए हाथ से फ्राइज़ काटना शुरू किया। सबसे बड़ा शुरुआती ऑर्डर नैरोबी के एक होटल के लिए 30 किलो।
- 2013: मई 2013 में बैंक की नौकरी छोड़ी।
- 2021: रेस्टोरेंट चेन के लिए आयातित फ्रोज़न फ्राइज़ कम पड़े, तो फ्रोज़न फ्राइज़ में जाने का फ़ैसला।
- 2024: फ्रोज़न फ्राइज़ लाइन लगी; अब नैवाशा की फ़ैक्ट्री से सप्लाई।
- आज: करीब 3,000 किसानों से आलू; मुख्य किस्में मार्कीज़ और चैलेंजर।
म्बुरु ने कांग्रेस में बताया कि नैवाशा प्लांट को हर महीने 750 टन आलू चाहिए और आगे विस्तार की योजना है। केन्या में ज़्यादातर टेबल किस्में उगती हैं, इसलिए सेरेनी को प्रोसेसिंग किस्मों पर पैसा लगाना पड़ा। उन्होंने स्टोरेज और ढुलाई को सबसे मुश्किल हिस्सा बताया: ज़्यादातर किसान आलू ज़्यादा दिन नहीं रख पाते।
"आलू प्रोसेसिंग उद्योग फ़ैक्ट्री के अंदर नहीं बनता। यह पूरी वैल्यू चेन में बनता है।"
हम्फ़्री म्बुरु, CEO, सेरेनी फ्राइज़, वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026
स्नो वैली, चीन: बड़े पैमाने पर पूरी चेन
स्नो वैली एग्रीकल्चर ग्रुप · झांगजियाकोउ, हेबेई
- 2007: आलू बीज रिसर्च, बीज उत्पादन और खेती सेवाओं की कंपनी के तौर पर शुरुआत।
- 2012: सस्ते बिकते ताज़ा आलू में वैल्यू जोड़ने के लिए फ़ूड बिज़नेस शुरू।
- 2024 तक: हेबेई, निंगशिया और जियांगसू में तीन प्रोसेसिंग बेस।
- आज: कंपनी के मुताबिक़ सात फ्रोज़न लाइनें, अपनी ब्रीडिंग की 80 से ज़्यादा किस्में और लाइनें, 7 लाख टन का स्टोरेज, 40 से ज़्यादा देशों में निर्यात।
स्नो वैली के एलन वांग ने कांग्रेस में बताया कि कंपनी 25,000 हेक्टेयर से हर साल 6 लाख टन आलू संभालती है, और अब फ्राइज़ के साथ वैफ़ल फ्राइज़ और फ्रोज़न मैश भी बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत जैसी ही ताक़तें चीन में भी काम कर रही हैं: शहरों में ज़्यादा लोग और रेडी-टू-ईट व रेस्टोरेंट खाने की बढ़ती माँग। उनके मुताबिक़ 2030 तक चीन की फ्रोज़न आलू उत्पाद क्षमता करीब 20 लाख टन हो सकती है।
फ्रेशक्रॉप, केन्या: बीज से अपने चिप्स कारोबार तक
फ्रेशक्रॉप लिमिटेड · नकुरु
- शुरुआत: क्रिस गैस्पेरी ने 4 एकड़ के खेत से शुरुआत की, पड़ोसियों के साथ दलालों को छोड़कर सीधे बाज़ार में बेचा।
- मुश्किल: सर्टिफ़ाइड बीज नहीं मिला, किसानों ने आपस में बीज बाँटा, और सिस्ट नेमाटोड फैल गया। यहीं से साफ़ बीज की ज़रूरत समझ आई।
- 2019: क्रिस और एशली ने टिश्यू कल्चर से सर्टिफ़ाइड बीज के इर्द-गिर्द फ्रेशक्रॉप बनाया।
- आज: फ्रेशक्रॉप (बीज), फ्रेशवेट (इनपुट और सलाह) और फ्रेशचिप्स, जो किसानों के आलू से रेस्टोरेंट-होटल के लिए कटे चिप्स बनाता है, ख़रीद की गारंटी के साथ।
कांग्रेस में फ्रेशक्रॉप का नेटवर्क 15,000 छोटे किसानों का बताया गया। कंपनी ने इस साल फ्रेश फ्राई प्रोसेसिंग लाइन लगाई और उसके पास 100 पक्के और 500 कैज़ुअल कर्मचारी हैं।
भारतीय प्रोसेसर के लिए छह सबक
भारत में फ्राइज़ उद्योग बड़ा है और बढ़ रहा है; अब करीब दस में से एक आलू प्रोसेसिंग में जाता है, जैसा हमने भारत का आलू कहाँ जाता है में बताया। फिर भी इन तीन कहानियों में नए और मझोले प्रोसेसर के लिए साफ़ सबक हैं।
- छोटे से शुरू करें, एक ख़रीदार के साथ बढ़ें। सेरेनी 30 किलो के ऑर्डर से और फ्रेशक्रॉप 4 एकड़ से शुरू हुई। होटल-रेस्टोरेंट को सप्लाई करने वाली छोटी फ्रेश-कट यूनिट फ्रोज़न लाइन से पहले काम सीखने का अच्छा तरीक़ा है।
- फ़ैक्ट्री से पहले किस्म तय करें। सेरेनी मार्कीज़ और चैलेंजर पर चलती है, स्नो वैली अपनी किस्में ब्रीड करती है। भारत में ICAR-CPRI की कुफ़री फ्राइसोना और मार्कीज़ जैसी किस्में फ्राइज़ के काम आती हैं। फ्राई क्वालिटी पहले ही परखें: CPRI का आसान शुगर टेस्ट।
- ख़रीद के वादे के साथ किसान जोड़ें। फ्रेशचिप्स किसानों को ख़रीद की गारंटी देता है, सेरेनी 3,000 किसानों से ख़रीदती है। बुवाई से पहले किसान, बीज, सलाह और ख़रीद की शर्तें तय हों तो सप्लाई पक्की रहती है।
- स्टोरेज को प्लांट का हिस्सा मानें। फ्राइज़ लाइन साल भर चलती है, तो आलू सही तापमान पर अच्छे से रखना ज़रूरी है। स्नो वैली ने 7 लाख टन का स्टोरेज बनाया।
- रेस्टोरेंट चेन की माँग देखें। सेरेनी फ्रोज़न फ्राइज़ में तब गई जब रेस्टोरेंट चेन को लोकल सप्लायर चाहिए था। भारत में भी रेस्टोरेंट और घर के फ़्रीज़र, दोनों माँग बढ़ा रहे हैं।
- बीज अपने हाथ में रखें। फ्रेशक्रॉप के चिप्स उसके अपने टिश्यू कल्चर बीज पर टिके हैं, और स्नो वैली बीज कंपनी के तौर पर शुरू हुई। साफ़ बीज से ही प्रोसेसिंग आलू का साइज़ और क्वालिटी एक जैसी रहती है।
म्बुरु और वांग दोनों ने कहा कि वे विदेशी पार्टनर और निवेश के लिए खुले हैं। भारतीय मशीन बनाने वालों, बीज कंपनियों और फ्राइज़ प्रोसेसर के लिए केन्या और चीन, दोनों में काम के मौक़े हैं।
स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस



