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मंडी एवं व्यापार

पाकिस्तान भारत से डेढ़ गुना आलू कैसे बेचता है, जबकि उसकी फ़सल हमारी छठा हिस्सा है

अप्रैल 2025 से मार्च 2026 में पाकिस्तान ने 6.40 लाख टन ताज़ा आलू बाहर बेचा, भारत ने 4.22 लाख टन। पाकिस्तान की फ़सल भारत की करीब छठा हिस्सा है। ख़रीदार, सरहद और रुझान।

देवेंद्र कुमार झा · 19 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
पाकिस्तान बनाम भारत आलू निर्यात: खेत में जंबो बैग में भरा आलू ट्रक पर लादा जा रहा है
ताज़ा आलू का निर्यात, बीज नहींअप्रैल 2025 से मार्च 2026
पाकिस्तान
निर्यात6.40 लाख टन
पैदावार, 2024-25 फ़सल100.1 लाख टन
भारत
निर्यात4.22 लाख टन
पैदावार, 2024-25 फ़सल585.71 लाख टन

अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पाकिस्तान ने 6.40 लाख टन ताज़ा आलू निर्यात किया, भारत ने 4.22 लाख टन। यानी पाकिस्तान ने करीब डेढ़ गुना आलू बाहर भेजा। वह भी 2024-25 की सिर्फ़ 100.1 लाख टन की फ़सल से, जबकि भारत की फ़सल 585.71 लाख टन थी। अक्सर जो "दोगुना" कहा जाता है, वह सिर्फ़ कैलेंडर साल 2025 पर सही बैठता है।

छोटी फ़सल, बड़ा निर्यात

भारत दुनिया में आलू उगाने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है, और यहाँ निकला लगभग हर टन आलू देश में ही खाया, स्टोर किया या प्रोसेस किया जाता है। पाकिस्तान में उल्टा है। उसकी 2024-25 की फ़सल 3.87 लाख हेक्टेयर में 100.1 लाख टन थी, भारत के 585.71 लाख टन की करीब छठा हिस्सा, और उसमें से कहीं ज़्यादा हिस्सा देश से बाहर जाता है।

दोनों देशों में मुख्य फ़सल ज़्यादातर साल के शुरुआती महीनों में खुदती है, इसलिए अप्रैल से मार्च का साल ठीक तुलना देता है: दोनों जगह अप्रैल 2025 से मार्च 2026 में बाहर गया आलू ज़्यादातर 2025 की शुरुआत में खुदी फ़सल का था।

पैदावार, एक ही पैमाने परनिर्यात, बड़े पैमाने पर

पाकिस्तान: 16 में से करीब 1 टन

2024-25 की फ़सल का करीब 6.4% ताज़ा आलू के रूप में बाहर गया।

भारत: 140 में से करीब 1 टन

2024-25 की फ़सल का करीब 0.7% ताज़ा आलू के रूप में बाहर गया।

पूरी कहानी इसी एक फ़र्क़ में है। पाकिस्तान के किसान देश की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा आलू उगाते हैं, और बचा हुआ माल निर्यात से निकलता है। सिर्फ़ 2024-25 में ही वहाँ आलू का रकबा 14.2% बढ़ा। भारत का निर्यात, इसके उलट, एक ऐसी फ़सल का पतला सा किनारा है जो लगभग पूरी देश में ही बिकती है।

खुदाई के बाद खेत में आलू के ढेर, पास में जंबो बैग और ट्रक: निर्यात के माल का पहला कदम
खेत से ट्रक तक: खेत के ढेर जंबो बैग में भरे जाते हैं और उसी दिन लाद दिए जाते हैं। फ़ोटो भारत के एक आलू खेत की है।

किसका आलू कहाँ जाता है

दोनों देशों के कुछ ख़रीदार एक जैसे हैं, पर दोनों का व्यापार अलग ढंग का है। पाकिस्तान के तीन सबसे बड़े बाज़ारों ने उसके निर्यात का करीब तीन-चौथाई लिया; भारत के अकेले सबसे बड़े बाज़ार ने उसके आधे से ज़्यादा आलू ख़रीदे।

देशपाकिस्तान से (टन)भारत से (टन)
अफ़ग़ानिस्तान2,33,396–
नेपाल–2,41,177
श्रीलंका1,20,35911,613
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)1,19,12014,173
क़तर38,020–
मलेशिया36,30818,559
ओमान28,56853,380
कज़ाख़स्तान27,100–
इंडोनेशिया–43,854
वियतनाम–10,735
बाक़ी सभी देश36,87928,127
कुल6,39,7504,21,618

ताज़ा या ठंडा किया आलू, बीज छोड़कर, अप्रैल 2025 से मार्च 2026, टन में। डैश का मतलब है कि वह देश उस निर्यातक के लिए अलग से दर्ज नहीं है और "बाक़ी सभी देश" में शामिल है। स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस।

तीन बाज़ार सबसे अलग दिखते हैं। श्रीलंका ने भारत के मुक़ाबले पाकिस्तान से दस गुना आलू ख़रीदा। यूएई ने आठ गुना से ज़्यादा। मलेशिया ने करीब दोगुना। ओमान में भारत आगे है और इंडोनेशिया में मज़बूत है, जहाँ पाकिस्तान का नाम ख़रीदारों में है ही नहीं। इनमें से एक बाज़ार की पूरी कहानी पढ़ें: श्रीलंका को भारत का आलू निर्यात।

दोनों का व्यापार एक ही सरहद पर टिका है

पाकिस्तान का सड़क वाला बाज़ारअफ़ग़ानिस्तान

2,33,396 टन, साल भर में पाकिस्तान के निर्यात का करीब 36%, जबकि आधे साल सरहद बंद रही।

भारत का सड़क वाला बाज़ारनेपाल

2,41,177 टन, भारत के निर्यात का करीब 57%, पिछले साल के लगभग बराबर।

दोनों देश अपना ज़्यादातर आलू सड़क के रास्ते एक पड़ोसी को बेचते हैं, और इस साल इसका ख़तरा सामने आ गया। दोनों देशों के बीच राजनीतिक झगड़े के बाद अफ़ग़ानिस्तान की सरहद अक्टूबर 2025 से बंद है। सबसे बड़ा ख़रीदार कटने पर पाकिस्तान के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय ने फ़रवरी 2026 में कहा कि सरहद बंद होने से देश में आलू ज़्यादा बच गया और भाव गिर गए, और उसने पाकिस्तानी आलू के लिए 36 देशों को नए बाज़ार के रूप में चुना है।

नेपाल पर भारत की निर्भरता भी इसी तरह का जोखिम है, बस अब तक सरहद बंद नहीं हुई। एक सरहद पर बड़ा और लगातार व्यापार सस्ता पड़ता है, पर इसी से भारत के निर्यात का औसत भाव भी नीचे रहता है; इस पर हमने भारत और नेपाल के आलू व्यापार में लिखा है।

खुदाई के बाद खेत में सफ़ेद छिलके वाले आलू का ढेर, जैसा आलू दक्षिण एशिया में बिकता है
खुदाई के बाद हल्के छिलके वाला खाने का आलू। पाकिस्तान का ज़्यादातर ताज़ा आलू निर्यात सफ़ेद छिलके वाली किस्मों का होता है। फ़ोटो भारत के एक आलू खेत की है।

फ़र्क़ इस पर निर्भर है कि आप कौन सा साल देखते हैं

यह कहना कि पाकिस्तान "दोगुना" आलू बेचता है, ग़लत नहीं है, बस वह दूसरे साल का आंकड़ा है। पाकिस्तान का निर्यात कैलेंडर साल 2025 में सबसे ऊपर था, जब अफ़ग़ान व्यापार साल के ज़्यादातर हिस्से में खुला था, और उसके बाद से गिरा है।

अप्रैल 2024 से मार्च 2025डेढ़ गुना7.54 लाख टन बनाम 5.14 लाख टन
अप्रैल 2025 से मार्च 2026डेढ़ गुना6.40 लाख टन बनाम 4.22 लाख टन
कैलेंडर साल 2025करीब दोगुना8.48 लाख टन बनाम 4.13 लाख टन
मई 2026 तक के 12 महीने1.2 गुना5.02 लाख टन बनाम 4.20 लाख टन

पाकिस्तान का निर्यात अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के 7.54 लाख टन से गिरकर एक साल बाद 6.40 लाख टन रह गया। भारत का भी गिरा, 5.14 लाख टन से 4.22 लाख टन। मई 2026 तक के 12 महीनों में, जिनमें से आठ महीने अफ़ग़ान सरहद बंद रही, पाकिस्तान की बढ़त घटकर 5.02 लाख टन बनाम भारत के 4.20 लाख टन रह गई।

सस्ते में बेचकर नहीं जीता

पाकिस्तान ने इस दौरान यह माल भारत से बहुत सस्ता बेचकर नहीं जीता। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 में उसके आलू निर्यात से करीब ₹1,178 करोड़ आए, लगभग ₹18.4 किलो; भारत के निर्यात से करीब ₹740 करोड़, लगभग ₹17.5 किलो। दोनों एक ही तरह का माल बेच रहे हैं, थोक में ताज़ा खाने का आलू, ऐसे ख़रीदारों को जो भाव देखकर ख़रीदते हैं। भारत का भाव नीचे क्यों रहता है, यह पढ़ें: निर्यात किए आलू पर भारत को किलो पर कितना मिलता है।

पाकिस्तान के निर्यात की रकम अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के यूरो के औसत भाव पर रुपये में बदली गई है।

भारत से आलू ख़रीदना है, या खाड़ी और श्रीलंका में बेचना है?

इंडियन पोटैटो भारत के आलू इलाक़ों के किसानों, पैकरों और निर्यातकों के साथ काम करता है। किस्म, साइज़, मात्रा और बंदरगाह बताइए, हम आपको सही लोगों से जोड़ेंगे।

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भारत का आलू निर्यात पाकिस्तान से क्या सीख सकता है

  1. 1

    ख़रीदार पास में ही हैं

    श्रीलंका, यूएई, क़तर और मलेशिया ने साल भर में पाकिस्तान से मिलकर 3 लाख टन से ज़्यादा आलू ख़रीदा। श्रीलंका, यूएई और मलेशिया पहले से भारतीय आलू के ख़रीदार हैं, और चारों भारत के पश्चिमी और दक्षिणी बंदरगाहों से समुद्र के छोटे रास्ते पर हैं।

  2. 2

    ज़्यादा फ़सल को खुदाई से पहले बाज़ार चाहिए

    2024-25 में पाकिस्तान का बढ़ा रकबा सबसे बड़ा ख़रीदार बंद होते ही सरप्लस बन गया। भारत के किसान भी इसी जाल में फँसते हैं जब बड़ी फ़सल और भरे कोल्ड स्टोर एक साथ आते हैं; खुदाई से पहले तय निर्यात ख़रीदार इससे निकलने का एक रास्ता है।

  3. 3

    एक सरहद यानी एक कमज़ोर कड़ी

    पाकिस्तान ने यह एक ही सीज़न में सीख लिया। भारत अपने ताज़ा आलू निर्यात का आधे से ज़्यादा नेपाल भेजता है; इसमें से जितना माल दूसरे बाज़ार ढूँढ़ ले, व्यापार उतना सुरक्षित।

  4. 4

    भाव ग्रेड और काग़ज़ तय करते हैं

    थोक का खाने वाला आलू, जो भी भेजे, बाज़ार भाव पर ही बिकता है। अगला कदम है पक्का निर्यात ग्रेड, हर ख़रीदार के लिए सही किस्म, और हर बाज़ार के माँगे पौध-स्वास्थ्य काग़ज़। इसका बीज वाला पहलू हमने भारत बीज आलू निर्यात क्यों नहीं करता में समझाया है।

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स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पाकिस्तान भारत से ज़्यादा आलू निर्यात करता है?
हाँ। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पाकिस्तान ने 6.40 लाख टन ताज़ा आलू निर्यात किया और भारत ने 4.22 लाख टन, यानी पाकिस्तान ने करीब डेढ़ गुना आलू बाहर भेजा।
क्या यह सच है कि पाकिस्तान भारत से दोगुना आलू निर्यात करता है?
सिर्फ़ कैलेंडर साल 2025 के लिए, जब पाकिस्तान ने 8.48 लाख टन और भारत ने 4.13 लाख टन आलू भेजा। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के साल में फ़र्क़ करीब डेढ़ गुना था, और मई 2026 तक के 12 महीनों में करीब 1.2 गुना।
पाकिस्तान भारत के मुक़ाबले कितना आलू उगाता है?
2024-25 में पाकिस्तान ने 3.87 लाख हेक्टेयर में 100.1 लाख टन आलू उगाया। भारत में अंतिम अनुमान के अनुसार 585.71 लाख टन आलू हुआ। पाकिस्तान की फ़सल भारत की करीब छठा हिस्सा है।
पाकिस्तान का आलू कौन से देश ख़रीदते हैं?
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 में पाकिस्तान के सबसे बड़े ख़रीदार थे: अफ़ग़ानिस्तान (2,33,396 टन), श्रीलंका (1,20,359 टन), यूएई (1,19,120 टन), क़तर (38,020 टन), मलेशिया (36,308 टन), ओमान (28,568 टन) और कज़ाख़स्तान (27,100 टन)।
भारत का आलू कौन से देश ख़रीदते हैं?
अप्रैल 2025 से मार्च 2026 में भारत के ताज़ा आलू के सबसे बड़े ख़रीदार थे: नेपाल (2,41,177 टन, कुल का करीब 57%), ओमान (53,380 टन), इंडोनेशिया (43,854 टन), मलेशिया (18,559 टन), यूएई (14,173 टन), श्रीलंका (11,613 टन) और वियतनाम (10,735 टन)।
पाकिस्तान का आलू निर्यात क्यों गिरा?
मुख्य वजह यह है कि पाकिस्तान का सबसे बड़ा आलू बाज़ार, अफ़ग़ानिस्तान की सरहद, अक्टूबर 2025 से बंद है। पाकिस्तान का निर्यात अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के 7.54 लाख टन से गिरकर अप्रैल 2025 से मार्च 2026 में 6.40 लाख टन रह गया।
भारत अपनी आलू फ़सल का कितना हिस्सा निर्यात करता है?
करीब 0.7%, यानी 2024-25 की फ़सल के हर 140 टन में से करीब एक टन, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 में ताज़ा आलू के रूप में बाहर गया। पाकिस्तान ने अपनी फ़सल का करीब 6.4%, यानी हर 16 टन में करीब एक टन, बाहर भेजा।
आलू निर्यातपाकिस्तानभारतअफ़ग़ानिस्ताननेपालश्रीलंकाआलू व्यापार
लेखक के बारे में
देवेंद्र कुमार झा
देवेंद्र कुमार झा
आलू उद्योग इंटेलिजेंस विशेषज्ञ

इंडियन पोटैटो के संस्थापक एवं निदेशक — आलू पर भरोसेमंद जानकारी (पोटैटो इंटेलिजेंस) और आलू से जुड़े हितधारकों का समुदाय खड़ा करने को समर्पित मंच। कृषि अभियांत्रिकी में बी.टेक; आलू के क्षेत्र के जानकार और इसके प्रति गहरा लगाव रखने वाले।

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