महिलाएँ कैसे चला रही हैं आलू बीज हब: एपिकल रूटेड कटिंग से कमाई
हरियाणा, कर्नाटक, मेघालय और पश्चिम बंगाल में महिलाएँ आलू की रूटेड कटिंग उगाकर कमा रही हैं। CIP की डॉ. पूजा पांडे ने वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में बताया कि यह बीज हब कैसे चलता है।

सीधी बात
भारत में महिलाएँ आलू की एपिकल रूटेड कटिंग (ARC) उगाकर कमा रही हैं। ये टिश्यू कल्चर के बीमारी-मुक्त पौधों की जड़ वाली टहनियाँ हैं, जो दूर से ट्रक में आने वाले बीज आलू की जगह लेती हैं। इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) की डॉ. पूजा पांडे ने वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में बताया कि 2021 में भारत सरकार की मदद से शुरू हुआ उनका बीज हब ग़रीब किसानों, ख़ासकर महिलाओं, तक ये कटिंग पहुँचाता है।
यह योजना हरियाणा, कर्नाटक, मेघालय और पश्चिम बंगाल में चलती है। महिलाएँ कटिंग देकर कमाती हैं और किसानों को अच्छा बीज मिलता है।
डॉ. पूजा पांडे ने कांग्रेस में क्या बताया
13वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस अक्टूबर 2026 के आख़िर में केन्या की लेक नैवाशा पर हुई। 2026 संयुक्त राष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष है, इसलिए कांग्रेस का एक बड़ा सत्र आलू में महिलाओं पर था। डॉ. पूजा पांडे इसकी वक्ता थीं।
परिचय
- नाम
- डॉ. पूजा पांडे
- पद
- सीनियर रिसर्च एसोसिएट, इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP)
- कहाँ
- हरियाणा
- पढ़ाई
- हॉर्टिकल्चर में PhD (2018), जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर
- CIP में
- 2019 से
- काम
- किसानों की पसंद की आलू किस्में परखना और बीज के नए तरीक़े फैलाना, ताकि हरियाणा अपना अच्छा बीज ख़ुद उगा सके
अपनी बात में उन्होंने बताया कि 2021 में भारत सरकार की मदद से एक आलू बीज हब शुरू हुआ। यह ग़रीब और पिछड़े किसानों, जिनमें बहुत-सी महिलाएँ हैं, तक एपिकल रूटेड कटिंग पहुँचाता है। महिलाएँ कटिंग सप्लाई करके कमाती हैं, और जो किसान इन्हें लगाते हैं उन्हें अच्छा बीज मिलता है।
बीज हब कहाँ चल रहे हैं: चार राज्य
मेघालय में CIP की ट्रेनिंग में ऐसी महिलाएँ भी हैं जो खेत मज़दूरी छोड़कर बीज बनाने लगीं और अब दूसरी महिलाओं को सिखाती हैं। बीज हब के लिए बड़ा खेत नहीं, थोड़ी ढकी जगह और सधे हुए हाथ चाहिए।
एपिकल रूटेड कटिंग क्या है, क़दम दर क़दम
आम तौर पर आलू बीज आलू (कंद) से लगता है। रूटेड कटिंग में कंद की जगह एक छोटा पौधा लगता है। नर्सरी टिश्यू कल्चर के एक साफ़ पौधे से शुरू होती है और उसकी ऊपरी टिप बार-बार काटती है। हर बार काटने पर नई टहनियाँ निकलती हैं, और हर नई टिप एक और कटिंग बन जाती है। ICAR-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI) अपने ऊटी केंद्र पर यही तरीक़ा अपनाता है।
- साफ़ पौधाटिश्यू कल्चर का बीमारी-मुक्त पौधा, करीब 15 दिन का।
- मदर बेडढकी जगह में कोकोपीट बेड पर 5 सेमी की दूरी पर लगाएँ।
- टिप काटनापहली कटाई 15 दिन पर, फिर हर 3 दिन पर, करीब पाँच महीने तक।
- ट्रे में जड़हर टिप कोकोपीट ट्रे में करीब 15 दिन में जड़ पकड़ती है।
- खेत में लगानानेट हाउस या खेत में हर कटिंग से छोटे बीज आलू का गुच्छा बनता है।
कटिंग से बने छोटे बीज आलू एक-दो सीज़न खेत में और बढ़ाए जाते हैं, फिर आम किसानों का बीज बनते हैं। कटिंग साफ़ पौधे से और ढकी जगह में बनती है, इसलिए उसमें वो वायरस नहीं होते जो साल-दर-साल बचाए गए बीज में जमा होते जाते हैं। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें: आलू में एपिकल रूटेड कटिंग: दक्षिण भारत अपना बीज कैसे उगाए और भारत में आलू बीज की कमी।
बीज हब महिलाओं के लिए क्यों ठीक बैठता है
डॉ. पांडे ने योजना पर मिले फ़ीडबैक की चार बातें बताईं:
कोई महिला या समूह बीज हब कैसे शुरू करे
इन हब के लिए कोई एक राष्ट्रीय फ़ॉर्म नहीं है। लोग आम तौर पर इन रास्तों से जुड़ते हैं:
- पहले किसी नर्सरी में काम करें: टिप काटना, ट्रे भरना, पौधों को स्वस्थ रखना। काम सीखने का यही सबसे तेज़ तरीक़ा है।
- ट्रेनिंग लें: ICAR-CPRI शिमला और अपने क्षेत्रीय केंद्रों पर टिश्यू कल्चर और ARC की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देता है, जिसमें शिलांग में पाँच दिन का ARC कोर्स भी है। अपने पास के CPRI केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र से अगला बैच पूछें।
- समूह में काम करें: सेल्फ़ हेल्प ग्रुप या FPO मिलकर एक पॉलीहाउस या नेट हाउस चला सकते हैं, रोज़ की देखभाल बाँट सकते हैं और साथ में बेच सकते हैं। मेघालय वाले समूह ने 200 वर्ग मीटर के नेट हाउस में कटिंग उगाईं।
- साफ़ पौधे ही ख़रीदें: पूरा तरीक़ा बीमारी-मुक्त टिश्यू कल्चर पौधों पर टिका है। इन्हें ICAR-CPRI या लाइसेंस वाली जगह से ही लें।
- लगाने से पहले ख़रीदार तय करें: आसपास के बीज उत्पादक, FPO या राज्य बीज योजना कटिंग या छोटे बीज आलू ले सकते हैं। किस्म और तारीख़ पहले तय कर लें।
2026: अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया है, और FAO इसकी अगुवाई कर रहा है। FAO के मुताबिक़ 2023 में दुनिया की खेती और खाद्य से जुड़ी 42% नौकरियाँ महिलाओं के पास थीं, फिर भी एक जैसे खेत पर ज़मीन की पैदावार में 24% का फ़र्क़ है। बीज हब इस फ़र्क़ का एक जवाब है: जिस महिला के पास ज़मीन नहीं, वह भी नर्सरी चलाकर कमा सकती है।
कांग्रेस की और ख़बरें: नैवाशा में भारत का मंच (अंग्रेज़ी में)।
स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस
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