भारत ने दो नई आलू किस्में अधिसूचित कीं — कुफरी अभेद्य और कुफरी रूबी
भारत सरकार ने 8 जुलाई 2026 को ICAR-CPRI की दो नई आलू किस्में — कुफरी अभेद्य (लेट ब्लाइट व PCN प्रतिरोधी) और कुफरी रूबी (बेबी पोटैटो) — अधिसूचित कीं।

भारत सरकार ने ICAR-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला की दो नई आलू किस्मों — कुफरी अभेद्य और कुफरी रूबी — को खेती के लिए अधिसूचित कर दिया है। यह अधिसूचना 8 जुलाई 2026 को Gazette of India में प्रकाशित हुई, जिसकी घोषणा PIB शिमला ने 20 जुलाई को की।
अधिसूचना का मतलब क्या है
अधिसूचना के बाद ही किसी किस्म का प्रमाणित बीज उसके अनुशंसित क्षेत्रों में उत्पादित, प्रमाणित और बेचा जा सकता है। इससे पहले किसानों के पास प्रामाणिक, रोग-मुक्त बीज का कोई सुनिश्चित स्रोत नहीं होता। ब्रीडर और फाउंडेशन बीज अब प्रमाणीकरण तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे देश भर में आलू उत्पादन, रोग प्रबंधन और किसानों के लिए बेहतर बाज़ार अवसर बढ़ेंगे।
कुफरी अभेद्य — पहाड़ी इलाकों की दोहरी सुरक्षा
कुफरी अभेद्य मध्यम अवधि (110–120 दिन) की टेबल आलू किस्म है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता लेट ब्लाइट और पोटैटो सिस्ट नेमाटोड (PCN) — दोनों के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता है। ICAR-CPRI के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में आलू उत्पादन को प्रभावित करने वाले इन दोनों प्रमुख जैविक ख़तरों के प्रति प्रतिरोधी यह देश की पहली उच्च-उपज किस्म है। इससे किसानों की कीटनाशकों पर निर्भरता घटेगी, लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके पीले छिलके, गुलाबी छींटों वाले आकर्षक कंद और क्रीम रंग का गूदा इसे टेबल उपयोग के लिए उपयुक्त बनाते हैं।
यह किस्म हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों के पर्वतीय क्षेत्रों, तमिलनाडु के नीलगिरि क्षेत्र तथा कर्नाटक और महाराष्ट्र के पठारी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित है।
कुफरी रूबी — बेबी पोटैटो बाज़ार के लिए बनी किस्म
कुफरी रूबी को खासतौर पर मैदानी क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ रही बेबी पोटैटो बाज़ार की माँग को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसके लगभग 60% कंद महज़ 90 दिनों में बेबी आलू के आकार तक पहुँच जाते हैं — यानी किसान कम समय में प्रीमियम ताज़ा बाज़ार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और होटल-आतिथ्य क्षेत्र के लिए आपूर्ति कर सकते हैं।
यह किस्म हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के लिए अधिसूचित की गई है।
दोनों किस्में एक नज़र में
| विशेषता | कुफरी अभेद्य | कुफरी रूबी |
|---|---|---|
| अवधि | 110–120 दिन | मध्यम अवधि |
| उपज | 25–30 ट/हे (खरीफ़) | 23–25 ट/हे |
| प्रमुख गुण | लेट ब्लाइट + PCN प्रतिरोध | 90 दिन में 60% बेबी पोटैटो |
| उपयुक्त बाज़ार | टेबल आलू, पहाड़ी क्षेत्र | बेबी पोटैटो, ताज़ा बाज़ार, प्रसंस्करण |
हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष महत्व
आलू हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नकदी फ़सलों में से एक है और हज़ारों पर्वतीय किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है। — डॉ. बृजेश सिंह, निदेशक, ICAR-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (PIB शिमला के अनुसार)
CPRI निदेशक डॉ. बृजेश सिंह के अनुसार, यह अधिसूचना भारत की जलवायु-अनुकूल, रोग-प्रतिरोधी और बाज़ार की माँग के अनुरूप आलू किस्में विकसित करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इससे देश की गुणवत्तायुक्त बीज प्रणाली मज़बूत होगी, उन्नत तकनीकों का प्रसार तेज़ होगा, और किसानों की उत्पादकता व आमदनी दोनों बढ़ेगी।
ICAR-CPRI की अन्य हाल की किस्मों के लिए कुफरी गंगा, नीलकंठ, अग्नि और शक्ति देखें, और देश भर के ताज़ा मंडी भाव के लिए आलू भाव।


