आलू प्लांटर मशीन: भारत में मिलने वाली 11 मशीनें, कीमत, ट्रैक्टर और सब्सिडी
भारत में 11 आलू प्लांटर बिक रहे हैं — ₹1.25 लाख से ₹7.5 लाख तक। हर मशीन की कतार-दूरी, ट्रैक्टर HP, हॉपर, प्रतिदिन एकड़ और राज्यवार सब्सिडी सीमा एक जगह।

भारत में इस वक़्त 11 आलू प्लांटर बाज़ार में हैं, कीमत ₹1.25 लाख से ₹7.5 लाख — सब्सिडी और GST से पहले। मशीन दो तरह की है: सेमी-ऑटोमैटिक, जिस पर तीन-चार मज़दूर चढ़कर हाथ से कप में बीज डालते हैं और दिन में 3–5 एकड़ बोते हैं; और ऑटोमैटिक, जिसमें कप बेल्ट ख़ुद बीज गिराती है, कोई मशीन पर नहीं चढ़ता, और दिन में 8–14 एकड़ हो जाते हैं। ट्रैक्टर 25 HP से लेकर 4WD वाले 50 HP तक चाहिए।
भारत में मिलने वाली हर आलू प्लांटर मशीन
| मशीन | कतारें और दूरी | ट्रैक्टर | हॉपर | प्रतिदिन क्षमता | कीमत |
|---|---|---|---|---|---|
| शक्तिमान-ग्रिम SGPP-205 (PP205) | 2 कतार · 66–90 सेमी घटती-बढ़ती | 50 HP + 4WD | 500 किलो + 50 किलो खाद प्रति टैंक | 10–12 एकड़/दिन | ₹5.5–7.5 लाख |
| महिंद्रा प्लांटिंगमास्टर पोटैटो+ | 2 कतार · 61 / 66 / 71 / 76 सेमी | 50 HP | 500 किलो + 130 लीटर खाद | क़रीब 1 एकड़/घंटा · लगभग 8 एकड़/दिन | ₹5–6.5 लाख |
| सोनालीका ऑटोमैटिक पोटैटो प्लांटर (और ECO) | 2 कतार | 55–60 HP | 500 किलो | 10–14 एकड़/दिन | ₹4–6 लाख |
| जॉन डियर ग्रीनसिस्टम PP8012 | 2 कतार · 24"–32" | 50 HP+ MFWD | 400 किलो + 80 किलो खाद | कंपनी ने नहीं बताई | ₹5–7 लाख |
| जॉन डियर ग्रीनसिस्टम PP8002 | 2 कतार · 24"–26" या 30"–32" | 45 HP+ MFWD | 240 किलो + 80 किलो खाद | कंपनी ने नहीं बताई | ₹5–7 लाख |
| ईशर IEW-APP-2R-DT | 2 कतार, डिस्क टाइप · 26" / 30" / 32" | 45 HP और ऊपर | 250 किलो | 10–12 एकड़/दिन | ₹2,10,000 |
| ईशर IEW-APP-1B | 48" बेड · 2 बीज लाइन | 45 HP और ऊपर | 250 किलो | 8–10 एकड़/दिन | ₹1,90,000 |
| ईशर IEW-APP-2R | 2 कतार · 26" | 40 HP और ऊपर | 250 किलो | 8–10 एकड़/दिन | ₹1,80,000 |
| अमर 2-कतार ऑटोमैटिक, एक्सपोर्ट मॉडल | 2 कतार · घटती-बढ़ती | कंपनी ने नहीं बताई | कंपनी ने नहीं बताई | 4–5 एकड़/दिन | ₹1,25,000–₹1,50,000 |
| ड्रोली सेमी-ऑटोमैटिक पोटैटो प्लांटर | 2 कतार · 24–27" घटती-बढ़ती | 25 HP और ऊपर | 150 किलो | 3–4 एकड़/दिन · 4 मज़दूर चाहिए | ₹2.5–3.5 लाख |
| स्वराज पोटैटो प्लांटर | कंपनी ने नहीं बताई | 45–55 HP | कंपनी ने नहीं बताई | कंपनी ने नहीं बताई | ₹5.25–6.25 लाख |
स्पेसिफ़िकेशन और प्रतिदिन क्षमता कंपनियों की अपनी प्रकाशित रेटिंग हैं। कीमतें बाज़ार और मौजूदा ख़रीदारों से जुटाई गई हैं, सब्सिडी से पहले और GST अलग।
कीमत के तीन स्तर
शुरुआती स्तर पर क्षेत्रीय इंजीनियरिंग वर्क्स हैं — लुधियाना की अमर (₹1,25,000–₹1,50,000) और मेरठ की ईशर (₹1,80,000–₹2,10,000)। मशीनें काम कर देती हैं; फ़र्क़ पहुँच का है, क्योंकि इनका डीलर नेटवर्क क्षेत्रीय है। पैसा देने से पहले देख लें कि खेत से एक दिन की दूरी में स्टॉकिस्ट है या नहीं।
ऊपरी स्तर ₹4–7.5 लाख का है। एक ही ब्रांड के अंदर इतना अंतर असली है — यह खाद यूनिट, मेड़ बनाने वाले हिस्से, कप सेट और कतार-दूरी के विकल्पों से बनता है, जो ऑर्डर के वक़्त तय होते हैं। इस दाम में बुवाई की सटीकता के साथ पास का डीलर, स्टॉक में पड़े कप-बेल्ट और साल के उन तीन हफ़्तों में फ़ोन उठाने वाला आदमी भी आता है जब मशीन को चलना ही है।
ग्रिम इसी स्तर पर सबसे ज़्यादा खोजा जाता है। जर्मनी वाली GL और GB सीरीज़ का भारत में कोई आधिकारिक आयातक नहीं है। ग्रिम का रास्ता शक्तिमान के साथ अक्टूबर 2019 में गुजरात में बनी शक्तिमान-ग्रिम रूट क्रॉप सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड है, जो राजकोट में भारत के लिए बनी SGPP-205 तैयार करती है।
ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक — असल फ़र्क़ मज़दूरी का है
सेमी-ऑटोमैटिक में मज़दूर मशीन पर चढ़कर चलते-चलते कप में बीज डालते हैं। ड्रोली की 2-कतार मशीन चार आदमियों के हिसाब से बनी है और दिन में 3–4 एकड़ बोती है; अमर का 2-कतार एक्सपोर्ट मॉडल तीन आदमियों पर 4–5 एकड़ करता है, और इसका 4-कतार मॉडल 10–12 एकड़ तक। ये सस्ती हैं और टेढ़े-मेढ़े बीज भी झेल लेती हैं, पर मज़दूरों का ख़र्च हर बुवाई वाले दिन जेब से जाता है — ठीक उन हफ़्तों में जब मज़दूर सबसे कम और सबसे महँगा मिलता है।
ऑटोमैटिक में यह काम कप बेल्ट करती है: बेल्ट पर लगे कप हॉपर में डुबकी लगाकर एक-दो कंद उठाते हैं और तय दूरी पर नाली में गिरा देते हैं। इसे चलाए रखने के दो पुर्ज़े हैं — बेल्ट पर लगा वाइब्रेटर (बेसिक मॉडल में मैकेनिकल, ऊँचे स्पेसिफ़िकेशन में इलेक्ट्रॉनिक), जो फ़ालतू कंद वापस झाड़ देता है ताकि हर कप में एक ही बीज बचे; और बंकर के फ़र्श के नीचे हिलता हुआ ग्रिल, जो बीज को जाम नहीं होने देता। मशीन को दोनों चाहिए। 500 किलो के हॉपर पर भराई क़रीब हर डेढ़ एकड़ पर पड़ती है — दूसरा आदमी इसी के लिए है।
कप बीज के आकार से मिलाकर बनते हैं — सोनालीका के कप 25 से 90 मिमी, जॉन डियर की ग्रीनसिस्टम जोड़ी 25 से 70 मिमी। बीज उस दायरे से बाहर हुआ तो मशीन कितनी भी अच्छी हो, कहीं दो कंद गिरेंगे और कहीं ख़ाली जगह। कीमत पूछने से पहले कप की रेंज पूछें, और कटा बीज बोते हों तो यह भी बता दें।
ट्रैक्टर: HP के अलावा एक नंबर और है
हॉर्सपावर सब देखते हैं, हाइड्रोलिक लिफ्ट क्षमता पर लोग फँसते हैं। 500 किलो हॉपर वाला 2-कतार प्लांटर ख़ाली ही क़रीब एक टन का होता है, और ट्रैक्टर को इसे मेड़ के सिरे पर थ्री-पॉइंट लिंकेज से उठाना पड़ता है। शक्तिमान-ग्रिम SGPP-205 को 4WD वाला 50 HP ट्रैक्टर चाहिए और CAT-II लोअर लिंकेज पर 2,100–2,500 किलो की लिफ्ट क्षमता। 50 HP का 2WD ट्रैक्टर, या 1,700 किलो लिफ्ट वाला 55 HP का ट्रैक्टर, इस शर्त पर खरा नहीं उतरता — भले HP पढ़ने में ठीक लगे।
- 25–40 HP: ड्रोली सेमी-ऑटोमैटिक (25 HP से) और ईशर IEW-APP-2R (40 HP से)।
- 45–55 HP: ईशर के दोनों बड़े मॉडल और स्वराज का प्लांटर।
- 50 HP, 4WD और भारी लिफ्ट: शक्तिमान-ग्रिम SGPP-205, जॉन डियर PP8012 और सोनालीका की ऑटोमैटिक (55–60 HP)।
शॉर्टलिस्ट से पहले तीन नंबर मिला लें: रेटेड हॉर्सपावर, 4WD है या नहीं, और पिछली लिंकेज की लिफ्ट क्षमता — तीसरा ट्रैक्टर की मैनुअल में लिखा होता है और यही सबसे ज़्यादा मशीनें बाहर करता है।
सब्सिडी: केंद्र का नॉर्म और राज्यों की हक़ीक़त
कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (SMAM) के तहत 35 BHP से ऊपर के ट्रैक्टर वाले ऑटोमैटिक आलू प्लांटर पर यही केंद्रीय लागत नॉर्म है। ज़्यादातर राज्य इससे काफ़ी कम देते हैं, और एक बड़ा राज्य इस मशीन को सूची में रखता ही नहीं।
| राज्य | आलू प्लांटर सूची में? | अकेले किसान की सीमा | समूह वाला रास्ता |
|---|---|---|---|
| पश्चिम बंगाल | हाँ — "ऑटोमैटिक पोटैटो प्लांटर" | ₹70,000, 50% पर | फ़ार्म मशीनरी बैंक ₹1,00,000, 80% पर |
| बिहार | हाँ — 35 HP से ऊपर | ₹40,000 सामान्य · ₹50,000 SC/ST/OBC | फ़ार्म मशीनरी बैंक 80% |
| पंजाब | हाँ — ऑटोमैटिक और सेमी-ऑटोमैटिक दोनों | 40% सामान्य · 50% SC/ST, महिला, छोटे-सीमांत | सीमा प्रकाशित नहीं |
| हरियाणा | हाँ — HP की कोई शर्त नहीं | ₹20,000 सामान्य · ₹25,000 SC, छोटे-सीमांत, महिला | योजना पेज पर दर्ज नहीं |
| उत्तर प्रदेश | नहीं — सिर्फ़ आलू खोदने वाली मशीन | उपलब्ध नहीं | फ़ार्म मशीनरी बैंक 80% · कस्टम हायरिंग सेंटर 40% |
| राजस्थान | प्रकाशित यंत्र सूची में नहीं | उपलब्ध नहीं | तय नहीं |
उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे ज़्यादा मायने रखती है, क्योंकि आलू वहीं सबसे ज़्यादा होता है। राज्य की मौजूदा यंत्र बुकिंग सूची में आलू खोदने वाली मशीन है, प्लांटर नहीं — यानी वहाँ अकेला किसान अभी सब्सिडी पर प्लांटर नहीं ले सकता। बचे हुए दो रास्ते फ़ार्म मशीनरी बैंक (80%) और कस्टम हायरिंग सेंटर (40%) हैं, जिनमें प्लांटर अकेले नहीं, एक बड़ी परियोजना की एक लाइन के तौर पर आता है।
एक शर्त हर जगह लागू है: सहायता सिर्फ़ उन्हीं यंत्रों पर मिलती है जिनका परीक्षण फ़ार्म मशीनरी ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट या विभाग के नामित संस्थान से हुआ हो। भरोसा करने से पहले डीलर से उसी मॉडल की टेस्ट रिपोर्ट का हवाला माँग लें।
किस खेत के लिए कौन सी मशीन
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की प्रकाशित पद्धति है: नालियाँ 50–60 सेमी की दूरी पर, साबुत या कटा कंद मेड़ के बीचोंबीच 15–20 सेमी पर, 5–7 सेमी गहराई में; बीज दर गोल किस्मों में क़रीब 600–730 किलो और अंडाकार में 810–1,010 किलो प्रति एकड़। जॉन डियर की 24"–32" और महिंद्रा की 61–76 सेमी रेंज इसी दायरे में हैं; शक्तिमान-ग्रिम की 66–90 सेमी रेंज और 3.5 से 14 इंच की बीज-से-बीज सेटिंग इससे आगे जाती है, क्योंकि वही चेसिस दूसरी फ़सलों के लिए भी बिकता है — ज़्यादा रेंज अपने आप बेहतर नहीं, देखना यह है कि मशीन तय दूरी हर चक्कर में पकड़े रखती है या नहीं। रबी देश के क़रीब 90% आलू का सीज़न है (बुवाई सितंबर मध्य से नवंबर, खुदाई दिसंबर से मार्च), और खिड़की इतनी छोटी होने से ही प्रतिदिन एकड़ का आँकड़ा यहाँ इतना मायने रखता है।
- 5 एकड़ से कम। ख़रीदना कम ही वसूल होता है; कस्टम हायरिंग सेंटर या पड़ोसी की मशीन सस्ती पड़ती है।
- 5–15 एकड़, 25–45 HP ट्रैक्टर। सेमी-ऑटोमैटिक 2-कतार, या ईशर की सबसे छोटी ऑटोमैटिक ₹1,80,000 में, 8–10 एकड़ प्रतिदिन पर काम निपटा देती है।
- 15–50 एकड़। ऑटोमैटिक 2-कतार मशीन बुवाई का पूरा गैंग हटाकर अपना दाम निकाल लेती है।
- 50 एकड़ से ऊपर, 50 HP 4WD और भारी लिफ्ट के साथ। शक्तिमान-ग्रिम, महिंद्रा और सोनालीका इसी बैंड के लिए बनी हैं। दाम लिखवाकर लें, और सब्सिडी लेनी हो तो टेस्टिंग संस्थान का हवाला भी।
पैसा देने से पहले अपनी ही मिट्टी में मशीन चलवाकर देखें। बुवाई की सटीकता स्पेसिफ़िकेशन शीट से नहीं, बोई हुई कतार के 25 फुट खोदकर कंदों के बीच की दूरी नापने से पता चलती है।
बुवाई के समय और तरीक़े के लिए आलू बोने का सही समय और तरीक़ा देखें, उत्पादन की बाक़ी रिपोर्टें, और ताज़ा मंडी भाव के लिए आलू भाव।


