अफ़्रीका में रूटेड कटिंग और TPS आम कैसे हों? WPC 2026 में डॉ. कादियान का जवाब
वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026 के सीड सिस्टम सेशन में डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान (CIP) का मॉडल: नेपाल जैसी TPS नर्सरी, हरियाणा जैसे सस्ते नेट हाउस में रूटेड कटिंग, और FPO से बाज़ार।

चेयरपर्सन ने पैनल से क्या पूछा
अक्टूबर 2026 में केन्या में 13वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस हुई। उसके सीड सिस्टम टेक्निकल सेशन में चेयरपर्सन ने पैनलिस्ट डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान से सवाल किया:
अफ़्रीका के आलू बीज सिस्टम में रूटेड कटिंग और TPS अभी ज़्यादातर प्रोजेक्ट तक ही हैं। क्या कोई ऐसा टिकाऊ मॉडल है जिससे ये आम बीज उत्पादन का हिस्सा बनें, और साथ में बीज की क्वालिटी, किसान का भरोसा और सस्ती क़ीमत भी बनी रहे?
डॉ. कादियान ने बाद में अपना जवाब एक लिखित नोट में भेजा, जो इंडियन पोटैटो को मिला। आगे के तीन हिस्सों में जो लिखा है, वह उनकी राय है, जब तक हम अलग से न बताएँ।
डॉ. कादियान कौन हैं? वे चार दशक से भारत में आलू पर काम कर रहे हैं, और भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में भी। 1983 में वे इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) में एसोसिएट साइंटिस्ट बने। 2018 में रिटायर होने के बाद वे CIP के सीनियर कंसल्टेंट हैं, और ICAR व कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, ओडिशा और मेघालय के प्रोजेक्ट पर काम करते हैं। बीज आलू और TPS की परख उनका ख़ास काम रहा है। 2024 में वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस ने उन्हें ग्लोबल इंडस्ट्री अवॉर्ड दिया। उनके बारे में और: डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान का प्रोफ़ाइल (अंग्रेज़ी में)।
दोनों तकनीकें एक ही दिक़्क़त का हल हैं: साफ़ बीज कम है, महँगा है, और बीज आलू एक सीज़न से दूसरे सीज़न तक बीमारी ढोता है। रूटेड कटिंग टिश्यू कल्चर के साफ़ पौधे की जड़ वाली टिप है। TPS आलू के फल का असली बीज है, जो हल्का होता है और कंद वाली ज़्यादातर बीमारियाँ आगे नहीं ले जाता।
TPS और रूटेड कटिंग अभी प्रोजेक्ट तक क्यों हैं
डॉ. कादियान के मुताबिक़ अफ़्रीका में TPS अभी प्रोजेक्ट वाले दौर में है। अच्छी डिप्लॉयड हाइब्रिड TPS किस्मों को हर अफ़्रीकी देश में सरकारी रजिस्ट्रेशन चाहिए, और इसमें वक़्त लग सकता है। जब TPS आसानी से और सस्ते में मिलेगा, तभी किसान इसे बड़े पैमाने पर लगा पाएँगे।
रूटेड कटिंग की दिक़्क़त अलग है: कटिंग कौन बनाए, कौन ख़रीदे, और पहला नेट हाउस किसके पैसे से बने।
किसान TPS को कैसे इस्तेमाल करे
TPS सस्ता मिलने लगे तो डॉ. कादियान इसके दो रास्ते बताते हैं।
रास्ता 1: नर्सरी, फिर रोपाई। TPS की नर्सरी लगाएँ और पौध को छोटे खेत में रोपें, जिससे G0 क्वालिटी बीज बने। किसान पूरी फ़सल अगले साल के बीज के लिए रखे, या कुछ हिस्सा पड़ोसियों को बेचकर घर के ख़र्च के लिए पैसा कमाए। सीड प्लॉट तकनीक से पहले साल की फ़सल दो और पीढ़ियों तक बीज बन सकती है। तीसरे साल फिर TPS से नया G0 बीज बनाएँ।
रास्ता 2: बेड में सीडलिंग कंद। TPS को सीधे घने बेड में बोएँ, जिससे छोटे कंद (ट्यूबरलेट या सीडलिंग ट्यूबर) बनें। ये छोटे G0 कंद गाँव के देसी स्टोर में, या पहाड़ों में घर की किसी ठंडी जगह पर रखे जा सकते हैं, जहाँ कोल्ड स्टोरेज नहीं है।
बीज बदलना क्यों ज़रूरी है? डॉ. कादियान बताते हैं कि ज़्यादातर पहाड़ी इलाक़ों में बैक्टीरियल विल्ट (झुलसा देने वाली बैक्टीरिया की बीमारी) फैली है, इसलिए बीज नियम से बदलना ज़रूरी है। उनके मुताबिक़ पहला रास्ता नेपाल के पहाड़ों में अच्छे बीज के लिए कामयाबी से चल रहा है।
नेपाल में TPS का रिकॉर्ड (हमारी जाँच):
- नेपाल में TPS 1985 में आया, आलू उगाने के एक नए तरीक़े के तौर पर।
- किसानों के खेतों पर डेमो 1993–94 के सीज़न से शुरू हुए: तराई, बीच की पहाड़ियाँ और ऊँचे पहाड़।
- 1998–99 में किसानों ने 12 किलो TPS ख़रीदा। इससे अगले सीज़न करीब 600 हेक्टेयर में लगाने लायक कंद बने।
रूटेड कटिंग का सस्ता मॉडल कैसे चले
डॉ. कादियान रूटेड कटिंग को खेत-स्तर पर सस्ते और अच्छे बीज के लिए सबसे स्वस्थ प्लांटिंग मटीरियल मानते हैं। उनके मुताबिक़ अफ़्रीका में ऐसा मॉडल आलू उगाने वालों और न उगाने वालों, दोनों को फ़ायदा दे सकता है। मॉडल क़दम दर क़दम:
- सही जगह चुनें। कृषि विभाग पता करे कि कटिंग बनाने के लिए कौन-सी जगह और मौसम सबसे ठीक हैं।
- पहले नेट हाउस में मदद। शुरू के सालों में विभाग छोटे पॉली या नेट हाउस बनाने के लिए तकनीकी और पैसों की मदद दे, और मदर बेड के लिए कोकोपीट और टिश्यू कल्चर पौधे जैसे इनपुट दे।
- परिवार को ट्रेनिंग। किसान परिवार, महिलाएँ और लड़कियाँ भी, टिश्यू कल्चर पौधे सँभालना और उनसे कटिंग बढ़ाना सीखें।
- आलू न उगाने वाले भी कटिंग बनाएँ। हरियाणा में ऐसे किसान पहले से कटिंग बनाकर बीज उत्पादकों को सप्लाई करते हैं।
- बाज़ार से जोड़ें। सरकारी संस्थाएँ, FPO और NGO कटिंग बनाने वालों को ख़रीदारों, यानी बीज उत्पादकों, से जोड़ें और इकट्ठा करके बेचने का सिस्टम बनाएँ, ताकि छोटे किसान की कमाई बढ़े।
कटिंग से शुरू करने वाला बीज उत्पादक बाज़ार की माँग के हिसाब से G0 (कटिंग से निकले पहले कंद), G1 (G0 को खेत में एक बार बढ़ाकर) या G2 (दूसरी बार बढ़ाकर) बीज बेच सकता है।
भारत का अपना रिकॉर्ड क्या कहता है
भारत में इसी तकनीक को एपिकल रूटेड कटिंग (ARC) कहते हैं। ये आँकड़े ICAR और ICAR-CPRI के हैं, डॉ. कादियान के नोट के नहीं:
| क्या | आँकड़ा | कहाँ और कब |
|---|---|---|
| तकनीक परखी और पक्की की गई | 2019–2021 | ICAR-CPRI के क्षेत्रीय केंद्र |
| किसानों का नेट हाउस | 200 वर्ग मीटर | वाहलिनकिएन गाँव, मेघालय |
| समूह को मिली कटिंग | हर साल करीब 3,000 | मेघालय, 2022 से |
| छोटे कंद (मिनीट्यूबर) निकले | 7,000 → 9,000 | मेघालय, 2022 → 2023 |
| अच्छा बीज जमा हुआ | 2,670 किलो | मेघालय, 2024 की गर्मियों तक |
| एक मदर प्लांट से कटिंग | 200–250 | ICAR-CPRI तरीक़ा, ऊटी केंद्र |
| नर्सरी में बचने वाली कटिंग | 95–98% | ICAR-CPRI तरीक़ा, ऊटी केंद्र |
| ICAR से प्रमाणित | जुलाई 2025 | 12 कंपनियों को लाइसेंस |
मेघालय का केस डॉ. कादियान के मॉडल से काफ़ी मिलता है: एक छोटा 200 वर्ग मीटर का नेट हाउस, एक किसान समूह, और हर साल कुछ हज़ार कटिंग से टनों में साफ़ बीज। कटिंग कैसे बनती है, यह यहाँ पढ़ें: आलू में एपिकल रूटेड कटिंग: दक्षिण भारत अपना बीज कैसे उगाए।
अगले पाँच साल में अफ़्रीका में RAC का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा। — डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान का अनुमान, मौजूदा बीज सिस्टम के साथ
भारत के बीज किसानों के लिए इसका मतलब
- मॉडल का एक हिस्सा भारत में पहले से चल रहा है। आलू न उगाने वाले किसानों का उदाहरण हरियाणा से है, और महिलाओं के ARC बीज हब हरियाणा, कर्नाटक, मेघालय और पश्चिम बंगाल में चलते हैं। पढ़ें: महिलाएँ कैसे चला रही हैं आलू बीज हब।
- पहला नेट हाउस सबसे बड़ी रुकावट है। डॉ. कादियान शुरुआती मदद की ज़िम्मेदारी कृषि विभाग पर रखते हैं। भारत में बनाने से पहले राज्य के हॉर्टिकल्चर विभाग या पास के KVK से पूछें कि कौन-सी मदद मिलती है।
- पहले ख़रीदार तय करें। मॉडल तभी चलता है जब कोई FPO, NGO या बीज कंपनी कटिंग या G0 ख़रीदे। मदर बेड लगाने से पहले यह तय कर लें।
- TPS लंबा रास्ता है। यह रजिस्टर्ड और सस्ते हाइब्रिड बीज पर टिका है।
- भारत में बीज की कमी कितनी है, यह पढ़ें: भारत में आलू बीज की कमी। और भी: बीज सिस्टम की सारी ख़बरें।
कांग्रेस की और ख़बरें: वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026 का कार्यक्रम (अंग्रेज़ी में)।
स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस
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