शुक्रवार, 6 नवंबर 2026हिन्दी · English
INDIAN POTATO
बीज प्रणाली

अफ़्रीका में रूटेड कटिंग और TPS आम कैसे हों? WPC 2026 में डॉ. कादियान का जवाब

वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026 के सीड सिस्टम सेशन में डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान (CIP) का मॉडल: नेपाल जैसी TPS नर्सरी, हरियाणा जैसे सस्ते नेट हाउस में रूटेड कटिंग, और FPO से बाज़ार।

इंडियन पोटैटो डेस्क · 06 नवंबर 2026 · 7 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
केन्या में वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026 के सीड सिस्टम सेशन में रूटेड कटिंग और ट्रू पोटैटो सीड पर बोलते डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान
सीधी बात
TPS नर्सरी + सस्ता नेट हाउस
डॉ. कादियान का मॉडल दो हिस्सों में है। ट्रू पोटैटो सीड (TPS) सस्ता मिले तो किसान नर्सरी लगाकर अपना साफ़ G0 बीज ख़ुद उगाए, जैसा नेपाल के पहाड़ों में होता है। रूटेड एपिकल कटिंग (RAC) के लिए कृषि विभाग किसान परिवारों को छोटे पॉली या नेट हाउस बनाने में मदद करे, और FPO व NGO कटिंग बनाने वालों को बीज उत्पादकों से जोड़ें।

चेयरपर्सन ने पैनल से क्या पूछा

अक्टूबर 2026 में केन्या में 13वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस हुई। उसके सीड सिस्टम टेक्निकल सेशन में चेयरपर्सन ने पैनलिस्ट डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान से सवाल किया:

अफ़्रीका के आलू बीज सिस्टम में रूटेड कटिंग और TPS अभी ज़्यादातर प्रोजेक्ट तक ही हैं। क्या कोई ऐसा टिकाऊ मॉडल है जिससे ये आम बीज उत्पादन का हिस्सा बनें, और साथ में बीज की क्वालिटी, किसान का भरोसा और सस्ती क़ीमत भी बनी रहे?

डॉ. कादियान ने बाद में अपना जवाब एक लिखित नोट में भेजा, जो इंडियन पोटैटो को मिला। आगे के तीन हिस्सों में जो लिखा है, वह उनकी राय है, जब तक हम अलग से न बताएँ।

डॉ. कादियान कौन हैं? वे चार दशक से भारत में आलू पर काम कर रहे हैं, और भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में भी। 1983 में वे इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) में एसोसिएट साइंटिस्ट बने। 2018 में रिटायर होने के बाद वे CIP के सीनियर कंसल्टेंट हैं, और ICAR व कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, ओडिशा और मेघालय के प्रोजेक्ट पर काम करते हैं। बीज आलू और TPS की परख उनका ख़ास काम रहा है। 2024 में वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस ने उन्हें ग्लोबल इंडस्ट्री अवॉर्ड दिया। उनके बारे में और: डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान का प्रोफ़ाइल (अंग्रेज़ी में)।

दोनों तकनीकें एक ही दिक़्क़त का हल हैं: साफ़ बीज कम है, महँगा है, और बीज आलू एक सीज़न से दूसरे सीज़न तक बीमारी ढोता है। रूटेड कटिंग टिश्यू कल्चर के साफ़ पौधे की जड़ वाली टिप है। TPS आलू के फल का असली बीज है, जो हल्का होता है और कंद वाली ज़्यादातर बीमारियाँ आगे नहीं ले जाता।

TPS और रूटेड कटिंग अभी प्रोजेक्ट तक क्यों हैं

डॉ. कादियान के मुताबिक़ अफ़्रीका में TPS अभी प्रोजेक्ट वाले दौर में है। अच्छी डिप्लॉयड हाइब्रिड TPS किस्मों को हर अफ़्रीकी देश में सरकारी रजिस्ट्रेशन चाहिए, और इसमें वक़्त लग सकता है। जब TPS आसानी से और सस्ते में मिलेगा, तभी किसान इसे बड़े पैमाने पर लगा पाएँगे।

रूटेड कटिंग की दिक़्क़त अलग है: कटिंग कौन बनाए, कौन ख़रीदे, और पहला नेट हाउस किसके पैसे से बने।

किसान TPS को कैसे इस्तेमाल करे

TPS सस्ता मिलने लगे तो डॉ. कादियान इसके दो रास्ते बताते हैं।

रास्ता 1: नर्सरी, फिर रोपाई। TPS की नर्सरी लगाएँ और पौध को छोटे खेत में रोपें, जिससे G0 क्वालिटी बीज बने। किसान पूरी फ़सल अगले साल के बीज के लिए रखे, या कुछ हिस्सा पड़ोसियों को बेचकर घर के ख़र्च के लिए पैसा कमाए। सीड प्लॉट तकनीक से पहले साल की फ़सल दो और पीढ़ियों तक बीज बन सकती है। तीसरे साल फिर TPS से नया G0 बीज बनाएँ।

रास्ता 2: बेड में सीडलिंग कंद। TPS को सीधे घने बेड में बोएँ, जिससे छोटे कंद (ट्यूबरलेट या सीडलिंग ट्यूबर) बनें। ये छोटे G0 कंद गाँव के देसी स्टोर में, या पहाड़ों में घर की किसी ठंडी जगह पर रखे जा सकते हैं, जहाँ कोल्ड स्टोरेज नहीं है।

बीज बदलना क्यों ज़रूरी है? डॉ. कादियान बताते हैं कि ज़्यादातर पहाड़ी इलाक़ों में बैक्टीरियल विल्ट (झुलसा देने वाली बैक्टीरिया की बीमारी) फैली है, इसलिए बीज नियम से बदलना ज़रूरी है। उनके मुताबिक़ पहला रास्ता नेपाल के पहाड़ों में अच्छे बीज के लिए कामयाबी से चल रहा है।

नेपाल में TPS का रिकॉर्ड (हमारी जाँच):

रूटेड कटिंग का सस्ता मॉडल कैसे चले

डॉ. कादियान रूटेड कटिंग को खेत-स्तर पर सस्ते और अच्छे बीज के लिए सबसे स्वस्थ प्लांटिंग मटीरियल मानते हैं। उनके मुताबिक़ अफ़्रीका में ऐसा मॉडल आलू उगाने वालों और न उगाने वालों, दोनों को फ़ायदा दे सकता है। मॉडल क़दम दर क़दम:

  1. सही जगह चुनें। कृषि विभाग पता करे कि कटिंग बनाने के लिए कौन-सी जगह और मौसम सबसे ठीक हैं।
  2. पहले नेट हाउस में मदद। शुरू के सालों में विभाग छोटे पॉली या नेट हाउस बनाने के लिए तकनीकी और पैसों की मदद दे, और मदर बेड के लिए कोकोपीट और टिश्यू कल्चर पौधे जैसे इनपुट दे।
  3. परिवार को ट्रेनिंग। किसान परिवार, महिलाएँ और लड़कियाँ भी, टिश्यू कल्चर पौधे सँभालना और उनसे कटिंग बढ़ाना सीखें।
  4. आलू न उगाने वाले भी कटिंग बनाएँ। हरियाणा में ऐसे किसान पहले से कटिंग बनाकर बीज उत्पादकों को सप्लाई करते हैं।
  5. बाज़ार से जोड़ें। सरकारी संस्थाएँ, FPO और NGO कटिंग बनाने वालों को ख़रीदारों, यानी बीज उत्पादकों, से जोड़ें और इकट्ठा करके बेचने का सिस्टम बनाएँ, ताकि छोटे किसान की कमाई बढ़े।

कटिंग से शुरू करने वाला बीज उत्पादक बाज़ार की माँग के हिसाब से G0 (कटिंग से निकले पहले कंद), G1 (G0 को खेत में एक बार बढ़ाकर) या G2 (दूसरी बार बढ़ाकर) बीज बेच सकता है।

भारत का अपना रिकॉर्ड क्या कहता है

भारत में इसी तकनीक को एपिकल रूटेड कटिंग (ARC) कहते हैं। ये आँकड़े ICAR और ICAR-CPRI के हैं, डॉ. कादियान के नोट के नहीं:

200 वर्ग मीटर
मेघालय के किसान समूह का नेट हाउस
2,670 किलो
अच्छा बीज, 2024 की गर्मियों तक
जुलाई 2025
ICAR ने तकनीक प्रमाणित की, 12 कंपनियों को लाइसेंस
क्याआँकड़ाकहाँ और कब
तकनीक परखी और पक्की की गई2019–2021ICAR-CPRI के क्षेत्रीय केंद्र
किसानों का नेट हाउस200 वर्ग मीटरवाहलिनकिएन गाँव, मेघालय
समूह को मिली कटिंगहर साल करीब 3,000मेघालय, 2022 से
छोटे कंद (मिनीट्यूबर) निकले7,000 → 9,000मेघालय, 2022 → 2023
अच्छा बीज जमा हुआ2,670 किलोमेघालय, 2024 की गर्मियों तक
एक मदर प्लांट से कटिंग200–250ICAR-CPRI तरीक़ा, ऊटी केंद्र
नर्सरी में बचने वाली कटिंग95–98%ICAR-CPRI तरीक़ा, ऊटी केंद्र
ICAR से प्रमाणितजुलाई 202512 कंपनियों को लाइसेंस

मेघालय का केस डॉ. कादियान के मॉडल से काफ़ी मिलता है: एक छोटा 200 वर्ग मीटर का नेट हाउस, एक किसान समूह, और हर साल कुछ हज़ार कटिंग से टनों में साफ़ बीज। कटिंग कैसे बनती है, यह यहाँ पढ़ें: आलू में एपिकल रूटेड कटिंग: दक्षिण भारत अपना बीज कैसे उगाए।

अगले पाँच साल में अफ़्रीका में RAC का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा। — डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान का अनुमान, मौजूदा बीज सिस्टम के साथ

भारत के बीज किसानों के लिए इसका मतलब

कांग्रेस की और ख़बरें: वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026 का कार्यक्रम (अंग्रेज़ी में)।

स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस

▶ बुवाई का मौसम · String Bio के साथ वीडियोआलू में तीन स्प्रे: कब, कितना और कैसेएक एकड़ में 88 ग्राम, 200 लीटर पानी। डेढ़ मिनट का वीडियो, साथ में अपनी अतिरिक्त पैदावार का हिसाब।वीडियो देखें →
साथी किसानों और व्यापारियों से जुड़ेंव्हाट्सऐप ग्रुप पर आलू भाव, मौसम और बाज़ार पर खुलकर चर्चा करें।
ग्रुप जॉइन करें →

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रूटेड एपिकल कटिंग (RAC) क्या होती है?
यह टिश्यू कल्चर के बीमारी-मुक्त आलू पौधे की ऊपरी टिप होती है, जिसे कोकोपीट में जड़ निकलवाकर नेट हाउस या खेत में लगाया जाता है। वहाँ इससे छोटे बीज आलू बनते हैं। भारत में इसे एपिकल रूटेड कटिंग (ARC) कहते हैं; ICAR ने जुलाई 2025 में इसे प्रमाणित किया और 12 कंपनियों को लाइसेंस दिया।
ट्रू पोटैटो सीड (TPS) क्या है?
TPS आलू के फल (बेरी) का असली बीज है, कंद नहीं। यह बहुत हल्का होता है। इसे नर्सरी या बेड में बोकर पौध या छोटे सीडलिंग कंद बनाए जाते हैं, जो आगे बीज की तरह लगते हैं।
WPC 2026 में अफ़्रीका के लिए कौन-सा मॉडल बताया गया?
सीड सिस्टम सेशन में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) के डॉ. मोहिंदर सिंह कादियान ने दो हिस्सों वाला मॉडल बताया। TPS सस्ता मिले तो किसान नर्सरी या बेड में अपना G0 बीज उगाए। रूटेड कटिंग के लिए कृषि विभाग छोटे पॉली या नेट हाउस बनवाने में मदद करे, और FPO व NGO कटिंग बनाने वालों को बीज उत्पादकों से जोड़ें।
क्या आलू न उगाने वाले किसान भी कटिंग बना सकते हैं?
हाँ। डॉ. कादियान ने बताया कि हरियाणा में जो किसान आलू नहीं उगाते, वे भी रूटेड कटिंग बनाकर बीज उत्पादकों को सप्लाई करते हैं।
नेपाल में TPS कैसा चला?
नेपाल में TPS 1985 में आया। किसानों के खेतों पर डेमो 1993–94 के सीज़न से तराई, बीच की पहाड़ियों और ऊँचे पहाड़ों में शुरू हुए। 1998–99 में किसानों ने 12 किलो TPS ख़रीदा, जिससे अगले सीज़न करीब 600 हेक्टेयर में लगाने लायक कंद बने।
मोहिंदर सिंह कादियानरूटेड कटिंगट्रू पोटैटो सीडTPSआलू बीजवर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026नेपाल
लेखक के बारे में
इं
इंडियन पोटैटो डेस्क
डेस्क

भारत की आलू मूल्य शृंखला पर प्राथमिक-स्रोत आधारित रिपोर्टिंग — उत्पादन, भाव, भंडारण, प्रसंस्करण और व्यापार। यहाँ हर आँकड़ा किसी सरकारी, संस्थागत या सहकर्मी-समीक्षित स्रोत से जुड़ा होता है।

और पढ़ें

सभी बीज प्रणाली लेख →
डॉ. पूजा पांडे, CIP, आलू के खेत में: महिलाएँ चला रहीं आलू बीज हबबीज प्रणाली · हरियाणामहिलाएँ कैसे चला रही हैं आलू बीज हब: एपिकल रूटेड कटिंग से कमाई05 नवंबर 2026आलू में एपिकल रूटेड कटिंग: नारियल रेशे के प्लग में जड़ पकड़ चुकी आलू की कटिंग, साथ में एक पौधे से निकले आलूबीज प्रणाली · कर्नाटकआलू में एपिकल रूटेड कटिंग: दक्षिण भारत 2,000 किमी दूर से बीज मँगाने के बजाय अपना बीज कैसे उगाए20 अक्टूबर 2026Why Potato Farmers Need Market Intelligence Beyond Mandi PricesEN · Englishहमारी अंग्रेज़ी साइटWhy Potato Farmers Need Market Intelligence Beyond Mandi Pricesindianpotato.com →EN · Englishसाझेदार ज्ञानकोशNyandarua: How One County Grew 35% of Kenya's Potatoespotatopedia.com →

♥ पाठकों का सहयोग

आलू के इकलौते मंच को सबके लिए मुफ़्त रखें।

इंडियन पोटैटो सिर्फ़ आलू की बात करता है: मंडी भाव, बीज, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और निर्यात, और इसे पढ़ना सबके लिए मुफ़्त है। हमारा काम आपके काम आता है तो इस पहल में सहयोग करें। आपका हर रुपया खेतों और मंडियों से और ज़्यादा ख़बरें लाने में लगेगा।

हम सहयोग क्यों माँगते हैं →

UPI · कार्ड · नेट बैंकिंग · Razorpay से सुरक्षित