क्या पुदीने का तेल आलू का अंकुर रोक सकता है? कोल्ड स्टोर का सही तापमान और भारत के नियम
पुदीने का तेल हर महीने फ़ॉग करने से स्टोर में आलू का अंकुर रुकता है, पर भारत में सिर्फ़ CIPC रजिस्टर्ड है। बीज-खाने वाला आलू 2–4 °C, चिप्स वाला 10–12 °C।

सीधा जवाब: हाँ, पुदीने का तेल स्टोर में आलू का अंकुर रोक सकता है, पर भारत में अभी यह मंज़ूर विकल्प नहीं है। स्पीयरमिंट (पुदीने) का तेल महीने में करीब एक बार गर्म फ़ॉग बनाकर स्टोर में छोड़ा जाता है। यह आलू की आँख की बढ़ने वाली नोक को मार देता है। ब्रिटेन के स्टोर इसे इस्तेमाल करते हैं। भारत के रजिस्टर में स्टोर के आलू के लिए सिर्फ़ CIPC (क्लोरप्रोफ़ाम) दर्ज है।
आलू किस तापमान पर रखें?
यह इस पर निर्भर है कि आलू किस काम का है। ICAR-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) के वैज्ञानिकों ने 2024 में भारत का तरीका लिखा: बीज और लंबे समय वाला खाने का आलू 2–4 °C की ठंड में, और चिप्स जैसे तले प्रोडक्ट वाला आलू 8–12 °C पर, क्योंकि ठंड में आलू मीठा हो जाता है।
| आलू किस काम का | स्टोर का तापमान | नमी | अंकुर कैसे रोकें | ध्यान दें |
|---|---|---|---|---|
| बीज | 2–4 °C | 90% से ऊपर | सिर्फ़ ठंड; दवा कभी नहीं (बीज को अंकुर देना है) | कार्बन डाइऑक्साइड निकालने के लिए हवा बदलें; आम तौर पर मार्च से सितंबर/अक्टूबर तक |
| खाने का आलू, लंबे समय | 2–4 °C | 90% से ऊपर | सिर्फ़ ठंड; कोई केमिकल नहीं | मीठा हो जाता है, तलने लायक नहीं |
| खाने का आलू, बीच के तापमान वाला स्टोर | 8–10 °C | 90% से ऊपर (ह्यूमिडिफ़ायर) | डॉर्मेंसी ख़त्म होने पर ज़रूरी | अंकुर, वज़न घटना |
| चिप्स और प्रोसेसिंग | 10–12 °C | 90% से ऊपर (ह्यूमिडिफ़ायर) | CIPC, भारत में अकेला रजिस्टर्ड विकल्प | शुगर ताज़ा वज़न का 0.1% से कम रहे |
ICAR-CPRI (इंडियन फ़ार्मिंग, मई 2024) के आधार पर। चिप्स वाले आलू का सही तापमान स्टोरेज के समय के हिसाब से थोड़ा बदलता है। भारत के CIPC लेबल पर 10 ± 2 °C और 90 ± 5% नमी लिखी है।
CPRI ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के हवाले से बताया कि 2023 में देश में 8,653 कोल्ड स्टोर थे, कुल क्षमता 394.17 लाख टन, और इसका करीब 75% हिस्सा आलू में जाता है। कोल्ड स्टोर बनाने पर सब्सिडी की जानकारी इस पोस्ट में है।
कोल्ड स्टोर का आलू मीठा क्यों होता है?
2–4 °C के स्टोर में आलू अपने स्टार्च का कुछ हिस्सा शुगर में बदल देता है। CPRI इसे लो-टेम्परेचर स्वीटनिंग कहता है। मीठा आलू सब्ज़ी में अच्छा नहीं लगता, और गर्म तेल में शुगर जल जाती है: चिप्स और फ़्राइज़ भूरे और कड़वे बनते हैं। तलने वाले आलू में शुगर ताज़ा वज़न का 0.1% से कम चाहिए।
CPRI के एक स्टोरेज ट्रायल में जालंधर और मोदीपुरम में उगी 7 किस्में 145 दिन रखी गईं (नमी 85–90%):
10 और 12 °C पर CIPC के साथ शुगर कम बढ़ी, फिर भी ज़्यादातर किस्मों के चिप्स पास नहीं हुए। सिर्फ़ मोदीपुरम में उगा कुफ़री चिप्सोना-1 115 दिन तक ठीक रंग के चिप्स देता रहा। मतलब: गर्मी शुगर रोकती है पर अंकुर जगाती है, अंकुर रोकने की दवा से ही गर्म स्टोर चलता है, और किस्म सबसे बड़ा फ़र्क डालती है।
नमी और हवा क्यों ज़रूरी है?
स्टोर में रखा आलू ज़िंदा होता है। यह कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है और छिलके से पानी खोता है। CPRI की सलाह:
- नमी 90% से ऊपर रखें। सूखी हवा से आलू सिकुड़ता है और वज़न घटता है। 10–12 °C वाले गर्म स्टोर में यह मुश्किल है, वहाँ ह्यूमिडिफ़ायर लगते हैं।
- कार्बन डाइऑक्साइड नियम से निकालें। इसके जमा होने से शुगर बढ़ती है। डक्ट सिस्टम से ताज़ी हवा अंदर लें, तापमान बिगाड़े बिना।
- तापमान धीरे-धीरे गिराएँ। लोडिंग के बाद रोज़ करीब 1 °C कम करें, ताकि आलू क्योर हो सके।
- जल्दी लोड करें, ज़्यादा न भरें। बार-बार दरवाज़ा खोलने से तापमान ऊपर-नीचे होता है। ठूँसकर भरे चैंबर में अंकुर और सड़न बढ़ती है। बिना चोट के लोडिंग का तरीका इस पोस्ट में है।
- बोरी देखकर चुनें। जूट की बोरी CIPC फ़ॉग सोख लेती है और अंदर कम जाने देती है। 40–50 किलो की ऐसी बोरी बेहतर है जो फ़ॉग न सोखे।
कोल्ड स्टोर से निकलते ही आलू में अंकुर क्यों आते हैं?
खुदाई के बाद हर आलू कुछ समय आराम करता है। इसे डॉर्मेंसी कहते हैं। इस दौरान आँखें नहीं बढ़तीं। CPRI के मुताबिक ज़्यादातर भारतीय किस्मों में यह 6 से 8 हफ़्ते की होती है। ठंड बस बढ़त रोकती है, घड़ी वापस नहीं घुमाती। बाहर गर्मी मिली तो कुछ ही दिनों में आलू बढ़ने लगता है।
पुदीने के तेल वाले ट्रायल में भी यही दिखा: दवा लगे आलू को पानी से धोया तो कुछ ही दिनों में फिर अंकुर आ गए। इसलिए स्टोर से निकला आलू ठंडी, अंधेरी और सूखी जगह रखें और जल्दी बेचें। धूप में आलू हरा होता है और उसमें ग्लाइकोएल्कलॉइड बढ़ते हैं।
पुदीने का तेल अंकुर कैसे रोकता है?
यह तेल स्पीयरमिंट (Mentha spicata) से निकलता है, वही पुदीना जो हमारी रसोई में होता है। तेल को गर्म करके फ़ॉग बनाया जाता है और स्टोर में फैलाया जाता है।
- आँख की नोक मर जाती है। इज़राइल के वोल्केनी सेंटर में तेल से आलू की आँख की बढ़ने वाली नोक (मेरिस्टेम) जगह-जगह मर गई। कुछ हफ़्ते बाद उसी आँख में बगल की कलियाँ बढ़ने लगीं। ट्रायल में हर महीने फ़ॉग किया गया।
- 6 महीने अंकुर रुके। बड़े स्टोर में 8 किस्मों पर हर महीने फ़ॉग से आलू सख़्त रहे और 140 दिन बाद वज़न 38% कम घटा।
- असली काम R-कार्वोन का। तेल में 73% R-कार्वोन था। उसी डोज़ (4.5 µl प्रति लीटर हवा) में अकेला R-कार्वोन भी उतना ही असरदार रहा।
- डोज़ का ध्यान ज़रूरी। कम डोज़ (0.5 µl प्रति लीटर) से उल्टा बगल की कलियाँ अंकुर देने लगीं।
ब्रिटेन में यह आम तौर पर कॉन्ट्रैक्टर गर्म फ़ॉग से लगाते हैं। धुले-पैक आलू के स्टोर में यह पहले से चलता था। 2020 में CIPC बंद होने के बाद 2020-21 सीज़न में प्रोसेसिंग वाले आलू पर भी पहली बार बड़े पैमाने पर लगा। पर यह CIPC की सीधी जगह नहीं लेता। ब्रिटेन के पोटैटो रिसर्च प्रोग्राम में 4.5 °C के स्टोर में खाने वाले आलू पर यह बहुत असरदार रहा। 9 °C पर प्रोसेसिंग किस्मों में असर किस्म के हिसाब से बहुत अलग रहा, और खेत में छिड़की जाने वाली मैलिक हाइड्राज़ाइड के साथ सबसे अच्छा चला। यूरोप का दूसरा विकल्प एथिलीन है, उसकी अपनी दिक्कत इस पोस्ट में पढ़ें।
क्या भारत के कोल्ड स्टोर पुदीने का तेल लगा सकते हैं?
अभी मंज़ूर प्रोडक्ट के तौर पर नहीं। केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIB&RC) के प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर रजिस्टर (30 सितंबर 2025 तक) में स्टोर के आलू का अंकुर रोकने के लिए सिर्फ़ क्लोरप्रोफ़ाम (CIPC) दर्ज है। पुदीने का तेल या कार्वोन इसमें नहीं है।
CIPC की मंज़ूर डोज़ 18–20 ग्राम एक्टिव इंग्रीडिएंट प्रति टन है। स्टोर 10 ± 2 °C और 90 ± 5% नमी पर होना चाहिए, और वेटिंग पीरियड 20 दिन है। CPRI कहता है कि फ़ॉग के 3 हफ़्ते तक आलू न खाएँ।
भारत में रिसर्च हो रही है:
- पंतनगर: जी.बी. पंत यूनिवर्सिटी ने उत्तराखंड की 10 जगहों से पुदीने का तेल जाँचा। उसमें 15.3% से 68.5% कार्वोन मिला, और कार्वोन वाले और पिपेरिटेनोन ऑक्साइड वाले तेल ने CIPC के मुकाबले अच्छा अंकुर रोका।
- लखनऊ: CSIR-CIMAP ने 20 तेल कमरे के तापमान (25 °C) पर जाँचे। पामारोसा और अजवाइन के तेल ने अंकुर रोका; 7 दिन अजवाइन तेल देने से 30 दिन तक अंकुर नहीं आए। लेमनग्रास और लौंग के तेल ने उल्टा अंकुर जल्दी निकाले।
- शिमला: CPRI कहता है कि उसने CIPC की जगह कुछ पौधों से बने सुरक्षित वाष्पशील कंपाउंड पहचाने हैं।
इनमें से कोई भी अभी रजिस्टर्ड प्रोडक्ट नहीं है।
स्टोर वाले अभी क्या करें?
- चैंबर का तापमान आलू के काम के हिसाब से रखें। बीज और लंबे समय वाला खाने का आलू 2–4 °C, चिप्स वाला 10–12 °C। दोनों को एक चैंबर में न मिलाएँ।
- नमी 90% से ऊपर रखें और कार्बन डाइऑक्साइड तय समय पर निकालें, ख़ासकर गर्म चैंबर में।
- सिर्फ़ रजिस्टर्ड दवा, लेबल के हिसाब से, सही फ़ॉगर से लगाएँ। बीज आलू पर कभी नहीं।
- बाज़ार तक का सफ़र सोचें। कोल्ड स्टोर से निकला आलू आराम का समय पार कर चुका है; उसे ठंडा और अंधेरे में रखें और जल्दी बेचें।
- ख़रीदार की शर्तें देखें। कुछ एक्सपोर्ट बाज़ारों ने CIPC की अवशेष सीमा बहुत घटा दी है। ऐसे ख़रीदार के लिए चैंबर की तैयारी पहले से करनी पड़ती है।
भंडारण की और ख़बरें भंडारण सेक्शन में हैं। स्टोर चलाते हैं या बनाने वाले हैं? इंडियन पोटैटो से WhatsApp (+91 94996 68498) पर ज़िला, टन और आलू किस काम का है (बीज, खाने या चिप्स) लिखकर पूछें।
फ़ोटो: Thamizhpparithi Maari, CC BY-SA 4.0 (Wikimedia Commons)।



