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INDIAN POTATO
बीज प्रणाली

PAU की चार नई आलू किस्में — कौन-सी आपके खेत के लिए है

पंजाब पोटैटो 101, 102, 103 और 104 — कौन-सी किस्म कितनी पैदावार देती है, कितने दिन लेती है, झुलसे से बचती है या नहीं, और बीज कहाँ मिलेगा।

देवेंद्र कुमार झा · 23 सितंबर 2026 · 6 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
पंजाब पोटैटो 101, 102, 103 और 104 के कंद — साबुत और कटे हुए

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने तीन साल में आलू की चार नई किस्में निकाली हैं — पंजाब पोटैटो 101, 102, 103 और 104। चारों का बीज अब मिलने लगा है।

चारों अलग-अलग काम की हैं। एक जल्दी तैयार होती है, एक सबसे ज़्यादा पैदावार देती है, एक सिर्फ़ 80 दिन लेती है, और एक झुलसे से बचाती है। नीचे साफ़-साफ़ लिखा है कि कौन-सी किस्म क्या देती है, ताकि आप अपने खेत के हिसाब से चुन सकें।

ये चारों किस्में PAU के सब्ज़ी विज्ञान विभाग में बनी हैं — डॉ. सत पाल शर्मा और डॉ. नवजोत सिंह बराड़ की टीम ने। दोनों के बारे में नीचे बताया है।

आपको क्या चाहिए, वो देखिए

आपकी ज़रूरतकौन-सी किस्म बोएँ
जल्दी खुदाई हो, अगेती भाव मिल जाएपंजाब पोटैटो 103
पैदावार सबसे ज़्यादा निकलेपंजाब पोटैटो 102
अगेती भी चाहिए और माल भी अच्छापंजाब पोटैटो 101
खेत में झुलसा ज़्यादा लगता हैपंजाब पोटैटो 104

चार किस्में क्यों निकालीं

पंजाब में बीज आलू बहुत होता है, और यहाँ आलू सब्ज़ियों के फ़सल-चक्र में आता है। यहाँ सब कुछ समय पर टिका है — आलू कब खुदेगा, उसके बाद अगली फ़सल कब बोई जाएगी।

इसलिए अगेती किस्म का फ़ायदा सिर्फ़ जल्दी भाव मिलना नहीं है। जल्दी खुदाई हो जाए तो खेत जल्दी ख़ाली होता है और अगली फ़सल आराम से बैठ जाती है। यही वजह है कि 101 और 103 उस किसान के बहुत काम की हैं जो साल में दो-तीन फ़सल लेता है।

चारों मिलकर आपको चुनने का मौक़ा देती हैं — अपने चक्र, अपनी बुवाई और अपनी मंडी के हिसाब से। पहले जो बीज मिल जाता था वही बोना पड़ता था; अब ऐसा नहीं है।

कौन-सी किस्म क्या देती है

पंजाब पोटैटो 101 — खेत में फ़सल और कंदPP-1012023

पंजाब पोटैटो 101

अगेती की शुरुआत

178क्विंटल प्रति एकड़
पौधा
मध्यम ऊँचा, मज़बूत, सीधा
कंद
एक-से, अंडाकार-गोल, आँखें उथली
छिलका
हल्का भूरा
गूदा
क्रीमी सफ़ेद

अगेती भाव पकड़ने वालों के लिए। कंद एक जैसे निकलते हैं, इसलिए ताज़ा बेचने में दिक़्क़त नहीं आती।

पंजाब पोटैटो 102 — खेत में फ़सल और कंदPP-1022023

पंजाब पोटैटो 102

पैदावार में सबसे आगे

184क्विंटल प्रति एकड़
पौधा
मध्यम ऊँचा, मज़बूत, सीधा, पत्ते हल्के हरे
कंद
अंडाकार-गोल, देखने में अच्छे, आँखें उथली
छिलका
हल्का भूरा
गूदा
क्रीमी पीला

PAU की सबसे ज़्यादा देने वाली आलू किस्म। जिसे कुल पैदावार चाहिए, वो यही बोए।

पंजाब पोटैटो 103 — खेत में फ़सल और कंदPP-1032025

पंजाब पोटैटो 103

80 दिन वाली

142क्विंटल · 80–90 दिन में
पौधा
मध्यम ऊँचा, घना, मज़बूत, पत्ते हल्के हरे
कंद
लंबे-गोल
छिलका
हल्का भूरा
गूदा
क्रीमी सफ़ेद

सबसे जल्दी तैयार। 80–90 दिन में खोद लीजिए तो 142 क्विंटल, और खेत में पूरा रहने दीजिए तो 180 क्विंटल तक जाती है। दोनों रास्ते आपके हाथ में।

पंजाब पोटैटो 104 — खेत में फ़सल और कंदPP-1042025

पंजाब पोटैटो 104

झुलसे से बचाव

174क्विंटल प्रति एकड़
पौधा
ऊँचा, सीधा, घना, पत्ते गहरे हरे
कंद
गोल
छिलका
हल्का भूरा
गूदा
पीलापन लिए सफ़ेद

मध्यम से पछेती पकने वाली। सबसे बड़ी बात यह कि इसमें पछेती झुलसे से मध्यम बचाव है — जहाँ हर साल झुलसा मारता है, वहाँ यही ठीक बैठती है।

184
PP-102 · क्विंटल/एकड़
142 → 180
PP-103 · 80–90 दिन, फिर पूरा
174
PP-104 · झुलसे से बचाव के साथ

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बीज कहाँ मिलेगा, और उसे साफ़ कैसे रखें

चारों किस्मों का बीज पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना से मिलता है। directorseeds@pau.edu और hodvc@pau.edu पर लिख दीजिए।

बीज मिल जाना आधा काम है। उसे साफ़ रखना बाक़ी आधा। PAU की सीड प्लॉट तकनीक यही बताती है। इसमें एक ही बात पकड़नी है — चेपा यानी माहू गिनते रहिए। जब 100 पत्तों पर चेपा की गिनती 20 पहुँच जाए, उसी दिन हौल काट दीजिए।

देर की तो चेपा वायरस को कंद तक पहुँचा देता है, और अगले साल वही बीज कमज़ोर निकलता है। समय पर काट दिया तो बीज साफ़ रहता है और अगले साल भी उतनी ही फ़सल देता है।

अपने ज़िले का आज का भाव आलू भाव पर देख लीजिए। खेती की पूरी बात आलू की खेती कैसे करें में लिखी है।

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किसने बनाईं ये किस्में

डॉ. सत पाल शर्मा, PAU लुधियानाडॉ. सत पाल शर्माप्रधान सब्ज़ी ब्रीडर एवं विभागाध्यक्ष, सब्ज़ी विज्ञान विभाग, PAU लुधियाना

आलू और खरबूजे के ब्रीडिंग का काम इन्हीं के ज़िम्मे है। हिमाचल के कीलोंग में बे-मौसमी हालात का इस्तेमाल करके PAU का अपना आलू ब्रीडिंग कार्यक्रम इन्होंने ही खड़ा किया। PhD टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी, अमेरिका से। चारों पंजाब पोटैटो किस्में और खरबूजे की तीन किस्में इन्हीं की सिफ़ारिश पर आईं। 66 शोध पत्र और 16 बेस्ट पेपर अवॉर्ड इनके नाम हैं, और ये इंडियन सोसाइटी ऑफ़ वेजिटेबल साइंस के फ़ेलो हैं।

डॉ. नवजोत सिंह बराड़, PAU लुधियानाडॉ. नवजोत सिंह बराड़सब्ज़ी ब्रीडर, सब्ज़ी विज्ञान विभाग, PAU लुधियाना

मई 2016 में KVK लंगड़ोया (नवांशहर) में सहायक प्रोफ़ेसर के तौर पर PAU से जुड़े। सितंबर 2018 से खनौरा (होशियारपुर) के सब्ज़ी अनुसंधान फ़ार्म पर सब्ज़ी ब्रीडर हैं। PAU के आलू ब्रीडिंग कार्यक्रम की टीम में हैं और नई किस्में बनाने तथा शुरुआती पीढ़ी का बीज तैयार करने का काम देखते हैं।

बीज के लिए संपर्क
बीज चाहिए? बस इतना बता दीजिए

बीज PAU सीधे देती है, इसलिए ऊपर दिए पते पहला रास्ता हैं। फिर भी अगर आप चाहें कि हम मदद करें — कौन-सी किस्म आपके खेत में बैठेगी, एक एकड़ में कितना बीज लगेगा, आपके ज़िले में और कौन ये किस्में बो रहा है — तो चार बातें भेज दीजिए: ज़िला और राज्य, कितना रक़बा, कौन-सी किस्म चाहिए, और बुवाई कब करनी है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंजाब पोटैटो की किस किस्म की पैदावार सबसे ज़्यादा है?
पंजाब पोटैटो 102। ठीक से खेती करें तो यह औसतन 184 क्विंटल प्रति एकड़ देती है — PAU की सब किस्मों में सबसे ज़्यादा। पौधा मध्यम ऊँचा, मज़बूत और सीधा रहता है, पत्ते हल्के हरे। कंद अंडाकार-गोल, छिलका हल्का भूरा, गूदा क्रीमी पीला।
सबसे जल्दी कौन-सी किस्म तैयार होती है?
पंजाब पोटैटो 103। यह सबसे जल्दी तैयार होने वाली है — बुवाई के 80 से 90 दिन में ही 142 क्विंटल प्रति एकड़ दे देती है। और अगर खेत में पूरा रहने दें तो 180 क्विंटल प्रति एकड़ तक चली जाती है। यानी जल्दी बेचना है तो खोद लीजिए, पूरी फ़सल चाहिए तो रुक जाइए।
झुलसे से बचाव वाली कौन-सी किस्म है?
पंजाब पोटैटो 104। इसमें पछेती झुलसे से मध्यम बचाव है, इसलिए जिस खेत में यह रोग हर साल लगता है वहाँ यही ठीक बैठती है। मध्यम से पछेती पकने वाली है। पौधा ऊँचा, सीधा और घना, पत्ते गहरे हरे, कंद गोल, गूदा पीलापन लिए सफ़ेद। औसत पैदावार 174 क्विंटल प्रति एकड़।
इन किस्मों का बीज कहाँ से मिलेगा?
चारों किस्मों का बीज पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना से मिलता है। directorseeds@pau.edu और hodvc@pau.edu पर लिख दीजिए।
सीड प्लॉट तकनीक क्या है और हौल कब काटें?
यह PAU का बताया तरीक़ा है, जिससे बिना वायरस वाला साफ़ बीज तैयार होता है। इसमें चेपा यानी माहू गिनते रहना है। जब 100 पत्तों पर चेपा की गिनती 20 पहुँच जाए, उसी दिन हौल यानी ऊपर का पौधा काट दीजिए। देर की तो चेपा वायरस को कंद तक पहुँचा देता है और अगले साल वही बीज कमज़ोर निकलता है।
ये किस्में किसने बनाईं?
PAU लुधियाना के सब्ज़ी विज्ञान विभाग ने। इसकी अगुआई डॉ. सत पाल शर्मा करते हैं, जो प्रधान सब्ज़ी ब्रीडर और विभागाध्यक्ष हैं। टीम में डॉ. नवजोत सिंह बराड़ भी हैं। यह कार्यक्रम हिमाचल के कीलोंग में बे-मौसमी हालात का इस्तेमाल करता है।
पंजाब पोटैटोPAU लुधियानाआलू की किस्मेंबीज आलूपंजाबआलू पैदावार
लेखक के बारे में
देवेंद्र कुमार झा
देवेंद्र कुमार झा
आलू उद्योग इंटेलिजेंस विशेषज्ञ

इंडियन पोटैटो के संस्थापक एवं निदेशक — आलू पर भरोसेमंद जानकारी (पोटैटो इंटेलिजेंस) और आलू से जुड़े हितधारकों का समुदाय खड़ा करने को समर्पित मंच। कृषि अभियांत्रिकी में बी.टेक; आलू के क्षेत्र के जानकार और इसके प्रति गहरा लगाव रखने वाले।

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