PAU की चार नई आलू किस्में — कौन-सी आपके खेत के लिए है
पंजाब पोटैटो 101, 102, 103 और 104 — कौन-सी किस्म कितनी पैदावार देती है, कितने दिन लेती है, झुलसे से बचती है या नहीं, और बीज कहाँ मिलेगा।

पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने तीन साल में आलू की चार नई किस्में निकाली हैं — पंजाब पोटैटो 101, 102, 103 और 104। चारों का बीज अब मिलने लगा है।
चारों अलग-अलग काम की हैं। एक जल्दी तैयार होती है, एक सबसे ज़्यादा पैदावार देती है, एक सिर्फ़ 80 दिन लेती है, और एक झुलसे से बचाती है। नीचे साफ़-साफ़ लिखा है कि कौन-सी किस्म क्या देती है, ताकि आप अपने खेत के हिसाब से चुन सकें।
ये चारों किस्में PAU के सब्ज़ी विज्ञान विभाग में बनी हैं — डॉ. सत पाल शर्मा और डॉ. नवजोत सिंह बराड़ की टीम ने। दोनों के बारे में नीचे बताया है।
आपको क्या चाहिए, वो देखिए
| आपकी ज़रूरत | कौन-सी किस्म बोएँ |
|---|---|
| जल्दी खुदाई हो, अगेती भाव मिल जाए | पंजाब पोटैटो 103 |
| पैदावार सबसे ज़्यादा निकले | पंजाब पोटैटो 102 |
| अगेती भी चाहिए और माल भी अच्छा | पंजाब पोटैटो 101 |
| खेत में झुलसा ज़्यादा लगता है | पंजाब पोटैटो 104 |
चार किस्में क्यों निकालीं
पंजाब में बीज आलू बहुत होता है, और यहाँ आलू सब्ज़ियों के फ़सल-चक्र में आता है। यहाँ सब कुछ समय पर टिका है — आलू कब खुदेगा, उसके बाद अगली फ़सल कब बोई जाएगी।
इसलिए अगेती किस्म का फ़ायदा सिर्फ़ जल्दी भाव मिलना नहीं है। जल्दी खुदाई हो जाए तो खेत जल्दी ख़ाली होता है और अगली फ़सल आराम से बैठ जाती है। यही वजह है कि 101 और 103 उस किसान के बहुत काम की हैं जो साल में दो-तीन फ़सल लेता है।
चारों मिलकर आपको चुनने का मौक़ा देती हैं — अपने चक्र, अपनी बुवाई और अपनी मंडी के हिसाब से। पहले जो बीज मिल जाता था वही बोना पड़ता था; अब ऐसा नहीं है।
कौन-सी किस्म क्या देती है
PP-1012023पंजाब पोटैटो 101
अगेती की शुरुआत
- पौधा
- मध्यम ऊँचा, मज़बूत, सीधा
- कंद
- एक-से, अंडाकार-गोल, आँखें उथली
- छिलका
- हल्का भूरा
- गूदा
- क्रीमी सफ़ेद
अगेती भाव पकड़ने वालों के लिए। कंद एक जैसे निकलते हैं, इसलिए ताज़ा बेचने में दिक़्क़त नहीं आती।
PP-1022023पंजाब पोटैटो 102
पैदावार में सबसे आगे
- पौधा
- मध्यम ऊँचा, मज़बूत, सीधा, पत्ते हल्के हरे
- कंद
- अंडाकार-गोल, देखने में अच्छे, आँखें उथली
- छिलका
- हल्का भूरा
- गूदा
- क्रीमी पीला
PAU की सबसे ज़्यादा देने वाली आलू किस्म। जिसे कुल पैदावार चाहिए, वो यही बोए।
PP-1032025पंजाब पोटैटो 103
80 दिन वाली
- पौधा
- मध्यम ऊँचा, घना, मज़बूत, पत्ते हल्के हरे
- कंद
- लंबे-गोल
- छिलका
- हल्का भूरा
- गूदा
- क्रीमी सफ़ेद
सबसे जल्दी तैयार। 80–90 दिन में खोद लीजिए तो 142 क्विंटल, और खेत में पूरा रहने दीजिए तो 180 क्विंटल तक जाती है। दोनों रास्ते आपके हाथ में।
PP-1042025पंजाब पोटैटो 104
झुलसे से बचाव
- पौधा
- ऊँचा, सीधा, घना, पत्ते गहरे हरे
- कंद
- गोल
- छिलका
- हल्का भूरा
- गूदा
- पीलापन लिए सफ़ेद
मध्यम से पछेती पकने वाली। सबसे बड़ी बात यह कि इसमें पछेती झुलसे से मध्यम बचाव है — जहाँ हर साल झुलसा मारता है, वहाँ यही ठीक बैठती है।
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ग्रुप जॉइन कीजिएबीज कहाँ मिलेगा, और उसे साफ़ कैसे रखें
चारों किस्मों का बीज पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना से मिलता है। directorseeds@pau.edu और hodvc@pau.edu पर लिख दीजिए।
बीज मिल जाना आधा काम है। उसे साफ़ रखना बाक़ी आधा। PAU की सीड प्लॉट तकनीक यही बताती है। इसमें एक ही बात पकड़नी है — चेपा यानी माहू गिनते रहिए। जब 100 पत्तों पर चेपा की गिनती 20 पहुँच जाए, उसी दिन हौल काट दीजिए।
देर की तो चेपा वायरस को कंद तक पहुँचा देता है, और अगले साल वही बीज कमज़ोर निकलता है। समय पर काट दिया तो बीज साफ़ रहता है और अगले साल भी उतनी ही फ़सल देता है।
अपने ज़िले का आज का भाव आलू भाव पर देख लीजिए। खेती की पूरी बात आलू की खेती कैसे करें में लिखी है।
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WhatsApp कीजिएकिसने बनाईं ये किस्में
डॉ. सत पाल शर्माप्रधान सब्ज़ी ब्रीडर एवं विभागाध्यक्ष, सब्ज़ी विज्ञान विभाग, PAU लुधियानाआलू और खरबूजे के ब्रीडिंग का काम इन्हीं के ज़िम्मे है। हिमाचल के कीलोंग में बे-मौसमी हालात का इस्तेमाल करके PAU का अपना आलू ब्रीडिंग कार्यक्रम इन्होंने ही खड़ा किया। PhD टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी, अमेरिका से। चारों पंजाब पोटैटो किस्में और खरबूजे की तीन किस्में इन्हीं की सिफ़ारिश पर आईं। 66 शोध पत्र और 16 बेस्ट पेपर अवॉर्ड इनके नाम हैं, और ये इंडियन सोसाइटी ऑफ़ वेजिटेबल साइंस के फ़ेलो हैं।
डॉ. नवजोत सिंह बराड़सब्ज़ी ब्रीडर, सब्ज़ी विज्ञान विभाग, PAU लुधियानामई 2016 में KVK लंगड़ोया (नवांशहर) में सहायक प्रोफ़ेसर के तौर पर PAU से जुड़े। सितंबर 2018 से खनौरा (होशियारपुर) के सब्ज़ी अनुसंधान फ़ार्म पर सब्ज़ी ब्रीडर हैं। PAU के आलू ब्रीडिंग कार्यक्रम की टीम में हैं और नई किस्में बनाने तथा शुरुआती पीढ़ी का बीज तैयार करने का काम देखते हैं।
बीज PAU सीधे देती है, इसलिए ऊपर दिए पते पहला रास्ता हैं। फिर भी अगर आप चाहें कि हम मदद करें — कौन-सी किस्म आपके खेत में बैठेगी, एक एकड़ में कितना बीज लगेगा, आपके ज़िले में और कौन ये किस्में बो रहा है — तो चार बातें भेज दीजिए: ज़िला और राज्य, कितना रक़बा, कौन-सी किस्म चाहिए, और बुवाई कब करनी है।



