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प्रसंस्करण

स्क्रीन, रोलर या ऑप्टिकल? 2 से 5 टन प्रति घंटे के लिए कौन सी आलू ग्रेडर मशीन

2 से 5 टन प्रति घंटे पर गोल आलू के 2–3 ग्रेड के लिए स्क्रीन ग्रेडर काफ़ी है; लंबी किस्मों और ज़्यादा ग्रेड के लिए रोलर ग्रेडर; ख़राब आलू छाँटने के लिए ऑप्टिकल सॉर्टर। कैसे चुनें।

देवेंद्र कुमार झा · 18 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
आलू ग्रेडिंग मशीन कैसे चुनें: 45 से 60 मिमी के साइज़िंग गेज में रखे आलू

सीधा जवाब

2 से 5 टन प्रति घंटे पर गोल टेबल आलू के दो या तीन ग्रेड के लिए स्क्रीन ग्रेडर सीधी, कम ख़र्च वाली मशीन है और आम तौर पर काफ़ी होती है। अगर आपकी किस्म लंबी या अंडाकार है, चार-पाँच ग्रेड चाहिए या आलू को कम चोट लगनी चाहिए, तो रोलर (रेडियल) ग्रेडर लें। ऑप्टिकल सॉर्टर अलग काम है: कैमरे से सड़े, हरे, अंकुरित और कटे आलू निकालता है। इसे तब जोड़ें जब प्रोसेसर या एक्सपोर्टर साइज़ नहीं, ख़राबी की वजह से माल लौटाए।

2 से 5 टन प्रति घंटे का मतलब ज़मीन पर

मशीन की क्षमता प्रति घंटे बताई जाती है, पर आप उसे इसलिए ख़रीदते हैं कि तय दिनों में स्टोर या खुदाई का माल निकल जाए। आठ घंटे की एक शिफ़्ट में यह दायरा ऐसा दिखता है:

16 टन2 टन प्रति घंटे पर: किसान समूह या छोटा व्यापारी
24 से 32 टन3 से 4 टन प्रति घंटे पर: कोल्ड स्टोर का एक चैंबर, लगातार काम
40 टन5 टन प्रति घंटे पर: व्यस्त कोल्ड स्टोर या 50 किलो की बोरी भरने वाला पैकर

मशीन बनाने वाले क्षमता सबसे अच्छे हालात में बताते हैं: साफ़, सूखा आलू, बराबर डाला गया। गीला, मिट्टी वाला या बहुत मिला-जुला माल धीमा चलता है। ऐसी मशीन लें जिसकी बताई क्षमता आपके लक्ष्य से ऊपर हो, ठीक उतनी नहीं।

मशीन साइज़ से आलू कैसे छाँटती है: तीन तरीक़े

स्क्रीन वाली आलू ग्रेडिंग मशीन: साइज़ के छेदों वाला घूमता हुआ बेड
स्क्रीन ग्रेडर: आलू साइज़ के छेदों वाले बेड पर चलते हैं

1 · स्क्रीन (छलनी) ग्रेडर

तय साइज़ के छेद से आलू नीचे गिरते हैं

स्क्रीन ग्रेडर आलू को छेदों वाली परत पर हिलाता या आगे ले जाता है। छोटे आलू नीचे गिर जाते हैं, बाक़ी अगली, बड़े छेद वाली परत पर चले जाते हैं। कुछ मशीनों में हिलने वाली कई परतें ऊपर-नीचे होती हैं, कुछ में एक घूमता बेड होता है जिसके छेद आप चुनते हैं।

भारतीय बाज़ार में क्या मिलता है: तीन, चार या पाँच परत वाली हिलने वाली छलनी; ऐसे स्क्रीन बेड जिनमें छेद 20 से 100 मिमी तक, 1 मिमी के अंतर पर चुने जा सकते हैं; और ट्रॉली पर लगे स्क्रीन ग्रेडर, जो 2 और 5 टन प्रति घंटे पर तीन ग्रेड देते हैं और खेत, मंडी और कोल्ड स्टोर के बीच खींचकर ले जाए जा सकते हैं।

किसमें अच्छागोल टेबल किस्में, दो-तीन ग्रेड, कम बिजली, ले जाने और चलाने में आसान।
ध्यान रखेंलंबा, अंडाकार आलू छेद से तिरछा फिसलकर ग़लत ग्रेड में जा सकता है। गिरने की ऊँचाई कम रखें और गद्दी लगाएँ।
रोलर (रेडियल) आलू ग्रेडर: आगे बढ़ते हुए चौड़े होते रोलर और हर ग्रेड की अलग बेल्ट
रोलर ग्रेडर: हर साइज़ के लिए अलग बेल्ट

2 · रोलर (रेडियल) ग्रेडर

रोलर जिनके बीच का फ़ासला आगे बढ़ते हुए बढ़ता जाता है

आलू घूमते रोलरों के बेड पर आगे बढ़ते हैं। रोलरों के बीच का फ़ासला आख़िर की तरफ़ बढ़ता जाता है, इसलिए हर आलू वहीं नीचे गिरता है जहाँ फ़ासला उसकी सबसे छोटी चौड़ाई के बराबर हो, और अपनी अलग बेल्ट पर पहुँचता है। रोलर हर कंद को चलते-चलते घुमाते हैं, इसलिए लंबा आलू चौड़ाई से नापा जाता है, सिरे से नहीं।

भारतीय बाज़ार में क्या मिलता है: स्टेनलेस स्टील के रेडियल ग्रेडर जो 3 HP थ्री-फ़ेज़ मोटर और स्पीड कंट्रोल के साथ पाँच ग्रेड बनाते हैं, मॉडल के हिसाब से 1 से 5 टन प्रति घंटे पर, और माल की बनावट के हिसाब से 80 से 95% ग्रेडिंग सटीकता बताई जाती है। बड़ी सीरीज़ 1 से 20 टन प्रति घंटे पर 3 से 6 ग्रेड देती हैं, और रोलरों की बनावट ऐसी होती है कि लंबी किस्में फटें नहीं।

किसमें अच्छाअंडाकार और लंबी किस्में (चिप्स और फ्राइज़ वाली कई किस्में), चार से छह ग्रेड, आलू को कम चोट।
ध्यान रखेंज़्यादा चलने वाले पुर्ज़े और लंबी मशीन; लगातार थ्री-फ़ेज़ बिजली और रोलर साफ़ रखने वाला आदमी चाहिए।
सॉर्टिंग लाइन पर कतारों में फैले आलू, जैसे ऑप्टिकल सॉर्टर को चाहिए
सॉर्टिंग लाइन पर कतारों में फैले आलू: कैमरा सॉर्टर को आलू ऐसे ही एक परत में चाहिए

3 · ऑप्टिकल सॉर्टर

कैमरे हर आलू को देखते हैं

ऑप्टिकल सॉर्टर हर आलू को कैमरों के नीचे घुमाता है और तस्वीरों से फ़ैसला करता है। यह साइज़ भी नाप सकता है, पर इसका असली काम गुणवत्ता है: सड़े, हरे, अंकुरित, छेद वाले और कटे आलू निकालना, जिन्हें स्क्रीन या रोलर ग्रेडर आगे जाने देते हैं।

भारतीय बाज़ार में क्या मिलता है: भारत में बने कैमरा सॉर्टर हर आलू की 8 तक तस्वीरें लेते हैं, 20 से 160 मिमी के आलू संभालते हैं, उन्हें 2 से 4 निकासी कतारों में भेजते हैं, और 1 से 20 टन प्रति घंटे के मॉडल में आते हैं; पकड़ने की सटीकता 96% तक बताई जाती है।

किसमें अच्छाप्रोसेसर या एक्सपोर्ट को जाने वाला माल, जहाँ कुछ ख़राब आलू पूरे ट्रक को पास या फ़ेल करवा देते हैं।
ध्यान रखेंतीनों में सबसे महँगा; आलू साफ़ और एक परत में फैले हुए आने चाहिए।

छोटे माल के लिए चौथा तरीक़ा: लहर वाली बेल्ट। कुछ ग्रेडर रोलर की जगह कटी हुई बेल्टों पर माल को उठाते-गिराते लहर की तरह आगे बढ़ाते हैं, 4 से 6 टन प्रति घंटे पर दो से चार ग्रेड में। इसका एक मॉडल ट्रैक्टर पर लगता है, इसलिए खेत हो या स्टोर, जहाँ आलू है वहीं ग्रेडिंग हो जाती है।

तय नहीं कर पा रहे कि आपके स्टोर या लाइन के लिए कौन सी मशीन ठीक है? अपनी क्षमता और किस्म बताइए।

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किस काम और किस क्षमता के लिए कौन सी मशीन

आपकी स्थितिक्षमताकौन सा ग्रेडर देखेंबाज़ार में क्या मिलता है
किसान समूह या व्यापारी, गोल टेबल आलू, खेत या स्टोर पर ग्रेडिंगकरीब 2 टन/घंटामोबाइल स्क्रीन ग्रेडरट्रॉली पर लगा स्क्रीन ग्रेडर, 2 टन/घंटा, तीन ग्रेड
कोल्ड स्टोर, गोल टेबल किस्में, मंडी के लिए दो-तीन ग्रेड4 से 5 टन/घंटास्क्रीन ग्रेडर या लहर-बेल्ट ग्रेडर5 टन/घंटा वाला स्क्रीन ग्रेडर; 4 से 6 टन/घंटा वाला लहर-बेल्ट ग्रेडर, दो से चार ग्रेड
अंडाकार या चिप्स-फ्राइज़ वाली किस्में, चार-पाँच ग्रेड5 टन/घंटा तकरोलर (रेडियल) ग्रेडररेडियल ग्रेडर, 1 से 5 टन/घंटा, पाँच ग्रेड
जगह पर बिजली नहीं4 से 7.5 टन/घंटाडीज़ल या ट्रैक्टर वाला ग्रेडर8 HP डीज़ल इंजन पर 7.5 टन/घंटा तक वाला मोबाइल ग्रेडर (करीब 1 लीटर प्रति घंटा); ट्रैक्टर पर लगने वाला लहर-बेल्ट ग्रेडर
ख़राबी पर माल लौटाने वाले प्रोसेसर या एक्सपोर्टर को सप्लाई2 से 5 टन/घंटापहले स्क्रीन या रोलर ग्रेडर, फिर ऑप्टिकल सॉर्टरभारत में बने कैमरा सॉर्टर, 1 से 20 टन/घंटा के मॉडल

एक असली 2 से 5 टन प्रति घंटे की लाइन, जैसी ख़रीदार ने माँगी

2 से 5 टन प्रति घंटे की पूरी ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, धुलाई और पैकिंग लाइन खोज रहे एक ख़रीदार ने ठीक यही सीधा रास्ता माँगा: दो हिलने वाली स्क्रीन, जो दो ग्रेड और एक ओवरसाइज़ देती हैं, फिर एक तौल मशीन जो 20 से 50 किलो की बोरियाँ ±200 से 250 ग्राम के अंदर भरती है। इस आकार पर ज़्यादातर पैकर ऐसे ही शुरू करते हैं: साइज़ के लिए स्क्रीन, ख़राब आलू के लिए जाँच मेज़ पर लोग, और ख़रीदार माँगे तब कैमरा सॉर्टर।

खेत में मिलीमीटर के निशान वाले साइज़िंग फ़्रेम से आलू के कंद नापते हुए
खेत में साइज़िंग फ़्रेम से कंद नापना: हर खाना मिलीमीटर में एक ग्रेड है

ख़रीदने से पहले सात सवाल

  1. आपका ख़रीदार किन ग्रेड के पैसे देता है? मशीन वाले से बात करने से पहले हर ग्रेड का मिलीमीटर या ग्राम वाला दायरा लिख लें।
  2. आपके आलू का आकार कैसा है? गोल किस्में स्क्रीन पर ठीक छँटती हैं। लंबी और अंडाकार किस्में रोलर पर ज़्यादा सही ग्रेड होती हैं।
  3. बिजली कैसी है? थ्री-फ़ेज़ सप्लाई, मशीन पर डीज़ल इंजन, या ट्रैक्टर।
  4. स्थायी या मोबाइल? ट्रॉली वाला ग्रेडर एक सीज़न में कई खेतों या स्टोरों का काम कर सकता है।
  5. ख़राब आलू कौन निकालेगा? ऑप्टिकल सॉर्टर न हो तो जाँच मेज़ और उस पर काम करने वाले लोगों की योजना बनाएँ।
  6. आलू कितनी ऊँचाई से गिरते हैं और गद्दी कैसी है? लंबी गिरावट की चोट हफ़्तों बाद स्टोर में दिखती है। गिरने की ऊँचाई और रबर की परत के बारे में पूछें।
  7. क्या अपने आलू पर मशीन चलती देख सकते हैं? पैसे देने से पहले अपनी किस्म पर, अपनी ज़रूरत की रफ़्तार पर ट्रायल माँगें।

ग्रेडर ख़रीदना है या बेचना है?

अपनी क्षमता, किस्म और ग्रेड की गिनती बताइए। हम आपको ऐसी मशीन बनाने वालों से जोड़ेंगे जिनकी मशीन आपके काम की हो, या आपका ग्रेडर उन ख़रीदारों तक पहुँचाएँगे जो अभी खोज रहे हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2 से 5 टन प्रति घंटे के लिए कौन सी आलू ग्रेडिंग मशीन सबसे अच्छी है?
गोल टेबल आलू के दो-तीन ग्रेड के लिए स्क्रीन ग्रेडर आम तौर पर काफ़ी है और सबसे सस्ता पड़ता है। अंडाकार किस्मों या चार से छह ग्रेड के लिए रोलर (रेडियल) ग्रेडर ज़्यादा सही छाँटता है। ऑप्टिकल सॉर्टर तभी जोड़ें जब ख़रीदार सड़न, हरापन या कटे आलू की वजह से माल लौटाता हो।
आलू ग्रेडर और आलू सॉर्टर में क्या फ़र्क़ है?
ग्रेडर आलू को साइज़ के हिसाब से ग्रेड में बाँटता है। सॉर्टर, जो ज़्यादातर ऑप्टिकल होता है, गुणवत्ता देखकर सड़े, हरे, अंकुरित और ख़राब आलू निकालता है। कई लाइनों में दोनों होते हैं, पहले ग्रेडर फिर सॉर्टर।
5 टन प्रति घंटे वाली मशीन एक दिन में कितना आलू ग्रेड करती है?
आठ घंटे की शिफ़्ट में करीब 40 टन, अगर आलू साफ़ हों और बराबर डाले जाएँ। गीले या मिट्टी वाले माल में रफ़्तार कम रहती है, इसलिए अपनी ज़रूरत से थोड़ी ज़्यादा क्षमता वाली मशीन लें।
क्या लंबी किस्मों के लिए रोलर ग्रेडर बेहतर है?
हाँ। रोलर हर आलू को घुमाते हुए आगे बढ़ाते हैं और उसकी सबसे छोटी चौड़ाई से साइज़ तय करते हैं, इसलिए लंबा कंद स्क्रीन के छेद की तरह सिरे के बल नीचे नहीं फिसलता।
क्या बिना बिजली के आलू ग्रेडर चल सकता है?
हाँ। कुछ मोबाइल ग्रेडर में अपना छोटा डीज़ल इंजन होता है और कुछ ट्रैक्टर पर लगते हैं, इसलिए खेत या स्टोर पर बिना बिजली के ग्रेडिंग हो जाती है।
आलू ग्रेडिंग मशीनग्रेडरऑप्टिकल सॉर्टररोलर ग्रेडरस्क्रीन ग्रेडरकोल्ड स्टोरेज
लेखक के बारे में
देवेंद्र कुमार झा
देवेंद्र कुमार झा
आलू उद्योग इंटेलिजेंस विशेषज्ञ

इंडियन पोटैटो के संस्थापक एवं निदेशक — आलू पर भरोसेमंद जानकारी (पोटैटो इंटेलिजेंस) और आलू से जुड़े हितधारकों का समुदाय खड़ा करने को समर्पित मंच। कृषि अभियांत्रिकी में बी.टेक; आलू के क्षेत्र के जानकार और इसके प्रति गहरा लगाव रखने वाले।

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