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नैवाशा घोषणापत्र और नई इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप क्या है?

केन्या में 13वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस से दो चीज़ें निकलीं: ज्ञान बाँटने का नैवाशा घोषणापत्र, और एक नई इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप जिसका रिसर्च हब चार विषयों पर काम करेगा। भारत इसमें कहाँ फ़िट बैठता है।

देवेंद्र कुमार झा · 08 नवंबर 2026 · 7 मिनट
भाषाहिन्दीEnglish
केन्या के खेत में मेहमान और आलू किसान साथ खड़े: नैवाशा घोषणापत्र और इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप
देवेंद्र के

विश्लेषण: देवेंद्र के · 8 नवंबर 2026

पोटैटो इंटेलिजेंस एक्सपर्ट · को-फ़ाउंडर, IndianPotato.com · LinkedIn पर फ़ॉलो करें →

सीधी बात

नैवाशा घोषणापत्र वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस का वादा है कि वह अपने नेटवर्क से आलू का ज्ञान ज़्यादा बाँटेगी, और ज़ोर पूरी वैल्यू चेन में तकनीक और नवाचार पर रहेगा।

यह डबलिन घोषणापत्र पर बना है, जो विकासशील इलाक़ों की कम पैदावार बढ़ाने के लिए सरकारी-निजी साझेदारी पर ज़ोर देता है। इसके साथ कांग्रेस ने इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप शुरू की। इसके बीच में है पोटैटो रिसर्च कोलैबोरेशन हब, एक जीता-जागता नेटवर्क जहाँ रिसर्चर जुड़ते हैं और साझा समस्याएँ सुलझाते हैं, न कि पेपरों की लाइब्रेरी।

डिप्लॉइड ब्रीडिंगटिकाऊ खेतीमार्केटिंगएपिकल रूटेड कटिंग

यह कहाँ तय हुआ?

13वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस अक्टूबर 2026 के आख़िर में नैरोबी से करीब 100 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम, लेक नैवाशा पर हुई। मेज़बान थे नेशनल पोटैटो काउंसिल ऑफ़ केन्या और फ्रेशक्रॉप। कांग्रेस में 70 से ज़्यादा देशों के करीब 800 डेलीगेट आए, जिनमें 25 देश अफ़्रीका के थे।

थीम थी "ग्लोबल पोटैटो पार्टनरशिप फ़ॉर एन्हांस्ड फ़ूड सिस्टम्स, न्यूट्रिशन सिक्योरिटी एंड ट्रेड"। घोषणापत्र और नई साझेदारी, दोनों सीधे इसी शब्द से निकले: पार्टनरशिप।

डबलिन से नैवाशा तक: घोषणापत्र किस पर बना है

11वीं कांग्रेस · डबलिन, 2022 डबलिन घोषणापत्र

नाम डबलिन कांग्रेस पर, और वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस इंक. ने मई 2023 में औपचारिक रूप से अपनाया। मक़सद: आलू की वैल्यू चेन में सरकारी-निजी साझेदारी, ताकि ज्ञान बँटे, कम पैदावार बढ़े और दक्षिण अमेरिका, अफ़्रीका व एशिया के विकासशील इलाक़ों को सहारा मिले।

इस पर बना →
13वीं कांग्रेस · नैवाशा, 2026 नैवाशा घोषणापत्र

कांग्रेस के नेटवर्क से ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाने का वादा, जिसमें ज़ोर आलू की वैल्यू चेन में तकनीक और नवाचार पर है।

अगला पड़ाव: 14वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस, गेंट, बेल्जियम, नवंबर 2028 के आख़िर में।

वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस के अध्यक्ष पीटर वैंडरज़ाग ने डेलीगेटों से कहा कि संगठन अब दुनिया भर में आलू उत्पादन को रोकने वाली ज्ञान की कमी भरने के लिए आगे आ रहा है। उन्होंने कहा कि अफ़्रीका में आलू 1900 के दशक की शुरुआत में ही पहुँचा, पर आज यह लाखों छोटे किसानों का बड़ा भोजन और कमाई का ज़रिया है।

आसान भाषा में: डबलिन ने लक्ष्य तय किया, साझेदार मिलकर काम करें ताकि कम पैदावार वाले इलाक़ों के किसान बराबरी पर आएँ। नैवाशा ने तरीक़ा तय किया, कांग्रेस के नेटवर्क से ज्ञान और तकनीक उन लोगों तक पहुँचे जिन्हें इसकी ज़रूरत है।

इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप क्या है?

कांग्रेस ने केन्या के इस मंच से इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप की घोषणा की, जो आलू की रिसर्च और विकास का केंद्र बनेगी। यह उन दिक़्क़तों का जवाब है जो हर आलू देश की साझा हैं: बढ़ते कीट और बीमारियाँ, जलवायु परिवर्तन, पानी पर दबाव, टिकाऊ उत्पादन की ज़रूरत, अच्छे बीज तक पहुँच, और कई जगह बिखरी हुई रिसर्च।

इसका दिल है पोटैटो रिसर्च कोलैबोरेशन हब। सोच यह है कि एक सक्रिय नेटवर्क हो जहाँ रिसर्चर मिलें और साझा समस्याओं पर साथ काम करें। यह बातचीत की जगह है, रिसर्च पेपरों का भंडार नहीं। हब चार क्षेत्रों पर काम करेगा।

क्षेत्र 01

डिप्लॉइड ब्रीडिंग

दो क्रोमोसोम सेट वाले आलू की ब्रीडिंग, जिन्हें कंद की जगह असली बीज से उगाया जा सकता है। CIP ने कांग्रेस में बताया कि डिप्लॉइड हाइब्रिड ट्रू सीड के ट्रायल जल्द आ रहे हैं।

क्षेत्र 02

टिकाऊ खेती

कम पानी, बेहतर मिट्टी और कम नुकसान के साथ ज़्यादा आलू उगाना, क्योंकि फ़सल पर जलवायु का दबाव बढ़ रहा है।

क्षेत्र 03

मार्केटिंग

लोगों को बताना कि आलू अच्छा खाना क्यों है। कांग्रेस की एक मार्केटिंग वर्कशॉप में पोषण और टिकाऊपन की वो कहानियाँ साझा हुईं जो फ़सल बेचती हैं।

क्षेत्र 04

एपिकल रूटेड कटिंग

वायरस-मुक्त टिश्यू कल्चर पौधों से काटी गई जड़ वाली टहनियाँ, जिन्हें खेत में लगाकर साफ़ बीज बनाया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि यह तरीक़ा केन्या में पैदावार और बीज की कमाई पहले से बढ़ा रहा है, जैसे भारत में महिलाओं के बीज हब में।

साझेदारी ताक़त को कई गुना करती है। इससे तरक़्क़ी तेज़ होती है, असर बड़ा होता है और रिश्ते मज़बूत बनते हैं। — डॉ. नाइजेल क्रंप, वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस बोर्ड सदस्य; जनरल मैनेजर और प्रिंसिपल प्लांट पैथोलॉजिस्ट, AuSPICA; 12वीं कांग्रेस (एडिलेड, 2024) के मेज़बान

साझेदारी लॉन्च करते हुए डॉ. क्रंप ने यूरोब्लाइट प्रोग्राम का उदाहरण दिया कि साझा काम क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि इससे आलू की सबसे नुकसानदेह बीमारियों में से एक, लेट ब्लाइट यानी पछेती झुलसा, की समझ और रोकथाम बेहतर हुई है।

CIP ने कांग्रेस में क्या कहा

इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) के महानिदेशक डॉ. साइमन हेक ने बताया कि साझेदारी अभी क्यों ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि अफ़्रीका के आलू क्षेत्र में साफ़ और अच्छे बीज की कमी है, स्थानीय हालात के लिए बनी किस्में कम हैं, मशीनीकरण सीमित है, जलवायु का दबाव बढ़ रहा है और निवेश बहुत कम है। उन्होंने यह भी कहा कि दानदाताओं की फ़ंडिंग घटने से CIP को ज़्यादा सरकारी-निजी साझेदारियों की ओर जाना पड़ा है।

CIP ने क्या बतायाहालत क्या है
डिप्लॉइड हाइब्रिड ट्रू पोटैटो सीडडॉ. हेक ने कांग्रेस में कहा, ट्रायल जल्द आ रहे हैं
प्रिसीज़न-ब्रेड, लेट ब्लाइट प्रतिरोधी शांगीCIP साझेदारों के साथ केन्या की सबसे लोकप्रिय किस्म शांगी के झुलसा-प्रतिरोधी रूप पर काम कर रहा है
रवांडा में विक्टोरिया और न्दामिरावक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस के हफ़्ते में रवांडा ने इन झुलसा-प्रतिरोधी किस्मों के व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति दी
पेरू में CIP का जीनबैंकCIP की अपनी गिनती से करीब 9,000 सक्रिय आलू एक्सेशन; CIP इसमें AI की मदद से पहुँच खोल रहा है

वक्ताओं ने बताया कि झुलसा-प्रतिरोध के इस काम में एंडीज़ के देसी आलुओं के प्रतिरोधी जीन इस्तेमाल होते हैं। ये चारों बातें हब के डिप्लॉइड ब्रीडिंग और टिकाऊ खेती वाले क्षेत्रों से मेल खाती हैं।

WPC 2026 की छह थीम

घोषणापत्र और साझेदारी उन छह थीम पर टिकी हैं जिनसे कांग्रेस का कार्यक्रम बना था।

उत्पादन, व्यापार, नीति और नियमव्यापार का बहाव, फ़ाइटोसैनिटरी नियम और बाज़ार खोलने वाली नीतियाँ।
किस्मों का विकास और बीज प्रणालीब्रीडिंग, बायोटेक और मज़बूत किस्में किसानों तक पहुँचाना।
कीट, कटाई के बाद और वैल्यू एडिशनसमेकित कीट प्रबंधन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और नुकसान घटाना।
तकनीक, मशीनीकरण और बिग डेटाडिजिटल खेती, सटीक उपकरण, जलवायु अनुकूलन और AI।
खाद्य और पोषण सुरक्षामहिलाओं, युवाओं और छोटे कारोबारों को साथ लेने वाले मॉडल।
साझेदारी और निजी निवेशसरकारें, रिसर्च संस्थान और कंपनियाँ मिलकर काम और निवेश करें।

भारत इससे कैसे जुड़े

हब के चार क्षेत्रों में से कम से कम एक में भारत पहले से गंभीर काम कर रहा है, और उसकी अपनी ज़मीन पर CIP का केंद्र है। इससे भारतीय रिसर्चरों, बीज कंपनियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के लिए जुड़ने का सीधा रास्ता बनता है।

साझेदारी में भारत के रास्ते

रिसर्चर: ICAR-CPRI के कटिंग के काम से शुरू करें

ICAR-CPRI ने नीलगिरि से ग्वालियर और पूर्वोत्तर तक एपिकल रूटेड कटिंग परखी है। ICAR ने जुलाई 2025 में इस तकनीक को प्रमाणित किया। हब की कटिंग धारा के लिए यह तैयार केस स्टडी है।

बीज कंपनियाँ: लाइसेंस वाले कटिंग उत्पादक

ICAR-CPRI ने बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए अपना रूटेड कटिंग तरीक़ा 12 कंपनियों को लाइसेंस दिया है। इनके पास खेत का वो डेटा है जिसकी तुलना अफ़्रीका और एशिया के हब सदस्य करना चाहेंगे।

ब्रीडर: आगरा में CIP का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र

केंद्रीय कैबिनेट ने जून 2025 में आगरा के सिंगना में CIP के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र को मंज़ूरी दी। CIP 1975 से भारत में काम कर रहा है। CIP के डिप्लॉइड और ट्रू सीड के काम से जुड़ने की यह स्वाभाविक कड़ी है।

FPO: मार्केटिंग और बीज साथ-साथ

बीज उगाने या ख़रीदने वाले FPO हब की मार्केटिंग और कटिंग धाराओं से, और कांग्रेस में हुए केन्या-तंज़ानिया बीज समझौते से सीख सकते हैं। हब से जुड़ने की जानकारी पर नज़र रखें और गेंट 2028 की तैयारी करें।

वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस ने अभी नहीं बताया है कि संस्थाएँ हब से कैसे जुड़ेंगी। जैसे ही बताएगी, हम उसके क़दम रिपोर्ट करेंगे।

स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस

देवेंद्र के, पोटैटो इंटेलिजेंस एक्सपर्ट और IndianPotato के को-फ़ाउंडर
देवेंद्र के

देवेंद्र के पोटैटो इंटेलिजेंस एक्सपर्ट और IndianPotato.com व indianpotato.in के को-फ़ाउंडर हैं। वे भारत की आलू अर्थव्यवस्था, यानी भाव, प्रोसेसिंग, बीज, कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग, स्टोरेज और निर्यात पर लिखते हैं, और भारत में जगह बना रही प्रोसेसिंग, बीज और मशीन कंपनियों के साथ काम करते हैं। LinkedIn पर देवेंद्र के →

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नैवाशा घोषणापत्र क्या है?
नैवाशा घोषणापत्र अक्टूबर 2026 में केन्या के नैवाशा में हुई 13वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में लिया गया संकल्प है। इसमें कांग्रेस के नेटवर्क से ज़्यादा ज्ञान बाँटने का वादा है, और ज़ोर आलू की पूरी वैल्यू चेन में तकनीक और नवाचार पर है।
इसका डबलिन घोषणापत्र से क्या रिश्ता है?
यह डबलिन घोषणापत्र पर बना है, जिसका नाम 2022 की डबलिन कांग्रेस पर है और जिसे वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस इंक. ने मई 2023 में औपचारिक रूप से अपनाया। डबलिन घोषणापत्र दक्षिण अमेरिका, अफ़्रीका और एशिया के विकासशील इलाक़ों में ज्ञान बाँटने और कम पैदावार बढ़ाने के लिए सरकारी-निजी साझेदारी माँगता है।
इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप क्या है?
यह 2026 की वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस में शुरू की गई नई साझेदारी है, जो आलू की रिसर्च और विकास का केंद्र बनेगी। इसका मुख्य हिस्सा पोटैटो रिसर्च कोलैबोरेशन हब है, एक सक्रिय नेटवर्क जहाँ रिसर्चर मिलकर साझा समस्याएँ सुलझाते हैं, न कि रिसर्च पेपरों की लाइब्रेरी।
हब के चार रिसर्च क्षेत्र कौन से हैं?
पोटैटो रिसर्च कोलैबोरेशन हब चार विषयों पर काम करेगा: डिप्लॉइड ब्रीडिंग, टिकाऊ खेती, मार्केटिंग और एपिकल रूटेड कटिंग।
इंटरनेशनल पोटैटो पार्टनरशिप किसने शुरू की?
डॉ. नाइजेल क्रंप ने इसे लॉन्च किया। वे वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस के बोर्ड सदस्य, ऑस्ट्रेलियन सीड पोटैटो इंडस्ट्री सर्टिफ़िकेशन अथॉरिटी (AuSPICA) के जनरल मैनेजर और प्रिंसिपल प्लांट पैथोलॉजिस्ट हैं, और 12वीं कांग्रेस के मेज़बान रहे। उन्होंने कहा कि साझेदारी ताक़त को कई गुना करती है और इससे तरक़्क़ी तेज़, असर बड़ा और रिश्ते मज़बूत होते हैं।
भारत इसमें कैसे हिस्सा ले सकता है?
भारतीय रिसर्चर ICAR-CPRI का एपिकल रूटेड कटिंग का काम ला सकते हैं, जिसे ICAR ने जुलाई 2025 में प्रमाणित किया और 12 कंपनियों को लाइसेंस दिया। ब्रीडर आगरा में CIP के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र के ज़रिए जुड़ सकते हैं, जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने जून 2025 में मंज़ूरी दी। हब से जुड़ने का तरीक़ा वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस ने अभी जारी नहीं किया है।
अगली वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस कहाँ होगी?
14वीं वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस नवंबर 2028 के आख़िर में बेल्जियम के गेंट शहर में होगी।
वर्ल्ड पोटैटो कांग्रेस 2026केन्याCIPICAR-CPRIएपिकल रूटेड कटिंगआलू रिसर्च
लेखक के बारे में
देवेंद्र कुमार झा
देवेंद्र कुमार झा
आलू उद्योग इंटेलिजेंस विशेषज्ञ

इंडियन पोटैटो के संस्थापक एवं निदेशक — आलू पर भरोसेमंद जानकारी (पोटैटो इंटेलिजेंस) और आलू से जुड़े हितधारकों का समुदाय खड़ा करने को समर्पित मंच। कृषि अभियांत्रिकी में बी.टेक; आलू के क्षेत्र के जानकार और इसके प्रति गहरा लगाव रखने वाले।

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