2026 में यूपी में आलू का भाव क्यों गिरा: कोल्ड स्टोर 85% भरे, बिक्री धीमी
यूपी में अगस्त तक आलू का औसत भाव ₹860 कुंतल रहा, पिछले साल ₹1,088 था। बड़ी फ़सल, 85% भरे कोल्ड स्टोर, धीमी निकासी और महँगी ढुलाई ने भाव गिराया।

सीधी बात
उत्तर प्रदेश में अगस्त तक आलू का औसत भाव ₹860 कुंतल रहा, जबकि पिछले साल ₹1,088 था। इस बार फ़सल बड़ी हुई, कोल्ड स्टोर 85% भर गए, स्टोर से आलू हर साल से धीरे निकल रहा है, और खाड़ी देशों के हालात से ढुलाई महँगी होने के कारण दूसरे राज्यों और विदेश में आलू बेचना मुश्किल हो गया है। ये आंकड़े उत्तर प्रदेश सरकार के अगस्त 2026 के हैं।
पिछले साल और इस साल में फ़र्क़
भाव पर असर डालने वाला हर आंकड़ा बेचने वाले के ख़िलाफ़ गया है। आलू ज़्यादा है, उसमें से ज़्यादा कोल्ड स्टोर में पड़ा है, और मंडी उसके कम दाम दे रही है।
| उत्तर प्रदेश | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| आलू का रकबा | 6.97 लाख हेक्टेयर | 7.42 लाख हेक्टेयर |
| आलू किसान | 17.42 लाख | 18.55 लाख |
| उत्पादन | 244.00 लाख टन | 246.72 लाख टन |
| निजी कोल्ड स्टोर | 2,243 | 2,363 |
| कोल्ड स्टोर की क्षमता | 191.77 लाख टन | 202.99 लाख टन |
| स्टोर में रखा आलू | 158.19 लाख टन | 173.03 लाख टन |
| अब तक स्टोर से निकला | 20.96% | 22.25% |
| अभी भी स्टोर में | 125.03 लाख टन | 134.53 लाख टन |
| औसत मंडी भाव | ₹1,087.95 / कुंतल | ₹859.64 / कुंतल |
| सबसे ऊँचा भाव | ₹1,210 / कुंतल | ₹980 / कुंतल |
| सबसे नीचा भाव | ₹800 / कुंतल | ₹600 / कुंतल |
उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़े, अगस्त 2026। स्टोर और निकासी के आंकड़े अगस्त की शुरुआत तक के हैं।
भाव गिरने की पाँच वजहें
- 1ज़्यादा ज़मीन पर बड़ी फ़सलआलू का रकबा 6.97 से बढ़कर 7.42 लाख हेक्टेयर हो गया, और इस सीज़न बाढ़, पाला या कोई और आपदा नहीं आई। देश का करीब एक-तिहाई आलू उगाने वाले यूपी में 246.72 लाख टन आलू निकला।
- 2कोल्ड स्टोर बढ़े, और भर भी गएयूपी में इस साल 120 नए निजी कोल्ड स्टोर बने, कुल क्षमता 202.99 लाख टन हो गई। किसानों और व्यापारियों ने इन्हें 85% तक भर दिया, यानी पिछले साल से 14.84 लाख टन ज़्यादा आलू स्टोर में रखा गया।
- 3आलू स्टोर से निकल नहीं रहाअगस्त तक स्टोर में रखे आलू का सिर्फ़ 22.25% ही निकला था। 134.53 लाख टन अंदर ही पड़ा था, और सरकार का अंदाज़ा है कि निकासी धीमी ही रहेगी, क्योंकि बहुत से किसान अच्छे भाव के इंतज़ार में आलू रोके बैठे हैं।
- 4यूपी से बाहर बेचना मुश्किल हुआपिछले कई महीनों से खाड़ी देशों के हालात की वजह से ढुलाई और दूसरे ख़र्चे बढ़ गए हैं। दूसरे राज्यों और विदेश में यूपी का आलू कम जा रहा है, इसलिए ज़्यादा आलू प्रदेश में ही रह जाता है।
- 5दूसरे राज्यों में भी फ़सल अच्छी हुईपश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण के राज्यों में अपनी फ़सल बड़ी हुई, इसलिए उन्हें यूपी से कम आलू चाहिए। सरकार का अंदाज़ा है कि करीब 15 लाख टन आलू सरप्लस बचेगा।

यूपी का आलू कहाँ जाता है
इस साल यूपी में निकले 246.72 लाख टन आलू के इस्तेमाल का हिसाब सरकार ने ऐसे लगाया है:
यानी यूपी अपनी फ़सल का करीब 40% दूसरे राज्यों के भरोसे बेचता है। जब यह व्यापार धीमा पड़ता है, तो प्रदेश में भाव गिर जाता है। प्रोसेसिंग से मदद मिलती है, पर धीरे: खाद्य प्रसंस्करण नीति 2023 के तहत प्रदेश में आलू की 11 यूनिटें लगी हैं, जो साल में करीब 59,134 टन आलू इस्तेमाल करेंगी। लाखों टन के सरप्लस के आगे यह बहुत कम है।

सरकार क्या कर रही है
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026-27 के लिए आलू किसानों की मदद की दो योजनाएँ शुरू की हैं। दोनों में पैसा सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में आता है, और दोनों के लिए आवेदन उद्यान विभाग के पोर्टल dbt-uphorticulture.in पर ऑनलाइन होता है।
कोल्ड स्टोर किराए में मदद
निजी कोल्ड स्टोर में रखे आलू के किराए पर ₹100 कुंतल की मदद, जबकि किराया औसतन करीब ₹310 कुंतल है। एक किसान को 2 हेक्टेयर तक और 200 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक, ज़्यादा से ज़्यादा ₹20,000। पैसा आलू स्टोर से निकालने के बाद मिलता है।
लागत से कम भाव पर भरपाई
सरकार ने आलू की लागत ₹700 कुंतल तय की है। जो किसान अच्छा आलू मंडी में इससे कम पर बेचे, उसे लागत का 25% या घाटे की रकम, इनमें जो कम हो, वह मिलेगी। 1 जनवरी से 15 अप्रैल और 1 जुलाई से 31 अक्टूबर तक की बिक्री गिनी जाती है।
राज्य और केंद्र की और योजनाओं के लिए पढ़ें: कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी योजना, कितनी सब्सिडी और आवेदन कैसे करें।
आपके लिए इसका मतलब
अगर आप यूपी में आलू उगाते हैं
इस साल भाव अचानक उछलने की उम्मीद में आलू रोके रखना जोखिम भरा है: स्टोर भरे हैं और सरप्लस असली है। अभी से पोर्टल पर पंजीकरण करा लें, ताकि आलू निकालते समय किराए की मदद ले सकें, और लागत से कम पर बेचें तो मंडी का गेट पास और बिक्री की पर्ची सँभालकर रखें।
अगर आप आलू ख़रीदते, प्रोसेस करते या व्यापार करते हैं
यह ख़रीदार का सीज़न है। यूपी के कोल्ड स्टोर में माल बहुत है, भाव पिछले साल से काफ़ी नीचे हैं, और अक्टूबर की खिड़की बंद होने से पहले बेचने वाले स्टॉक निकालना चाहते हैं। जिन प्रोसेसरों को लगातार माल चाहिए, वे अभी ऐसे भाव पर मात्रा पक्की कर सकते हैं जो पिछले साल नहीं मिले।
अगर आप कोल्ड स्टोर चलाते हैं
स्टोर भर तो गए, पर धीमी निकासी से आलू चैंबरों में हर साल से ज़्यादा दिन पड़ा रह सकता है। सीज़न ख़त्म होने तक कितना माल निकलता है, इस पर नज़र रखें, और किसानों से निकासी की बात पहले ही कर लें।
बड़ी तस्वीर के लिए पढ़ें: यूपी देश का एक-तिहाई आलू क्यों उगाता है, यूपी के किन ज़िलों में सबसे ज़्यादा आलू होता है, कोल्ड स्टोरेज से किसान का हिस्सा कितना बढ़ता है, और मंडियों का आज का आलू भाव।
यूपी से आलू ख़रीदना है?
किस्म, मात्रा और कहाँ चाहिए, यह बताएँ। हम आपको यूपी के कोल्ड स्टोर के माल और किसानों से जोड़ेंगे।
स्रोत
- उत्तर प्रदेश सरकार, उद्यान विभाग के आंकड़े, 12 और 19 अगस्त 2026 (up.gov.in)
- उत्तर प्रदेश उद्यान योजनाओं का पोर्टल, dbt-uphorticulture.in
- मंडी भाव: एगमार्कनेट, भारत सरकार
स्रोत: इंडियन पोटैटो इंटेलिजेंस



